बांग्लादेश में हिन्दू युवक को जिन्दा जलाया! शरीयतपुर में न्यू ईयर से पहले बांग्लादेश ने फिर दिखाई खूनी शक्ल
बांग्लादेश में हिंदू होना अब धीरे-धीरे जुर्म बनता जा रहा है। साल 2025 के आखिरी दिन, जब पूरी दुनिया नए साल के स्वागत की तैयारी में थी, उसी वक्त बांग्लादेश के शरीयतपुर जिले में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली वारदात को अंजाम दिया गया। खोकन चंद्र नाम के एक हिंदू युवक को कट्टर भीड़ ने घेर लिया, बेरहमी से पीटा और फिर जिंदा जलाने की कोशिश की गई। यह हमला सिर्फ एक इंसान पर नहीं था, बल्कि पूरे हिंदू समाज के अस्तित्व पर किया गया हमला था।
31 दिसंबर की रात, जब नफरत ने खोकन चंद्र को आग में झोंक दिया
घटना 31 दिसंबर की रात की है। आरोप है कि अचानक उग्र भीड़ ने खोकन चंद्र को निशाना बना लिया। पहले उसे चारों ओर से घेरकर मारा-पीटा गया, फिर उसके शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी गई। आग की लपटों में घिरा खोकन चंद्र मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन हमलावरों के दिल में जरा भी दया नहीं की।
जलते शरीर के साथ तालाब में कूदा युवक
आग की भयावह लपटों के बीच खोकन चंद्र ने किसी तरह हिम्मत जुटाई और पास ही मौजूद तालाब में छलांग लगा दी। यही कदम उसकी जान बचा सका। हालांकि तब तक उसका शरीर बुरी तरह झुलस चुका था। स्थानीय लोगों की मदद से उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को नाजुक बताया। युवक अब भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
हिंदू समुदाय में दहशत, परिवारों की रातें जागते हुए गुजर रही हैं
इस घटना के बाद पूरे शरीयतपुर जिले में हिंदू समुदाय के बीच डर का माहौल है। लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। कई परिवारों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। दुकानों पर सन्नाटा पसरा है और हर चेहरे पर एक ही सवाल है—अगला नंबर किसका?
लगातार बढ़ रही हिंसा, हिंदुओं को चुन-चुनकर बनाया जा रहा निशाना
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हिंसा अब इतनी खौफनाक और बेरहम हो चुकी है कि मानवता भी हैरान रह जाए। 31 दिसंबर की रात शरियतपुर जिले में खोकन चंद्र दास नामक हिंदू व्यापारी पर भीड़ ने पहले चाकू से हमला किया और उसके शरीर पर पेट्रोल डालकर उसे जिंदा जलाने की कोशिश की, जिससे उसकी जान जोखिम में पड़ गई। इससे पहले 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के झूठे आरोप में भीड़ ने बेरहमी से पीटा, उसे पेड़ से बांधकर आग लगाने की कोशिश की और उसकी हत्या कर दी गई। 25 दिसंबर को अमृत मंडल नामक एक अन्य हिंदू युवक को भीड़ ने घेरकर बेरहमी से पीटा और गंभीर रूप से घायल किया। इसके बाद 29 दिसंबर को मेहराबारी इलाके में एक और हिंदू नागरिक को गोली मार दी गई, जिससे उसकी हालत गंभीर है। इस पूरी श्रृंखला ने बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में भय और आतंक का माहौल पैदा कर दिया है और यह दिखा दिया कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा अब किसी नियंत्रण में नहीं है।
भीड़ का कानून और प्रशासन पर उठते गंभीर सवाल
सबसे चिंताजनक बात यह है कि हमलावरों को कानून का कोई डर नहीं दिख रहा। खुलेआम भीड़ इकट्ठा होती है, किसी को जिंदा जलाने की कोशिश होती है और इसके बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जा रही हैं। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता, मानवाधिकारों पर सीधा हमला
खोकन चंद्र पर हुए इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान खींचा है। मानवाधिकार संगठनों के लिए यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। धार्मिक स्वतंत्रता, जीवन का अधिकार और सुरक्षा—तीनों पर सवाल खड़े हो चुके हैं।
फिर हिन्दू ही बना निशाना, सवालों के घेरे में बांग्लादेश
नए साल के जश्न से ठीक पहले हुआ यह हमला यह बताता है कि नफरत अब त्योहार, तारीख या इंसानियत कुछ भी नहीं देख रही। सवाल यह नहीं है कि खोकन चंद्र बच गया या नहीं, सवाल यह है कि क्या किसी देश में सिर्फ धर्म के आधार पर किसी इंसान को जिंदा जलाने की कोशिश की जा सकती है?
हिंदू समाज की पीड़ा, पूरी दुनिया से सवाल
आज बांग्लादेश का हिंदू समाज डर, अपमान और असुरक्षा के साये में जी रहा है। हर घटना के साथ यह डर और गहरा होता जा रहा है कि कहीं अगली खबर किसी और खोकन चंद्र की न हो। यह सिर्फ एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए चेतावनी है।
कड़ा सवाल
अगर आज भी इस नफरत को नहीं रोका गया, तो कल यह आग और ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में लेगी। सवाल यह है—क्या दुनिया सिर्फ तमाशा देखती रहेगी, या इंसानियत के पक्ष में खड़ी होगी?