Politics: 2002 के गोधरा दंगों का ग्राउंड जीरो माने जाने वाले बेहद संवेदनशील इलाके में एक अनोखा चुनावी नतीजा सामने आया है। मुस्लिम बहुल वार्ड-7 से निर्दलीय उम्मीदवार अक्षेपा सोनी ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया। यह जीत सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और भरोसे की बड़ी मिसाल बनकर उभरी है।
मुस्लिम बहुल वार्ड-7 से जीत, जहां हिंदू वोट बेहद कम
यह वार्ड Godhra के उन इलाकों में शामिल है, जो 2002 की घटनाओं के चलते काफी संवेदनशील माने जाते हैं।
वार्ड-7 में सतपुल, हयातनी वाड़ी, वचला ओढ़ा, चुचला प्लॉट और जेनी प्लॉट जैसे मुस्लिम बहुल इलाके आते हैं। यहां हिंदू मतदाताओं की संख्या बेहद कम—करीब दो दर्जन बताई जाती है।
इसके बावजूद अक्षेपा सोनी की जीत ने सामाजिक एकता का मजबूत संदेश दिया है।
गोधरा कांड से जुड़ा इलाका, इतिहास रहा है संवेदनशील
यह वार्ड गोधरा रेलवे स्टेशन और सिग्नल फालिया से करीब 1 किलोमीटर दूर है—वही इलाके जो Godhra train burning incident से जुड़े रहे हैं।
ऐसे इतिहास वाले क्षेत्र में यह चुनावी परिणाम खास महत्व रखता है।
2021 में हार के बाद भी नहीं छोड़ा मैदान
अक्षेपा सोनी ने 2021 के चुनाव में करीब 100 वोटों से हार का सामना किया था। इसके बाद उन्होंने दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला किया था।
लेकिन स्थानीय लोगों—खासकर मुस्लिम समुदाय—ने उन्हें फिर से मैदान में उतरने के लिए मनाया और पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया।
जमीन से जुड़ी नेता, खुद खर्च कर करती रहीं काम
अक्षेपा अपने पति नैनेश सोनी के साथ इलाके में ज्वेलरी की दुकान चलाती हैं।
उन्होंने वर्षों तक स्थानीय समस्याओं—जैसे साफ-सफाई और छोटी जरूरतों—को उठाया और कई बार खुद के पैसे खर्च कर समाधान भी कराया।
2021 में हार के बाद भी उन्होंने सेवा का काम जारी रखा, जिससे लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ।
परिसीमन के बाद भी लोगों के कहने पर लड़ा चुनाव
वार्ड परिसीमन के बाद अक्षेपा ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया था, लेकिन स्थानीय निवासियों और समुदाय के नेताओं के आग्रह पर उन्होंने दोबारा चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया।
उनका यह फैसला अंततः ऐतिहासिक जीत में बदल गया।
जीत पर बोलीं- “लोगों ने बेटी-बहन की तरह अपनाया”
अपनी जीत पर अक्षेपा सोनी ने कहा कि यह जीत सामाजिक एकता का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि इलाके के लोगों ने उन्हें बेटी और बहन की तरह अपनाया और पूरा विश्वास जताया।
स्थानीय नेताओं ने भी सराहा, सेवा को बताया जीत की वजह
स्थानीय पार्षद साजिद काला ने उनकी जीत का श्रेय उनके लगातार जनसेवा कार्यों को दिया।
वहीं जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष रफीक तिजोरावाला ने कहा कि यह जीत दिखाती है कि जब उम्मीदवार सेवा भाव से काम करता है, तो समाज और धर्म से ऊपर उठकर लोग उसे समर्थन देते हैं।