मिर्जापुर में खाकी पर हमला करने वालों की निकली अकड़, गिरफ्तारी के बाद हाथ जोड़कर बोले- “साहब, गलती हो गई”
मिर्जापुर में जो कल तक पुलिस चौकी में घुसकर खाकी पर हाथ उठा रहे थे, आज वही कानून के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगते नजर आए। जिस भीड़ ने चौकी इंचार्ज की वर्दी फाड़ी, सिपाही का सिर फोड़ा और पुलिस को खुली चुनौती दी, वही आरोपी अब कैमरे के सामने गिड़गिड़ाते हुए कह रहे हैं—”हमसे गलती हो गई, दोबारा ऐसा कभी नहीं होगा, हमें माफ कर दीजिए।”
कानून का डंडा जब चलता है, तो सबसे पहले गुंडागर्दी का नशा उतरता है। मिर्जापुर में भी कुछ ऐसा ही हुआ। खाकी को कमजोर समझने वालों को जब योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का एहसास हुआ, तो उनके तेवर मिनटों में ढीले पड़ गए।
मामूली विवाद से शुरू हुआ बवाल
घटना शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित मंडलीय अस्पताल पुलिस चौकी की है। देर रात ई-रिक्शा की टक्कर को लेकर दो पक्षों में कहासुनी हुई। बात इतनी बढ़ी कि एक पक्ष ने ई-रिक्शा चालक की पिटाई कर दी। मामला शांत कराने के लिए पुलिस दोनों पक्षों को चौकी लेकर पहुंची।
लेकिन यहां हालात संभलने के बजाय और बिगड़ गए। चौकी के अंदर ही एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर हमला बोल दिया। देखते ही देखते समर्थकों की भीड़ चौकी पर पहुंच गई और पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
चौकी के भीतर मची अफरा-तफरी
हंगामा इतना बढ़ा कि भीड़ ने कानून की सारी सीमाएं लांघ दीं। चौकी में घुसकर चौकी इंचार्ज मनोज राय से हाथापाई की गई। उनकी वर्दी तक फाड़ दी गई। हेड कांस्टेबल कमलेश पासवान को बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई।
जिस चौकी को जनता की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, वहीं उपद्रवियों ने अराजकता का अड्डा बनाने की कोशिश की। लेकिन शायद वे भूल गए थे कि यह उत्तर प्रदेश है, और यहां खाकी पर हाथ उठाने की कीमत बहुत भारी पड़ती है।
पुलिस ने दिखाई सख्ती, दर्ज हुआ मुकदमा
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार नामजद और 10 से 13 अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। आसपास के थानों से फोर्स मौके पर पहुंची और कई आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
प्रारंभिक कार्रवाई में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बाकी की तलाश के लिए दबिश लगातार जारी है।
गिरफ्तारी के बाद उतर गया गुंडागर्दी का भूत
कल तक जो पुलिस वालों पर हाथ साफ कर रहे थे, आज वही हाथ जोड़कर माफी मांग रहे हैं। वायरल वीडियो में आरोपी folded hands के साथ कहते दिखाई दे रहे हैं—
“जो हमसे गलती हुई है, दोबारा ऐसा कभी नहीं होगा। हमें क्षमा कर दीजिए।”
अरे भई, कल तक चौकी में शेर बने घूम रहे थे, आज थाने की कुर्सी देखते ही बकरी क्यों बन गए? यही तो कानून की असली ताकत है।
जिस अकड़ में खाकी की वर्दी फाड़ी गई थी, वही अकड़ अब सलाखों के साये में धूल चाटती नजर आ रही है।
योगी राज में गुंडागर्दी का एक ही इलाज
उत्तर प्रदेश में अपराधियों के लिए साफ संदेश है—कानून से बड़ा कोई नहीं। चाहे सड़क हो, चौकी हो या सत्ता का गलियारा, खाकी पर हमला करने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति का असर साफ दिख रहा है। पुलिस पर हमला करने वालों की हेकड़ी घंटों में निकल गई।
कल तक जो कह रहे थे “देख लेंगे”, आज कह रहे हैं “माफ कर दीजिए।”
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ माफी का वीडियो
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों का माफी मांगते वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे देखकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
कई यूजर्स लिख रहे हैं—
- “खाकी पर हाथ उठाने का यही अंजाम होता है।”
- “गुंडई का नशा पुलिसिया कार्रवाई से ही उतरता है।”
- “यूपी में कानून का राज है, जंगलराज नहीं।”
पुलिस की कार्रवाई जारी
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। वीडियो, सीसीटीवी और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर बाकी आरोपियों की पहचान की जा रही है।
खाकी पर हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था को चुनौती है। और ऐसी चुनौती का जवाब उत्तर प्रदेश पुलिस अपने अंदाज में देना जानती है।
जनता के लिए संदेश
यह घटना उन सभी के लिए सबक है जो कानून को हाथ में लेने की भूल करते हैं। पुलिस से बहस की जा सकती है, शिकायत की जा सकती है, लेकिन खाकी पर हाथ उठाने का परिणाम हमेशा भारी पड़ता है।
मिर्जापुर ने एक बार फिर साबित कर दिया—योगी राज में अपराध की उम्र बहुत छोटी होती है, और पश्चाताप की शुरुआत अक्सर हथकड़ी लगने के बाद होती है।
कल चौकी में दबंगई, आज कैमरे के सामने दीनता। यही कानून का असर है। खाकी को चुनौती देने वालों को मिर्जापुर पुलिस ने बता दिया कि उत्तर प्रदेश में कानून सिर्फ किताबों में नहीं, जमीन पर भी चलता है।
और हां, अगली बार हाथ उठाने से पहले इतना जरूर सोच लीजिएगा—कहीं बाद में वही हाथ माफी मांगने के लिए न जोड़ने पड़ जाएं।