वैश्विक संकट के दौर में ‘देशहित’ का संदेश, पीलीभीत में सर्राफा कारोबारियों से डीएम की अहम अपील
दुनिया इस समय आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध जैसे हालात और बढ़ते वैश्विक तनाव के दौर से गुजर रही है। कच्चे तेल से लेकर सोने तक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत सरकार अब आर्थिक संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने के लिए कई स्तरों पर सक्रिय दिखाई दे रही है।
इसी कड़ी में प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा देशवासियों से बुलियन और गोल्ड बार जैसी ठोस सोने की खरीद से बचने की अपील के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी प्रशासनिक स्तर पर कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर प्रदेशभर में जिलाधिकारियों को सर्राफा व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित करने और उन्हें सरकार की मंशा समझाने को कहा गया है।
इसी क्रम में Pilibhit में सोमवार को गांधी सभागार में जिला प्रशासन और सर्राफा व्यापारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी Gyanendra Singh ने की।
“सोना केवल आभूषण नहीं, अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा विषय”
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान समय केवल व्यापारिक लाभ-हानि का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा का समय है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सबसे अधिक सोना खरीदने वाले देशों में शामिल है। बड़ी मात्रा में सोने का आयात होने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में यदि आम लोग और व्यापारी आवश्यकता से अधिक बुलियन और गोल्ड बार की खरीद से बचते हैं, तो इसका सीधा लाभ देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार किसी के व्यापार को रोकना नहीं चाहती, बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप जिम्मेदार आर्थिक व्यवहार की अपेक्षा कर रही है। उन्होंने व्यापारियों से आग्रह किया कि वे लोगों को पुराने आभूषणों को रिसायकिल और रिडिजाइन कर नए रूप में उपयोग करने के लिए प्रेरित करें।
उनका कहना था कि यह केवल आर्थिक कदम नहीं बल्कि राष्ट्रहित में सामूहिक भागीदारी का विषय है।
अंतरराष्ट्रीय हालातों का असर भारत पर भी
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका- ईरान युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं का असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
जब सोने का आयात बढ़ता है तो विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा बाहर जाता है। इससे देश के मुद्रा भंडार पर असर पड़ता है और आर्थिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
इसीलिए केंद्र और राज्य सरकारें अब जनता और व्यापारियों से सहयोग की अपेक्षा कर रही हैं ताकि देश आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में बना रहे।
प्रशासन और व्यापारियों के बीच सकारात्मक संवाद
बैठक में पुलिस अधीक्षक Sukirti Madhav, नगर मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर, सीओ सिटी दीपक चतुर्वेदी, राज्य कर विभाग के उपायुक्त संजीव कुमार और सहायक आयुक्त राजेंद्र प्रसाद चौहान भी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने व्यापारियों को सरकार की रणनीति और उसके पीछे की आर्थिक जरूरतों को विस्तार से समझाया।
बैठक में मौजूद सर्राफा व्यापारी संगठन के अध्यक्ष Ravindra Kumar Agrawal, महामंत्री शैली अग्रवाल और मुरली मनोहर अग्रवाल एडवोकेट समेत अन्य व्यापारियों ने प्रशासन को सहयोग का भरोसा दिलाया।
व्यापारियों ने कहा कि देशहित सर्वोपरि है और यदि सरकार आर्थिक मजबूती के लिए कोई पहल कर रही है तो सर्राफा व्यापारी भी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।
सिर्फ सरकार नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी
बैठक के दौरान यह बात भी प्रमुखता से सामने आई कि वर्तमान समय में आर्थिक आत्मनिर्भरता केवल सरकारी नीतियों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज, व्यापारियों और आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग जरूरत के अनुसार ही सोना खरीदें और पुराने आभूषणों का दोबारा उपयोग बढ़ाएं, तो इससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।
पीलीभीत से गया ‘देशहित’ का संदेश
गांधी सभागार में हुई यह बैठक अब जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे केवल प्रशासनिक बैठक नहीं बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक हितों से जुड़ा संदेश मान रहे हैं।
जिस तरह प्रशासन ने व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित कर सहयोग की अपील की, उसे सरकार की दूरदर्शी आर्थिक सोच के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक संकट के दौर में यदि सरकार, व्यापारी और आम जनता एकजुट होकर जिम्मेदारी निभाएं, तो भारत आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत होकर उभर सकता है।
I am a sub Editor who have 22 years experience.