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Shocking News: प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान PGI में मरीज का गला कटने से मौत, हत्या या आत्महत्या?

Shocking News: प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान PGI में मरीज का गला कटने से मौत, हत्या या आत्महत्या?

Shocking News: उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow के SGPGI में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हाई-टेक लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट (LTU) में भर्ती 61 वर्षीय मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शव गले पर कट के निशानों और खून से लथपथ हालत में मिला, जिससे पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया।

क्या है पूरा मामला?

मरीज मुस्ताक तीसरी मंजिल के वॉर्ड में भर्ती था। सोमवार सुबह उसका शव बेड पर खून से लथपथ मिला। पास में खून से सना एक ब्लेड भी बरामद हुआ। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और फॉरेंसिक टीम के साथ जांच शुरू कर दी है।

ब्लेड कैसे पहुंचा मरीज तक?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाई-सिक्योरिटी माने जाने वाले LTU वॉर्ड में मरीज के पास ब्लेड जैसी धारदार चीज पहुंची कैसे?
क्या किसी ने उसे दिया या वह खुद लेकर आया?
अगर यह आत्महत्या है तो सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?

आत्महत्या या हत्या? जांच में उलझे सवाल

पुलिस शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या मान रही है, लेकिन हत्या की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही।
अगर यह आत्महत्या है तो एक गंभीर मरीज खुद को इतना नुकसान कैसे पहुंचा सकता है?
और अगर हत्या है तो वार्ड के अंदर कोई बाहरी व्यक्ति कैसे पहुंचा?

CCTV न होने पर उठे सवाल

SGPGI जैसे बड़े संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस LTU बिल्डिंग में यह घटना हुई, वहां पर्याप्त CCTV कैमरे नहीं होने की बात सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, घटना वाले फ्लोर पर कैमरे नहीं थे, जिससे जांच और मुश्किल हो गई है।

घटना के समय किसी को भनक क्यों नहीं लगी?

LTU जैसे संवेदनशील वॉर्ड में 24 घंटे डॉक्टर, नर्स और सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी घटना हो जाना और किसी को पता न चलना कई सवाल खड़े करता है।
क्या उस समय निगरानी में कमी थी? या फिर कोई बिना देखे अंदर आया और चला गया?

जब मरीज ठीक हो रहा था, तो ऐसा कदम क्यों?

परिवार का कहना है कि मरीज की हालत में सुधार हो रहा था और जल्द ही डिस्चार्ज होने वाला था। ऐसे में आत्महत्या की बात परिजन मानने को तैयार नहीं हैं।
मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि गंभीर मरीजों में मानसिक तनाव हो सकता है, लेकिन अस्पताल की जिम्मेदारी होती है कि उनकी लगातार निगरानी की जाए।

डॉक्टर का क्या कहना है?

अस्पताल के CMS डॉ. देवेंद्र गुप्ता के अनुसार, मरीज गॉल ब्लैडर कैंसर से पीड़ित था और पहले उसकी सर्जरी हो चुकी थी। बाद में हार्ट प्रॉब्लम के चलते उसे दोबारा भर्ती किया गया था।
सुबह बेड के पास खून दिखने पर डॉक्टर पहुंचे, लेकिन CPR देने के बाद भी मरीज को बचाया नहीं जा सका। गले पर ब्लेड से कट का निशान पाया गया।

परिवार और अन्य एंगल की जांच

पुलिस मरीज के परिवार और मिलने-जुलने वालों से भी पूछताछ कर रही है। हर एंगल से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मरीज तक ब्लेड कैसे पहुंचा।