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NEET 2026 Paper Leak: CBI ने किया बड़े सिंडिकेट का खुलासा, ₹10 में खरीदा और 15 लाख में बेचा, कई चौंकाने वाले नाम शामिल!

NEET 2026 Paper Leak: CBI ने किया बड़े सिंडिकेट का खुलासा, ₹10 में खरीदा और 15 लाख में बेचा, कई चौंकाने वाले नाम शामिल!

NEET 2026 Paper Leak: NEET 2026 पेपर लीक मामले में CBI की जांच ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। जांच में एक ऐसा संगठित सिंडिकेट सामने आया है जो महाराष्ट्र से लेकर हरियाणा और राजस्थान तक फैला हुआ था। इस नेटवर्क में कई आरोपी शामिल बताए जा रहे हैं और पेपर को ₹10 लाख से ₹15 लाख तक में बेचे जाने का खुलासा हुआ है। यह मामला अब एक बड़े एजुकेशन स्कैम के रूप में देखा जा रहा है।

CBI जांच में बड़ा सिंडिकेट सामने आया

CBI की रिपोर्ट और जांच दस्तावेजों के मुताबिक इस पूरे रैकेट में कुल सात मुख्य आरोपी शामिल हैं। इनमें मनीषा मंढारे, पीवी कुलकर्णी, मनीषा वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम खैरनार, मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल के नाम सामने आए हैं। यह पूरा नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ था और परीक्षा पेपर को अवैध तरीके से आगे बेचने का काम कर रहा था।

पेपर लीक की शुरुआत कैसे हुई?

जांच में सामने आया है कि NEET-UG 2026 के प्रश्नपत्रों तक पहुंच एक एक्सपर्ट पैनल के जरिए हुई। आरोप है कि पुणे की बॉटनी प्रोफेसर मनीषा गुरनाथ मंढारे को NTA ने पेपर ट्रांसलेशन पैनल में शामिल किया था। इसी दौरान उन्हें फाइनल पेपर का एक्सेस मिल गया और यहीं से पेपर लीक की शुरुआत मानी जा रही है।

रिटायर्ड टीचर से फैला नेटवर्क

इसके बाद इस मामले में पीवी कुलकर्णी का नाम सामने आया, जो एक रिटायर्ड केमिस्ट्री टीचर बताए जा रहे हैं। आरोपों के मुताबिक उन्होंने पुणे में कुछ छात्रों को बुलाकर केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्न और उत्तर लिखवाकर रटवाए। इसके बाद यह नेटवर्क और तेजी से फैल गया।

ब्यूटी पार्लर से जुड़ा एजेंट नेटवर्क

मनीषा संजय वाघमारे, जो पुणे में ब्यूटी पार्लर चलाती हैं, इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी बताई जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपने कस्टमर बेस और सोशल सर्कल का इस्तेमाल कर ऐसे अभिभावकों को ढूंढा जो ₹10 लाख प्रति छात्र देने को तैयार थे। इसी के जरिए कई छात्रों को इस नेटवर्क से जोड़ा गया।

कैसे बना मनी-ट्रेल नेटवर्क?

CBI की जांच में सामने आया है कि यह पेपर सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए आगे बढ़ता गया। पुणे से पेपर नासिक पहुंचा और वहां से हरियाणा और राजस्थान तक इसका नेटवर्क फैल गया।

नासिक और हरियाणा कनेक्शन

नासिक में शुभम खैरनार ने कथित तौर पर यह पेपर ₹10 लाख में खरीदा और आगे बेचने का काम किया। इसके बाद यह पेपर गुरुग्राम (हरियाणा) में यश यादव तक पहुंचा, जहां इसे ₹15 लाख में बेचा गया और भारी मुनाफा कमाया गया।

राजस्थान तक पहुंचा पूरा मामला

इसके बाद यह पेपर राजस्थान के जालौर तक पहुंचा, जहां मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल नाम के दो भाइयों ने इसे खरीदा। आरोप है कि दिनेश बिवाल ने अपने बेटे के लिए यह पेपर भारी रकम देकर खरीदा था।

सीकर से हुआ बड़ा खुलासा

इस पूरे रैकेट का खुलासा राजस्थान के सीकर में हुआ, जब एक हॉस्टल मालिक के बेटे के पास यह पेपर पहुंचा। हॉस्टल मालिक की शिकायत के बाद पुलिस और जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और मामला CBI तक पहुंच गया।

CBI की बड़ी कार्रवाई

CBI ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मनीषा मंढारे को 17 मई को गिरफ्तार किया। बाद में उन्हें दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 14 दिन की CBI कस्टडी में भेज दिया। अब जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क की डिजिटल और फाइनेंशियल ट्रेल खंगाल रही है।

सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां लाखों छात्र कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा देते हैं, वहीं कुछ लोग सिस्टम के अंदर से ही पेपर लीक कर रहे हैं। इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है।