हरिद्वार में राष्ट्रीय पशुओं का कत्ल! जहरीला मांस खिलाकर दो बाघों को मार डाला, जंगल में कटे पैर वाले शव मिलने से सनसनी
राजाजी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बाघों के शिकार से मचा हड़कंप, मां की तलाश में जंगल छान रही टीमें
Haridwar के श्यामपुर रेंज स्थित सजनपुर बीट के जंगलों में जो तस्वीर सामने आई, उसने वन विभाग से लेकर वन्यजीव प्रेमियों तक सभी को झकझोर कर रख दिया। राष्ट्रीय पशु बाघ के दो मासूम बच्चों का बेरहमी से शिकार कर लिया गया। दोनों शव जंगल में अलग-अलग स्थानों पर पड़े मिले। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि दोनों बाघों के पैर काट दिए गए थे और शवों को छिपाने की कोशिश भी की गई थी।
घटना सामने आते ही हरिद्वार से लेकर देहरादून और दिल्ली तक वन विभाग में हड़कंप मच गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि वन गुर्जरों ने बदला लेने के लिए जहरीला मांस खिलाकर दोनों बाघों को मौत के घाट उतार दिया। फिलहाल एक आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि तीन अन्य की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
पहले मिला नर बाघ का शव, फिर डेढ़ किलोमीटर दूर मिली उसकी बहन
वन विभाग की टीम को 18 मई की शाम श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट क्षेत्र में सर्चिंग के दौरान करीब दो साल के नर बाघ का शव मिला। बाघ के चारों पैर काटे जा चुके थे। हालांकि उसकी खाल और दांत सुरक्षित पाए गए। शव के पास ही एक मृत भैंस भी बरामद हुई।
वन अधिकारियों को शुरू से ही शक था कि मामला साधारण मौत का नहीं बल्कि सुनियोजित शिकार का है। इसी बीच 19 मई को उसी इलाके से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक गदेरे में पत्तों से ढका दूसरा शव मिला। यह शव मादा बाघिन का था, जिसकी उम्र भी लगभग दो वर्ष बताई जा रही है। उसके भी पैर काट दिए गए थे।
वन विभाग के अनुसार दोनों बाघ भाई-बहन थे और संभवतः अपनी मां के साथ उसी जंगल क्षेत्र में रह रहे थे।
बदला लेने के लिए रची गई मौत की साजिश
जांच में सामने आया कि कुछ दिन पहले एक बाघिन ने वन गुर्जरों की भैंस का शिकार कर लिया था। इसके बाद भैंस के शव को वहीं छोड़ दिया गया, लेकिन आरोपियों ने उसमें जहरीला पदार्थ मिला दिया। जैसे ही बाघों ने उस मांस को खाया, उनकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपियों ने शवों के पैर काट दिए। आशंका जताई जा रही है कि इन अंगों को अवैध वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क में बेचने की तैयारी थी। सूत्रों के मुताबिक आरोपी रात के अंधेरे में खाल और दांत निकालने की योजना बना रहे थे, लेकिन उससे पहले वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिल गई।
जंगल में छिपाया गया था बाघिन का शव
वन विभाग की टीम जब इलाके में लगातार सर्चिंग कर रही थी, तभी एक गदेरे में पत्तों के नीचे छिपा बाघिन का शव मिला। इससे साफ हो गया कि आरोपी शव को ठिकाने लगाने की तैयारी में थे। जंगल में शवों को छिपाने की कोशिश ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
वन अधिकारियों का मानना है कि अगर समय रहते सूचना नहीं मिलती तो आरोपी शवों के महत्वपूर्ण अंग निकालकर उन्हें अवैध बाजार तक पहुंचा सकते थे।
मां की तलाश में जंगल खंगाल रही टीमें
वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन को आशंका है कि मृत दोनों बाघ अपनी मां के साथ रह रहे थे। आमतौर पर बाघ के बच्चे दो से तीन साल तक मां के साथ ही जंगल में रहते हैं और उसी से शिकार करना सीखते हैं।
ऐसे में डर इस बात का भी है कि कहीं मां ने भी वही जहरीला मांस न खा लिया हो। इसी आशंका के चलते जंगल में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। ड्रोन, ट्रैकिंग टीम और वनकर्मी लगातार इलाके की निगरानी कर रहे हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बड़ी लापरवाही?
जिस इलाके में यह वारदात हुई, वह राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग की सीमा के बीच स्थित संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहां बाघ और हाथियों की नियमित आवाजाही रहती है। बावजूद इसके, एक साथ दो बाघों का शिकार हो जाना वन विभाग की गश्त और निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वन गुर्जरों के डेरे धीरे-धीरे रिजर्व क्षेत्र के बेहद करीब तक पहुंच चुके हैं। उनकी भैंसों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। आरोप है कि कई बार वनकर्मियों की लापरवाही के चलते ये लोग रिजर्व फॉरेस्ट तक में घुस जाते हैं।
एक आरोपी गिरफ्तार, तीन अब भी फरार
वन विभाग ने इस मामले में आलम उर्फ फम्मी पुत्र शमशेर नामक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी श्यामपुर क्षेत्र के गुर्जर डेरे का रहने वाला बताया जा रहा है। उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
वहीं आमिर हमजा उर्फ मियां, आशिक और जुप्पी नाम के तीन आरोपी अब भी फरार हैं। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
वन्यजीव प्रेमियों में भारी आक्रोश
राष्ट्रीय पशु बाघ की इस तरह बेरहमी से हत्या के बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण से जुड़े लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अगर संवेदनशील इलाकों में समय रहते निगरानी मजबूत की जाती तो शायद दो बाघों की जान बचाई जा सकती थी।
फिलहाल जंगल में पसरा सन्नाटा, कटे पैरों वाले बाघों के शव और मां की तलाश में भटकती वन विभाग की टीमें एक बेहद दर्दनाक कहानी बयां कर रही हैं।