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Hindi News: गंगा में 9 श्रद्धालु डूबे, 1 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, डीएम-एसएसपी सहित बड़े अधिकारी मौके पर..

बदायूं के कछला गंगा घाट पर नौ श्रद्धालु डूबे, एक की मौत, दो लापता। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, डीएम-एसएसपी समेत अधिकारी मौके पर मौजूद।

बदायूं में बड़ा हादसा: गंगा स्नान के दौरान नौ श्रद्धालु डूबे, एक की मौत, दो अब भी लापता

ज्येष्ठ दशहरा के पावन स्नान पर्व पर बदायूं जिले के कछला स्थित भागीरथ घाट पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब गंगा स्नान कर रहे श्रद्धालुओं का एक समूह अचानक गहरे पानी में चला गया। देखते ही देखते नौ लोग डूबने लगे और घाट पर चीख-पुकार मच गई। हादसे के बाद प्रशासनिक मशीनरी में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही डीएम और एसएसपी समेत तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस दर्दनाक हादसे में एक श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि दो लोगों की तलाश देर शाम तक जारी रही।

घटना ने प्रशासन के सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी। जिस ज्येष्ठ दशहरा स्नान को लेकर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना थी, वहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर दिखाई दी। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने प्रशासनिक लापरवाही को हादसे की बड़ी वजह बताया है।

हाथरस से स्नान करने पहुंचे थे श्रद्धालु

जानकारी के मुताबिक हाथरस जिले के हसायन थाना क्षेत्र के गांव कानू से श्रद्धालुओं का एक समूह गंगा स्नान के लिए बदायूं के कछला भागीरथ घाट पहुंचा था। सुबह के समय सभी लोग गंगा में स्नान कर रहे थे। इसी दौरान अचानक कुछ श्रद्धालु गहरे पानी की तरफ चले गए और संतुलन बिगड़ने से डूबने लगे।

बताया जा रहा है कि पानी का बहाव सामान्य से अधिक था और घाट के कई हिस्सों में गहराई का सही अंदाजा नहीं लग पा रहा था। देखते ही देखते नौ लोग डूबने लगे, जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों में भगदड़ जैसे हालात बन गए।

चीख-पुकार सुन दौड़े गोताखोर

श्रद्धालुओं के डूबने की खबर मिलते ही घाट पर मौजूद गोताखोर और स्थानीय लोग तुरंत नदी में कूद पड़े। काफी मशक्कत के बाद कई लोगों को बाहर निकाल लिया गया। हालांकि एक श्रद्धालु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग देर शाम तक लापता बताए गए। गोताखोर लगातार गंगा में सर्च ऑपरेशन चलाते रहे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अगर समय रहते गोताखोर मौके पर नहीं पहुंचते तो मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती थी। कई लोगों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

हादसे के बाद दौड़े डीएम और एसएसपी

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीएम और एसएसपी भारी पुलिस बल के साथ तुरंत कछला घाट पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर राहत और बचाव कार्य का जायजा लिया। एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की मदद से लापता श्रद्धालुओं की तलाश शुरू कराई गई।

अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों और उनके परिजनों से भी मुलाकात की। प्रशासन की ओर से मृतक के परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया।

सुरक्षा इंतजामों की खुली पोल

ज्येष्ठ दशहरा स्नान को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बड़े दावे किए थे, लेकिन हादसे ने उन सभी दावों की हकीकत सामने ला दी। घाट पर पर्याप्त बैरिकेडिंग नहीं थी, न ही गहरे पानी वाले हिस्सों को ठीक से चिन्हित किया गया था।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी भीड़ के बावजूद पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था और न ही लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्नान कराने की प्रभावी व्यवस्था की गई थी।

रूट डायवर्ट न होने से बढ़ी अव्यवस्था

हादसे के दौरान घाट क्षेत्र में भारी भीड़ और वाहनों का दबाव भी देखने को मिला। आरोप है कि पुलिस की ओर से ट्रैफिक रूट डायवर्ट नहीं किया गया, जिसके चलते घाट तक पहुंचने वाले रास्तों पर अव्यवस्था फैल गई। इससे राहत और बचाव कार्य में भी दिक्कतें आईं।

स्थानीय लोगों ने कहा कि हर साल ज्येष्ठ दशहरा स्नान पर लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इस बार प्रशासन की तैयारी बेहद कमजोर दिखाई दी। यदि पहले से बेहतर इंतजाम किए जाते तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।

लापता लोगों की तलाश जारी

देर शाम तक गोताखोरों और प्रशासनिक टीमों द्वारा गंगा में सर्च ऑपरेशन चलाया जाता रहा। लापता श्रद्धालुओं की तलाश के लिए मोटरबोट और स्थानीय गोताखोरों की मदद ली गई। प्रशासन ने आसपास के घाटों पर भी सतर्कता बढ़ा दी है।

घटना के बाद घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं में भय और दहशत का माहौल दिखाई दिया। कई परिवार अपने परिजनों की तलाश में घाट और अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे।

बड़े स्नान पर्व पर लापरवाही बनी हादसे की वजह

ज्येष्ठ दशहरा के अवसर पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लेकिन इस बार सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही साफ तौर पर दिखाई दी। घाट पर पर्याप्त निगरानी, चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और बचाव संसाधनों की कमी हादसे का बड़ा कारण बन गई।

अब प्रशासन पूरे मामले की जांच कराने की बात कह रहा है, लेकिन हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इतने बड़े स्नान पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर तैयारी क्यों नहीं की गई।