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Bakrid 2026: यूपी में एक मुस्लिम परिवार ने कुछ यूँ मनाई ईद! बकरे के फोटो वाला केक काटा और जो कहा, वो हुआ वायरल..

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Bakrid 2026: आगरा में बकरीद के मौके पर एक मुस्लिम परिवार ने ऐसी पहल की, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जहां आमतौर पर इस त्योहार पर बकरों की कुर्बानी दी जाती है, वहीं इस परिवार ने बकरे की तस्वीर वाला केक काटकर एक अलग और भावनात्मक संदेश दिया। अब इस अनोखी पहल के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

बकरीद पर बदली परंपरा, केक काटकर मनाया त्योहार

बकरीद आते ही बाजारों में बकरों की खरीद-फरोख्त और कुर्बानी की चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार आगरा के एक परिवार ने परंपरा से हटकर कुछ नया किया। उन्होंने बकरे की कुर्बानी देने के बजाय बकरे की आकृति वाला केक काटकर त्योहार मनाया, जिसे लोग ‘बकरीद का सबसे अलग मैसेज’ बता रहे हैं।

कहां का है पूरा मामला

यह मामला आगरा के शाहगंज इलाके के तिरंगा मंजिल, शेरवानी मार्ग का है। यहां रहने वाले एडवोकेट गुल चमन शेरवानी और उनके परिवार ने अपने घर पर एक खास कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर ‘बकरा केक’ काटा और इस पहल के पीछे का संदेश भी साझा किया।

क्या है परिवार का संदेश

एडवोकेट गुल चमन शेरवानी ने कहा कि अल्लाह को दिखावा नहीं, बल्कि इंसान की नीयत पसंद होती है। उनके अनुसार, असली कुर्बानी अपने अंदर की बुराइयों—जैसे लालच, नफरत और अहंकार—को छोड़ने में है।

उन्होंने यह भी कहा कि आजकल कई लोग कुर्बानी के नाम पर अपनी दौलत का प्रदर्शन करते हैं, जबकि सच्ची कुर्बानी नीयत और इंसानियत में होती है।

लोगों की उमड़ी भीड़, दोनों समुदायों ने की सराहना

जैसे ही इस कार्यक्रम की जानकारी आसपास के लोगों को मिली, हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग इस अनोखी पहल को देखने पहुंचे। कई लोगों ने परिवार की तारीफ करते हुए कहा कि त्योहारों का असली मकसद प्रेम, शांति और भाईचारा बढ़ाना होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

इस कार्यक्रम के वीडियो और तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग इसे बकरीद का नया और सकारात्मक संदेश बता रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि अगर त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करें, तो समाज में और ज्यादा सौहार्द बढ़ सकता है।

क्या सीख देता है यह कदम

आगरा के इस परिवार ने एक अलग तरीके से यह संदेश दिया है कि कुर्बानी सिर्फ जानवर की नहीं, बल्कि इंसान के अंदर मौजूद बुराइयों की भी होनी चाहिए। उनका यह कदम समाज में इंसानियत, प्रेम और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।