Amritsar Student Death: पंजाब के अमृतसर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 12वीं की छात्रा Amjot Kaur की मौत ने शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की फीस नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा ने मरने से पहले एक वीडियो बनाकर स्कूल प्रबंधन पर मानसिक दबाव डालने के आरोप लगाए थे।
जहरीला पदार्थ निगलने के बाद अस्पताल में मौत
जानकारी के मुताबिक, 17 साल की अमजोत कौर फीस के दबाव से परेशान थी। उसने जहरीला पदार्थ निगल लिया, जिसके बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।
इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिससे परिवार में मातम पसर गया।
मरने से पहले VIDEO में लगाए आरोप
अमजोत ने अस्पताल में एक वीडियो बनाया, जिसमें उसने कहा—
- उसे फीस को लेकर काफी मानसिक दबाव दिया गया
- 11 मई को स्कूल बुलाकर अलग कमरे में ले जाकर टॉर्चर किया गया
- उसे क्लास के व्हाट्सएप ग्रुप से भी हटा दिया गया
वीडियो में उसने अपनी हालत के लिए स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया और इंसाफ की मांग की।
अमृतसर: स्कूल फ़ीस को लेकर छात्रा ने दी जान। पंजाब के शिक्षा मंत्री ने कार्रवाई करने के दिए निर्देश
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20 हजार फीस के लिए बनाया जा रहा था दबाव
परिजनों का आरोप है कि करीब 20 हजार रुपए की फीस बकाया थी।
मृतका की मासी सरबजीत कौर के मुताबिक, स्कूल की प्रिंसिपल और क्लास टीचर बार-बार फीस जमा करने के लिए दबाव बना रही थीं, जिससे छात्रा मानसिक रूप से परेशान हो गई थी।
मां का दर्द: ‘मेरी बेटी IAS बनना चाहती थी’
अमजोत की मां ने भावुक होकर कहा—
- “मेरी बेटी के 98% मार्क्स आए थे”
- “वह IAS बनना चाहती थी”
- “स्कूल के दबाव ने उसकी जिंदगी छीन ली”
परिवार ने स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उसे बंद करने की मांग की है।
स्कूल ने आरोपों को बताया गलत
वहीं, स्कूल प्रशासन ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
स्कूल का कहना है कि—
- छात्रा 10वीं में मुश्किल से पास हुई थी
- वह पिछले 3 महीने से स्कूल नहीं आ रही थी
- फीस की याद दिलाना सामान्य प्रक्रिया है, कोई दबाव नहीं डाला गया
पुलिस जांच में जुटी
घटना के बाद पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में फीस वसूली के तरीकों और छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को लेकर बहस छेड़ दी है।
क्या फीस के लिए इस तरह का दबाव सही है? क्या स्कूलों को संवेदनशील रवैया अपनाने की जरूरत है? ये सवाल अब समाज के सामने खड़े हैं।