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पीलीभीत: डीएम कार्यालय के सामने संविदाकर्मी की मौत, आधे घंटे तक तड़पता रहा, तमाशबीन बने रहे मौके पर मौजूद कर्मचारी

पीलीभीत: डीएम कार्यालय के सामने संविदाकर्मी की मौत, आधे घंटे तक तड़पता रहा, तमाशबीन बने रहे मौके पर मौजूद कर्मचारी

पीलीभीत कलेक्ट्रेट में विद्युत कर्मचारी की मौत, मौके पर मौजूद कर्मचारी देखते रहे, करंट से घायल मदद के इंतजार में तड़पता रहा

डीएम कार्यालय के सामने हुई मौत ने खड़े किए असहज सवाल, हादसे के बाद आधे घंटे तक नहीं मिली मदद

जहां से पूरे जिले का प्रशासन चलता है, वहीं एक घायल कर्मचारी को नहीं मिल सकी तत्काल मदद

पीलीभीत। जिले के सबसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर कलेक्ट्रेट में बुधवार को हुई एक घटना ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। डीएम कार्यालय के सामने विद्युत लाइन पर काम कर रहा संविदा कर्मचारी विजय राठौर उर्फ विजयपाल करंट लगने के बाद जमीन पर गिर गया। आरोप है कि हादसे के बाद वह काफी देर तक तड़पता रहाऔर  मदद के लिए चिल्लाता रहा  लेकिन उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाला कोई नहीं मिला।

सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि हादसा कैसे हुआ। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हादसे के बाद क्या हुआ? एक व्यक्ति जिंदा था, लोगों की नजरों के सामने पड़ा था, मदद मांग रहा था, लेकिन राहत समय पर क्यों नहीं पहुंची?

कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद थे अधिकारी, कर्मचारी और वाहन, फिर भी नहीं बच सकी जान

प्रत्यक्षदर्शियों और साथी कर्मचारियों के आरोपों के मुताबिक घटना के समय कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी थी। सरकारी वाहन भी परिसर में खड़े थे। इसके बावजूद घायल कर्मचारी को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो सकी।

यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की गंभीर सवाल है। क्योंकि हादसे के बाद के हर मिनट की कीमत होती है और कई बार वही मिनट जिंदगी और मौत के बीच का अंतर तय करते हैं।

साथी कर्मचारी ने बताया – लोग देखते रहे, कोई आगे नहीं आया

मृतक के साथी कर्मचारी सुनील राजपूत का आरोप है कि हादसे के बाद काफी समय तक कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि कई लोग मौके पर मौजूद थे, लेकिन घायल पड़े कर्मचारी को अस्पताल पहुंचाने के लिए किसी ने मदद नहीं की।

उनका कहना है कि मदद मिलने में हुई देरी से उसकी मौत हो गयी । यही आरोप अब पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

जनरेटर बैक फीडिंग की आशंका बना सवाल?

विद्युत विभाग का कहना है कि जिस लाइन पर काम किया जा रहा था, उसे बंद कर दिया गया था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक तौर पर यह आशंका है कि कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित जनरेटर से बैक फीडिंग होने के कारण लाइन में दोबारा करंट आया।

यदि जांच में यह तथ्य सही साबित होता है तो यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन और समन्वय की व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।

सरकारें अपील करती हैं, लेकिन जमीन पर नहीं दिखती है संवेदनशीलता?

सड़क दुर्घटना हो, आग लगने की घटना हो या फिर किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ जाए, प्रशासन और सरकार लगातार लोगों से आगे आकर मदद करने की अपील करते हैं। लोगों को “गुड समैरिटन” बनने के लिए प्रेरित किया जाता है।

लेकिन पीलीभीत कलेक्ट्रेट की यह घटना एक असहज सवाल छोड़ गई है। जब प्रशासनिक मुख्यालय के सामने घायल व्यक्ति को समय पर मदद नहीं मिल पायी, तो आम नागरिकों से संवेदनशीलता की अपेक्षा किस आधार पर की जा सकती है?

विजयपाल की मौत के साथ उठे कई अनुत्तरित सवाल

विजयपाल अब इस दुनिया में नहीं हैं। पोस्टमार्टम होगा, जांच होगी, रिपोर्ट आएगी और तकनीकी कारण भी सामने आएंगे। लेकिन कुछ सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब आंकड़ों और फाइलों से नहीं मिलेगा।

क्या घायल कर्मचारी को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था?

क्या आपातकालीन सहायता में देरी हुई?

क्या घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई?

और सबसे बड़ा सवाल—क्या एक व्यक्ति की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि मदद उस तक समय पर नहीं पहुंच सकी?

पीलीभीत कलेक्ट्रेट में हुई यह घटना केवल एक कर्मचारी की मौत की खबर नहीं है। यह उस व्यवस्था व्यवस्था के गाल पर तमाचा  है जो संकट की घड़ी मेंकाम नहीं आयी। फिलहाल यह घटना एक दर्दनाक याद छोड़ गई है कि कभी-कभी हादसे से ज्यादा खतरनाक वह इंतजार साबित होता है, जो मदद के आने का होता है।