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Rajdhani Express Delay Case: आश्चर्यजनक! ट्रेन लेट हुई, फ्लाइट छूटी—कोर्ट ने रेलवे को दिया मुआवजा देने का आदेश..

Rajdhani Express Delay Case: आश्चर्यजनक! ट्रेन लेट हुई, फ्लाइट छूटी—कोर्ट ने रेलवे को दिया मुआवजा देने का आदेश..

Rajdhani Express Delay Case: भारतीय रेलवे में ट्रेनों का लेट होना आम बात मानी जाती है, लेकिन इस बार मामला कोर्ट तक पहुंचा और रेलवे को मुआवजा देना पड़ा। कोटा के एक कपल की फ्लाइट राजधानी एक्सप्रेस की देरी की वजह से छूट गई, जिसके बाद उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी और उपभोक्ता आयोग से जीत हासिल की।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

कोटा निवासी अनिल कुमार राणा और उनकी पत्नी अनीता राणा ने दिसंबर 2017 में केरल यात्रा की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने दिल्ली से तिरुवनंतपुरम की एयर इंडिया फ्लाइट पहले से बुक की थी, जिसमें उन्होंने करीब 33,929 रुपये खर्च किए थे।

दिल्ली पहुंचने के लिए उन्होंने Rajdhani Express का टिकट लिया था, ताकि समय पर एयरपोर्ट पहुंच सकें।

4 घंटे की देरी से बिगड़ा पूरा प्लान

राजधानी एक्सप्रेस को दोपहर 12:40 बजे हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचना था, लेकिन ट्रेन 4 घंटे से ज्यादा लेट हो गई।

इस देरी की वजह से दंपति शाम करीब 4:50 बजे दिल्ली पहुंचे और उनकी 6:05 बजे की फ्लाइट छूट गई।

फ्लाइट छूटी तो बढ़ गया खर्च

फ्लाइट छूटने के बाद कपल को दिल्ली में रुकना पड़ा और होटल खर्च उठाना पड़ा।

अगले दिन नई फ्लाइट टिकट लेनी पड़ी, जिसमें करीब 72,930 रुपये खर्च हुए। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा।

रेलवे से लेकर कोर्ट तक पहुंचा मामला

दंपति ने पहले रेलवे अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने कोटा जिला उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज कराया।

रेलवे ने देरी को तकनीकी और परिचालन कारण बताया, लेकिन आयोग ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

कोर्ट का फैसला: रेलवे को देना होगा मुआवजा

अगस्त 2023 में उपभोक्ता आयोग ने कपल के पक्ष में फैसला सुनाया।

रेलवे को कुल 69,001 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया, जिसमें शामिल हैं:

  • अतिरिक्त फ्लाइट खर्च: 39,001 रुपये
  • मानसिक तनाव: 20,000 रुपये
  • होटल खर्च: 5,000 रुपये
  • केस खर्च: 5,000 रुपये

अपील भी खारिज, फैसला बरकरार

रेलवे ने इस फैसले को राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी, लेकिन वहां भी अपील खारिज कर दी गई। इससे फैसला पूरी तरह बरकरार रहा।

क्यों चर्चा में है यह मामला?

यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि पहली बार ट्रेन लेट होने को सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक नुकसान और सेवा में कमी माना गया है।

इस फैसले ने उन यात्रियों के लिए नई उम्मीद जगाई है, जिनका समय और पैसा ट्रेन देरी की वजह से प्रभावित होता है।

दुनिया में कैसे मिलता है मुआवजा?

कई देशों में ट्रेन देरी पर मुआवजा सिस्टम लागू है।

  • यूरोपीय देशों में 60 मिनट से ज्यादा देरी पर 25% रिफंड
  • 120 मिनट से ज्यादा पर 50% रिफंड
  • सिंगापुर में ऑपरेटर पर भारी पेनल्टी सिस्टम

क्या भारत में बदल सकता है सिस्टम?

इस केस ने भारत में भी यह बहस शुरू कर दी है कि क्या यात्रियों को ट्रेन देरी पर ऑटोमैटिक मुआवजा मिलना चाहिए।

अगर ऐसा सिस्टम लागू होता है, तो यह भारतीय रेलवे में बड़ा सुधार साबित हो सकता है।