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Blind Murder: खुद की मौत के डर से तांत्रिक को काट डाला, अन्धविश्वास की एक खौफनाक घटना

Blind Murder: महोबा में अंधविश्वास के चलते युवक ने तांत्रिक की बेरहमी से हत्या कर शव कुएं में फेंका। 13 दिन बाद पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा।

खुद की मौत के डर ने बना दिया हत्यारा: 13 दिन पुराने ब्लाइंड मर्डर का खुलासा, तांत्रिक की गड़ासे से हत्या कर शव कुएं में फेंका

अंधविश्वास का ऐसा खौफनाक काण्ड, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया

उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में अंधविश्वास की जड़ें किस हद तक किसी व्यक्ति की सोच पर कब्जा कर सकती हैं, इसका भयावह उदाहरण श्रीनगर थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां 13 दिन पहले हुए एक वृद्ध तांत्रिक के ब्लाइंड मर्डर का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी ने जो कहानी पुलिस को बताई, उसने जांच अधिकारियों तक को हैरान कर दिया।

कुएं में मिला था वृद्ध तांत्रिक का शव

मामला 26 मई का है। श्रीनगर कस्बे में स्थित दुर्जन साहू के कुएं से 60 वर्षीय रामप्रसाद प्रजापति का शव बरामद हुआ था। शव मिलने की खबर से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया था। मृतक रामप्रसाद प्रजापति स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक और तांत्रिक क्रियाओं के लिए जाने जाते थे।

प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिलने के बाद स्पष्ट हो गया कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि हत्या का मामला है। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस के सामने थी ब्लाइंड मर्डर की थी चुनौती

हत्या की इस वारदात में पुलिस के पास न कोई प्रत्यक्षदर्शी था और न ही कोई स्पष्ट सुराग। मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर में तब्दील हो चुका था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक शशांक सिंह ने एसओजी, सर्विलांस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों को जांच में लगाया।

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के लोगों से पूछताछ की, तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया और मृतक के संपर्कों की पड़ताल शुरू की। लगातार कई दिनों तक चली जांच के बाद पुलिस को एक महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त हुई, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी।

बिलरही तिराहे से दबोचा गया आरोपी

मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस ने बिलरही तिराहे के पास घेराबंदी कर आरोपी लखन साहू को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से हत्या में इस्तेमाल किया गया धारदार गड़ासा (बांका) और मोबाइल फोन बरामद किया गया।

गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उससे सख्ती से पूछताछ की तो हत्या के पीछे की जो वजह सामने आई, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी।

भाई की मौत के बाद बढ़ा अंधविश्वास

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लखन साहू और मृतक रामप्रसाद प्रजापति एक ही गांव के रहने वाले थे। करीब डेढ़ वर्ष पहले आरोपी के भाई की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उसके परिवार में लगातार बीमारियां और अन्य परेशानियां बनी हुई थीं।

धीरे-धीरे आरोपी के मन में यह धारणा घर कर गई कि उसके परिवार की सभी समस्याओं के पीछे रामप्रसाद की तांत्रिक क्रियाएं जिम्मेदार हैं। वह पूरी तरह अंधविश्वास के जाल में फंस गया था।

अगर उसे नहीं मारूंगा तो मेरी मौत हो जाएगी

पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि उसे लगातार यह डर सताने लगा था कि रामप्रसाद की वजह से उसकी भी मौत हो सकती है। यह भय समय के साथ इतना बढ़ गया कि उसने हत्या का फैसला कर लिया।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने पहले बाजार से एक धारदार गड़ासा खरीदा। इसके बाद मौका पाकर उसने रामप्रसाद पर हमला कर दिया। वारदात के दौरान उसने ताबड़तोड़ प्रहार किए, जिससे वृद्ध तांत्रिक की मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या के बाद आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को कुएं में फेंक दिया, ताकि किसी को हत्या की भनक न लग सके।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला हत्या का राज

यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों के स्पष्ट निशान सामने न आते तो यह मामला संभवतः दुर्घटना या सामान्य मृत्यु मान लिया जाता। लेकिन चिकित्सकीय जांच में मिले साक्ष्यों ने पुलिस को हत्या की दिशा में जांच आगे बढ़ाने का आधार दिया।

इसी के बाद पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच शुरू की और आखिरकार आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

पुलिस टीम को मिला इनाम

इस जटिल और चुनौतीपूर्ण ब्लाइंड मर्डर केस का सफल अनावरण करने वाली पुलिस टीम को पुलिस अधीक्षक द्वारा 10 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। अधिकारियों ने इसे टीमवर्क, तकनीकी जांच और लगातार प्रयासों का परिणाम बताया है।

अंधविश्वास बना हत्या की वजह

इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि हत्या की वजह कोई पुरानी दुश्मनी, संपत्ति विवाद या आर्थिक लाभ नहीं था, बल्कि अंधविश्वास और काल्पनिक भय था। आरोपी को यह विश्वास हो गया था कि उसकी मौत निश्चित है और उससे बचने का एकमात्र तरीका तांत्रिक की हत्या करना है।

यह घटना एक बार फिर समाज के सामने यह सवाल खड़ा करती है कि वैज्ञानिक सोच और जागरूकता के अभाव में अंधविश्वास किस तरह लोगों को अपराध की राह पर धकेल सकता है।

समाज के लिए बड़ा संदेश

महोबा की यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि अंधविश्वास के खतरनाक दुष्परिणामों की चेतावनी भी है। जब भय, भ्रम और अवैज्ञानिक धारणाएं किसी व्यक्ति की सोच पर हावी हो जाती हैं, तब वह सही और गलत का अंतर खो बैठता है।