पीलीभीत में वन विभाग का बड़ा एक्शन: सात लकड़ी डिपो पर छापेमारी, प्रतिबंधित खैर समेत भारी मात्रा में संदिग्ध लकड़ी बरामद
न्यूरिया में अवैध लकड़ी कारोबार पर चला वन विभाग का डंडा
जनपद पीलीभीत के थाना न्यूरिया क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध लकड़ी कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए सात लकड़ी डिपो पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई ऐसी रही कि पूरे इलाके के लकड़ी कारोबारियों में हड़कंप मच गया। जिन डिपो पर वर्षों से कारोबार चल रहा था, वहां वन विभाग की टीम ने पहुंचकर लकड़ी के स्टॉक, परिवहन अभिलेखों और भंडारण संबंधी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की।
शिकायतों के बाद हुई सीधी कार्रवाई
वन विभाग को लगातार सूचना मिल रही थी कि क्षेत्र में बिना अनुमति लकड़ी का भंडारण किया जा रहा है और प्रतिबंधित प्रजातियों की लकड़ी भी खुलेआम कारोबार किया जा रहा है। सूचनाओं का सत्यापन करने के बाद विभाग ने सीधे जांच अभियान चलाया। कार्रवाई की भनक लगने से पहले ही टीमें अलग-अलग स्थानों पर पहुंच गईं, जिससे किसी को भी प्रतिबंधित लकड़ी हटाने का मौका नहीं मिल पाया ।
छह डिपो पर मिली प्रतिबंधित श्रेणी की लकड़ी बरामद
छापेमारी के दौरान आरिस के डिपो से खैर की लकड़ी बरामद हुई। इसके अलावा शीवू, जमशेद, शहबाज, कमर और रियाजुद्दीन के डिपो पर भी प्रतिबंधित श्रेणी की लकड़ी पाई गई। टीम ने मौके पर मौजूद लकड़ी का सत्यापन कर लकड़ी और संबंधित अभिलेख कब्जे में ले लिए।
बरामद लकड़ी के स्रोत, खरीद-बिक्री और परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि लकड़ी वैध माध्यमों से लाई गई थी या फिर इसके पीछे अवैध कटान और अवैध परिवहन का नेटवर्क काम कर रहा था।
500 बोटे प्रतिबंधित लकड़ी वनविभाग के कब्जे में
कार्रवाई के दौरान खैर की लकड़ी के साथ लगभग 500 बोटे प्रतिबंधित श्रेणी की लकड़ी बरामदहुई है। इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी का मिलना यह संकेत देता है कि मामला केवल सामान्य भंडारण का नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर संचालित अवैध कारोबार से भी जुड़ा हो सकता है।
इसी कारण विभाग ने बरामद लकड़ी को कब्जे में लेकर उसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अब हर दस्तावेज, हर प्रविष्टि और हर परिवहन रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है।
तीन लोगों पर शुरू हुई वैधानिक कार्रवाई
प्रारंभिक जांच के बाद तीन लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई है। विभागीय स्तर पर दस्तावेजों की जांच जारी है और संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
इन अधिकारियों की मौजूदगी में चला अभियान
यह कार्रवाई प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) भरत कुमार के निर्देशन में संचालित की गई। छापेमारी अभियान में एसडीओ राजेश चौहान, डिप्टी रेंजर शेर सिंह एवं दिग्विजय सिंह, वन दरोगा नवीन सिंह बोरा और शैलेंद्र कुमार के साथ वन रक्षक अमित कुमार तथा रंजीत सिंह की सक्रिय भूमिका रही। अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त टीम ने विभिन्न डिपो पर पहुंचकर लकड़ी के भंडारण, परिवहन और अभिलेखों की गहन जांच की तथा बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
डीएफओ भरत कुमार का सख्त संदेश
प्रभागीय वनाधिकारी भरत कुमार ने बताया, “हमने कुल सात स्थानों पर छापेमारी की है। कार्रवाई के दौरान खैर की लकड़ी प्राप्त हुई है। लगभग 500 बोटे प्रतिबंधित श्रेणी की लकड़ी भी बरामद हुई है। सभी संबंधित अभिलेख और कागजात कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। तीन लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पूरे मामले की जांच जारी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”
पूरे क्षेत्र में मचा हड़कंप
वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद न्यूरिया सहित पूरे जिले में लकड़ी कारोबार से जुड़े लोगों के बीच बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। अचानक हुई छापेमारी ने उन लोगों की चिंता बढ़ा दी है जो बिना अनुमति भंडारण या संदिग्ध स्रोतों से लकड़ी खरीदने-बेचने में लगे हैं।