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पीलीभीत: अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा पर संग्राम! नाथ संप्रदाय की खुली चुनौती—’दम है तो शास्त्रार्थ करो’

पीलीभीत: अविमुक्तेश्वरानंद की गौ-रक्षार्थ यात्रा को लेकर नाथ संप्रदाय ने खुली चुनौती दी। शास्त्रार्थ की मांग।

पीलीभीत में ‘गविष्ट’ यात्रा से पहले महासंग्राम! नाथ संप्रदाय की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को खुली चुनौती”

पीलीभीत में गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नाथ संप्रदाय के प्रतिनिधि और बाबा हनुमान नाथ उर्फ निर्मल बाबा ने शंकराचार्य परंपरा के संन्यासी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। बाबा हनुमान नाथ का आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद पिछले डेढ़ साल से लगातार सनातन परंपराओं, गोरक्ष पीठ और उसके अनुयायियों की भावनाओं को आहत करने वाले बयान दे रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि यदि अविमुक्तेश्वरानंद अपने आरोपों पर अड़े हैं तो वे गौ संरक्षण के मुद्दे पर सार्वजनिक शास्त्र चर्चा करें, अन्यथा इसे अपनी हार मानें। और पीलीभीत में घुसने की जुर्रत न करें।

गौरक्षा पीठ को बदनाम करने की साजिश का आरोप

दरअसल बाबा हनुमान नाथ का कहना है कि सनातन धर्म में अनेक आध्यात्मिक परंपराएं होने के बावजूद कभी भी एक आचार्य द्वारा दूसरे आचार्य का सार्वजनिक अपमान करने की परंपरा नहीं रही। उनका आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित होकर गौरक्षा पीठ और उसके नेतृत्व को लगातार निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक जुलाई 2026 को प्रस्तावित गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा का पीलीभीत आगमन उनकी तपस्थली पर एक सोची-समझी राजनीतिक और विभाजनकारी कोशिश प्रतीत होता है, जिसका उद्देश्य गौ संरक्षण के क्षेत्र में हुए कार्यों को कमतर दिखाना है।

‘यात्रा के पीछे राजनीतिक उद्देश्य’ का दावा

बाबा हनुमान नाथ ने यह भी दावा किया कि उनकी दृष्टि में अविमुक्तेश्वरानंद आदि शंकराचार्य की गद्दी पर बैठने के योग्य नहीं हैं। उनका सीधा आरोप है कि गौ माता को राष्ट्रीय माता घोषित कराने के नाम पर निकाली जा रही यह यात्रा वास्तविक गौ-हित से अधिक राजनीतिक उद्देश्य साधने का माध्यम बन गई है। उन्होंने दावा किया कि यात्रा के बहाने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और सनातन परंपरा को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। बाबा हनुमान नाथ ने यह आरोप भी लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे हैं और सुनियोजित तरीके से योगी आदित्यनाथ तथा उनकी सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

सार्वजनिक शास्त्र चर्चा की खुली चुनौती

बाबा हनुमान नाथ ने अविमुक्तेश्वरानंद को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है तो वे सार्वजनिक मंच पर आएं और तथ्यों के आधार पर गौ संरक्षण पर शास्त्र चर्चा करें। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में गौ संरक्षण के लिए हुए कार्यों और उससे पहले की स्थिति पर खुली बहस होनी चाहिए। साथ ही यात्रा के आयोजकों से भी उन्होंने अपील की कि यदि उन्हें लगता है कि यह यात्रा वास्तव में धर्म और गौ संरक्षण के हित में है तो वे भी अपने दावों को साबित करें। बाबा हनुमान नाथ ने दो टूक कहा कि यदि अविमुक्तेश्वरानंद इस चुनौती को स्वीकार नहीं करते, तो उन्हें अपनी पराजय स्वीकार करते हुए पीलीभीत में प्रवेश नहीं करना चाहिए।