3

Recent News

पीलीभीत में वीरांगना अवंतीबाई जयंती पर हेमराज वर्मा का बड़ा ऐलान। अखिलेश यादव के नाम पर सपा सरकार बनने पर अवकाश और प्रतिमा की बात।

पीलीभीत में अवंतीबाई जयंती कार्यक्रम से हेमराज वर्मा का राजनीतिक संदेश, अखिलेश यादव के नाम पर बयान पीलीभीत। वीरांगना रानी…

पीलीभीत में उधार सिगरेट को लेकर विवाद खूनी संघर्ष में बदला। बेलचे से हमले में 70 वर्षीय दुकानदार की मौत, पिता-पुत्र समेत 3 आरोपी गिरफ्तार।

पीलीभीत: उधार सिगरेट नहीं मिली तो भड़क गया युवक! बेलचा लेकर लौटा, 70 वर्षीय दुकानदार पर हमला; इलाज के दौरान…

Pakistani TikToker आयशा गिलमाना की गोली मारकर हत्या: बहन भी गंभीर घायल, घर से फोन करके बाहर बुलाया..

Pakistani TikToker आयशा गिलमाना की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 28 साल की आयशा को 14 अगस्त को तक्षशिला…

Shocking Crime: स्कूल में फायरिंग! FB Live कर छात्र ने क्लासमेट को गोली मारी, फिर खुद जान दी; 2 गार्डों की भी मौत..

Shocking Crime: फिलीपींस के जाम्बोआंगा शहर में मंगलवार को एक स्कूल कैंपस में गोलीबारी की घटना से हड़कंप मच गया।…

Pilibhit में प्रेमिका का खूनी खेल! प्रेमी को ट्रक में जिंदा जलाकर मार डाला; पुलिस को लगा था हादसे के बाद लगी थी आग..

Pilibhit के पूरनपुर में ट्रक में आग लगने से हुई एक व्यक्ति की मौत का मामला हत्या निकला है। पुलिस…

3

Recent News

पीलीभीत में अवंतीबाई जयंती कार्यक्रम से हेमराज वर्मा का राजनीतिक संदेश, अखिलेश यादव के नाम पर बयान पीलीभीत। वीरांगना रानी…

पीलीभीत: उधार सिगरेट नहीं मिली तो भड़क गया युवक! बेलचा लेकर लौटा, 70 वर्षीय दुकानदार पर हमला; इलाज के दौरान…

Pakistani TikToker आयशा गिलमाना की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 28 साल की आयशा को 14 अगस्त को तक्षशिला…

Shocking Crime: फिलीपींस के जाम्बोआंगा शहर में मंगलवार को एक स्कूल कैंपस में गोलीबारी की घटना से हड़कंप मच गया।…

Pilibhit के पूरनपुर में ट्रक में आग लगने से हुई एक व्यक्ति की मौत का मामला हत्या निकला है। पुलिस…

Breaking News

80 साल पूरे होने पर Organiser का दावा: भारतीय राष्ट्रवाद की जड़ें संविधान से पहले सभ्यतागत पहचान में

80 साल पूरे होने पर Organiser का दावा: भारतीय राष्ट्रवाद की जड़ें संविधान से पहले सभ्यतागत पहचान में

Organiser: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े अंग्रेजी साप्ताहिक प्रकाशन Organiser ने अपने 80 साल पूरे होने के मौके पर भारतीय राष्ट्रवाद को लेकर अपनी सोच और ऐतिहासिक दृष्टिकोण को सामने रखा है। 3 जुलाई 2026 को जारी एक प्रेस रिलीज में बताया गया कि पिछले आठ दशकों में पत्रिका ने भारतीय राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक बहसों को किस तरह देखा और प्रस्तुत किया। इस लेख में भारतीय राष्ट्रवाद को केवल संवैधानिक ढांचे तक सीमित नहीं बल्कि एक व्यापक सभ्यतागत पहचान के रूप में पेश करने की कोशिश की गई है।

Organiser ने 80वीं वर्षगांठ पर जारी किया विशेष लेख

जारी प्रेस रिलीज का शीर्षक “How Organiser Reimagined Indian Nationalism” रखा गया है। इसमें बताया गया कि Organiser ने स्वतंत्रता के बाद से भारतीय राष्ट्रवाद पर अलग नजरिया रखने की कोशिश की।

लेख के अनुसार पत्रिका ने भारत की पहचान को सिर्फ राजनीतिक सीमाओं या संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक और सभ्यतागत निरंतरता के रूप में देखने पर जोर दिया।

विभाजन और दो-राष्ट्र सिद्धांत पर रखी गई राय

प्रेस रिलीज में देश के विभाजन और दो-राष्ट्र सिद्धांत पर भी चर्चा की गई है। लेख में कहा गया कि 1947 का विभाजन तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का परिणाम था, लेकिन इसने राष्ट्रीय पहचान को लेकर कई बड़े सवाल भी छोड़े।

इसमें कहा गया कि Organiser ने उस समय कांग्रेस की मिश्रित राष्ट्रवाद की अवधारणा से अलग दृष्टिकोण अपनाया और भारत को एक सांस्कृतिक रूप से एकीकृत सभ्यता के रूप में देखा।

भारतीय राष्ट्रवाद को सांस्कृतिक आधार से जोड़ने की कोशिश

लेख में दावा किया गया है कि भारत की एकता सिर्फ संवैधानिक व्यवस्था से नहीं बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान से बनी है।

इसी संदर्भ में कई ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक प्रतीकों का उल्लेख किया गया। Organiser के अनुसार भारतीय इतिहास के कई उदाहरण समाज की सामूहिक ताकत और सांस्कृतिक पहचान को दिखाते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक एकता पर भी दिया गया जोर

प्रेस रिलीज में राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक एकजुटता पर भी चर्चा की गई है। लेख में कहा गया कि विभाजन के अनुभव ने पत्रिका की राजनीतिक सोच को काफी प्रभावित किया।

इसमें यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय एकता को सिर्फ कानूनी व्यवस्था से नहीं बल्कि सामाजिक अनुशासन, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और साझा पहचान से मजबूत किया जा सकता है।

आज भी विचारों की बहस का हिस्सा है Organiser

लेख के मुताबिक Organiser पिछले 80 वर्षों में सिर्फ एक राजनीतिक साप्ताहिक नहीं बल्कि विचारों के मंच के रूप में भी काम करता रहा है।

इसमें कहा गया कि नागरिकता, धर्मनिरपेक्षता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर पत्रिका ने लगातार चर्चा की और अलग दृष्टिकोण रखा।

इतिहास और राष्ट्रवाद पर बहस जारी

प्रेस रिलीज में यह भी स्वीकार किया गया कि इतिहास और राष्ट्रवाद को लेकर अलग-अलग विचार मौजूद हैं। कुछ इतिहासकार भारत की पहचान को सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक बहुलता से जोड़कर देखते हैं, जबकि दूसरी तरफ सभ्यतागत दृष्टिकोण को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

लेख में कहा गया कि इन अलग-अलग विचारों के बीच संवाद आधुनिक भारत की राजनीतिक और बौद्धिक बहस का अहम हिस्सा बना हुआ है।