Organiser: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े अंग्रेजी साप्ताहिक प्रकाशन Organiser ने अपने 80 साल पूरे होने के मौके पर भारतीय राष्ट्रवाद को लेकर अपनी सोच और ऐतिहासिक दृष्टिकोण को सामने रखा है। 3 जुलाई 2026 को जारी एक प्रेस रिलीज में बताया गया कि पिछले आठ दशकों में पत्रिका ने भारतीय राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक बहसों को किस तरह देखा और प्रस्तुत किया। इस लेख में भारतीय राष्ट्रवाद को केवल संवैधानिक ढांचे तक सीमित नहीं बल्कि एक व्यापक सभ्यतागत पहचान के रूप में पेश करने की कोशिश की गई है।
Organiser ने 80वीं वर्षगांठ पर जारी किया विशेष लेख
जारी प्रेस रिलीज का शीर्षक “How Organiser Reimagined Indian Nationalism” रखा गया है। इसमें बताया गया कि Organiser ने स्वतंत्रता के बाद से भारतीय राष्ट्रवाद पर अलग नजरिया रखने की कोशिश की।
लेख के अनुसार पत्रिका ने भारत की पहचान को सिर्फ राजनीतिक सीमाओं या संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक और सभ्यतागत निरंतरता के रूप में देखने पर जोर दिया।
विभाजन और दो-राष्ट्र सिद्धांत पर रखी गई राय
प्रेस रिलीज में देश के विभाजन और दो-राष्ट्र सिद्धांत पर भी चर्चा की गई है। लेख में कहा गया कि 1947 का विभाजन तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का परिणाम था, लेकिन इसने राष्ट्रीय पहचान को लेकर कई बड़े सवाल भी छोड़े।
इसमें कहा गया कि Organiser ने उस समय कांग्रेस की मिश्रित राष्ट्रवाद की अवधारणा से अलग दृष्टिकोण अपनाया और भारत को एक सांस्कृतिक रूप से एकीकृत सभ्यता के रूप में देखा।
भारतीय राष्ट्रवाद को सांस्कृतिक आधार से जोड़ने की कोशिश
लेख में दावा किया गया है कि भारत की एकता सिर्फ संवैधानिक व्यवस्था से नहीं बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान से बनी है।
इसी संदर्भ में कई ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक प्रतीकों का उल्लेख किया गया। Organiser के अनुसार भारतीय इतिहास के कई उदाहरण समाज की सामूहिक ताकत और सांस्कृतिक पहचान को दिखाते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक एकता पर भी दिया गया जोर
प्रेस रिलीज में राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक एकजुटता पर भी चर्चा की गई है। लेख में कहा गया कि विभाजन के अनुभव ने पत्रिका की राजनीतिक सोच को काफी प्रभावित किया।
इसमें यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय एकता को सिर्फ कानूनी व्यवस्था से नहीं बल्कि सामाजिक अनुशासन, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और साझा पहचान से मजबूत किया जा सकता है।
आज भी विचारों की बहस का हिस्सा है Organiser
लेख के मुताबिक Organiser पिछले 80 वर्षों में सिर्फ एक राजनीतिक साप्ताहिक नहीं बल्कि विचारों के मंच के रूप में भी काम करता रहा है।
इसमें कहा गया कि नागरिकता, धर्मनिरपेक्षता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर पत्रिका ने लगातार चर्चा की और अलग दृष्टिकोण रखा।
इतिहास और राष्ट्रवाद पर बहस जारी
प्रेस रिलीज में यह भी स्वीकार किया गया कि इतिहास और राष्ट्रवाद को लेकर अलग-अलग विचार मौजूद हैं। कुछ इतिहासकार भारत की पहचान को सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक बहुलता से जोड़कर देखते हैं, जबकि दूसरी तरफ सभ्यतागत दृष्टिकोण को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
लेख में कहा गया कि इन अलग-अलग विचारों के बीच संवाद आधुनिक भारत की राजनीतिक और बौद्धिक बहस का अहम हिस्सा बना हुआ है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).