पीलीभीत के विकास का विजन: बोर्ड बैठक में रखे गए जनहित के 23 बड़े प्रस्ताव, क्या बदल सकती है शहर की तस्वीर?
पीलीभीत। नगर पालिका परिषद की आगामी बोर्ड बैठक को लेकर शहर के विकास, स्वच्छता, पारदर्शिता और आधुनिक नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। इन प्रस्तावों का उद्देश्य केवल समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि पीलीभीत को एक स्वच्छ, व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना भी है।
प्रस्तावों में सफाई व्यवस्था से लेकर जलभराव, सड़क, पार्किंग, पेयजल, सार्वजनिक शौचालय, ठोस कचरा प्रबंधन, ई-गवर्नेंस, अग्नि सुरक्षा, गौशाला, अतिक्रमण हटाने और बोर्ड बैठक के लाइव प्रसारण तक कई ऐसे सुझाव शामिल हैं, जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों के दैनिक जीवन से है। यदि इन प्रस्तावों पर गंभीरता से चर्चा कर बजट और कार्ययोजना स्वीकृत होती है, तो आने वाले वर्षों में पीलीभीत के शहरी विकास को नई दिशा मिल सकती है।
स्वच्छता व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने का सुझाव
प्रस्तावों में वार्डवार सफाई कर्मचारियों की मोबाइल ऐप के माध्यम से फोटो सहित उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था का सुझाव दिया गया है। इससे न केवल कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि नागरिक भी यह जान सकेंगे कि उनके क्षेत्र में सफाई कब हुई।
इसी के साथ मुख्य नालों की मशीनों से नियमित सफाई, शिकायत के लिए हेल्पलाइन और सप्ताह में दो बार अनिवार्य फॉगिंग अभियान चलाने का सुझाव भी दिया गया है। यह व्यवस्था बरसात के मौसम में जलजनित बीमारियों और मच्छरों से फैलने वाले संक्रमण पर नियंत्रण में सहायक हो सकती है।
कूड़ा नहीं, संसाधन बने शहर का अपशिष्ट
प्रस्ताव में ठोस कचरा प्रबंधन को आधुनिक स्वरूप देने की बात कही गई है। डोर-टू-डोर कलेक्शन के बाद कूड़े का पृथक्करण, वर्मी कम्पोस्ट, बायोगैस अथवा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने का सुझाव दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए तो नगर पालिका पर बोझ कम होगा, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और अतिरिक्त आय के स्रोत भी विकसित हो सकते हैं।
जलभराव की स्थायी समस्या के समाधान की दिशा
पीलीभीत में प्रत्येक वर्ष बरसात के दौरान खकरा और देवहा नदी के जलस्तर में वृद्धि से शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। इस चुनौती से निपटने के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार करने, पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का सुझाव दिया गया है।
यदि इस प्रकार की दीर्घकालिक योजना लागू होती है तो जलभराव, यातायात बाधा और संपत्ति के नुकसान जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
सड़क, नाली और अतिक्रमण पर विशेष फोकस
जेपी रोड, रेलवे स्टेशन क्षेत्र और शहर की गलियों में जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर पक्की नालियां बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही प्रत्येक तीन महीने में गड्ढा मुक्त सड़क अभियान चलाने तथा मुख्य बाजारों और नालियों पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने का सुझाव दिया गया है।
GIS मैपिंग के माध्यम से सार्वजनिक नालियों और तालाबों की भूमि चिन्हित कर कार्रवाई करने का सुझाव शहरी नियोजन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हरियाली, तालाब और शहर की नई पहचान
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रत्येक वार्ड में कम से कम 100 पौधे लगाने तथा उनकी एक वर्ष तक देखभाल सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके अतिरिक्त शहर के प्रमुख तालाबों का सौंदर्यीकरण कर वॉकिंग ट्रैक विकसित करने और शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों—बरेली फाटक मोड़, नौगवां फाटक, स्टेशन चौराहा और नकटादाना चौराहा—पर स्वागत द्वार बनाने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे शहर की सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान मजबूत हो सके।
डिजिटल नगर पालिका की ओर कदम
प्रस्तावों में ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली, टोल-फ्री नंबर, व्हाट्सएप हेल्पलाइन और 48 घंटे के भीतर शिकायतों के समाधान की व्यवस्था का सुझाव दिया गया है।
इसके साथ ही जन्म प्रमाण पत्र, हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और नक्शा स्वीकृति जैसी सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने की भी मांग की गई है।
जनसुविधाओं को प्राथमिकता
सभी वार्डों में खराब स्ट्रीट लाइट 24 घंटे के भीतर ठीक करने, बस अड्डा, अस्पताल, तहसील और मुख्य बाजारों के निकट सार्वजनिक शौचालय एवं पिंक टॉयलेट बनाने तथा मुख्य बाजारों में पार्किंग की बेहतर व्यवस्था विकसित करने का सुझाव भी शामिल है।
साथ ही समय पर हाउस टैक्स और वाटर टैक्स जमा करने वाले नागरिकों को 10 प्रतिशत प्रोत्साहन छूट देने का प्रस्ताव नगर पालिका के राजस्व संग्रह को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
गौशाला, पेयजल और अग्नि सुरक्षा पर भी जोर
शहर में आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए नई गौशाला, पशुओं की टैगिंग, गोद लेने की योजना और बायोगैस प्लांट स्थापित करने का सुझाव दिया गया है।
पुरानी पेयजल पाइपलाइन बदलने, जल गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर जलापूर्ति प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इसके अलावा घनी आबादी वाले शहर में दूसरा फायर स्टेशन स्थापित करने और प्रमुख बाजारों, स्कूलों तथा अस्पतालों में नियमित अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल कराने का सुझाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पारदर्शिता बढ़ाने की पहल
प्रस्तावों में नगर पालिका बोर्ड बैठकों का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण करने की मांग भी की गई है। इससे नागरिकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके जनप्रतिनिधि और अधिकारी शहर के विकास से जुड़े किन मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं और कौन-कौन से निर्णय लिए जा रहे हैं। इससे पारदर्शिता और जनभागीदारी दोनों को मजबूती मिल सकती है।
यदि इच्छाशक्ति हो तो बदल सकती है पीलीभीत की तस्वीर
इन प्रस्तावों का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इनमें केवल समस्याओं का उल्लेख नहीं किया गया, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान और संभावित वित्तीय स्रोतों का भी सुझाव दिया गया है। स्वच्छ भारत मिशन 2.0, AMRUT 2.0 जैसी योजनाओं का उपयोग कर नगर पालिका कई परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती है।
आज देश के अनेक शहर डिजिटल मॉनिटरिंग, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, ड्रेनेज मास्टर प्लान, ई-गवर्नेंस और नागरिक सहभागिता के माध्यम से बेहतर शहरी प्रबंधन का उदाहरण बन चुके हैं। यदि पीलीभीत नगर पालिका भी इन सुझावों को प्राथमिकता देते हुए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करती है, तो शहर में स्वच्छता, यातायात, जल निकासी, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक सुविधाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
अब निगाहें नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक पर होंगी। यदि इन जनहितकारी प्रस्तावों पर सकारात्मक निर्णय लिए जाते हैं, तो यह केवल एक बैठक का एजेंडा नहीं रहेगा, बल्कि पीलीभीत के भविष्य की विकास रूपरेखा साबित हो सकता है।