Anti Paper Leak Bill 2026: देशभर में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा ने बुधवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस बिल के पास होने के बाद अब पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं ज्यादा सख्त कार्रवाई की जाएगी। नए कानून में जेल की सजा बढ़ाने के साथ-साथ भारी जुर्माने, तय समय सीमा में जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी कई नई व्यवस्थाएं जोड़ी गई हैं।
लोकसभा में हंगामे के बीच पास हुआ बिल
पेपर लीक संशोधन विधेयक पर मंगलवार को लोकसभा में करीब 9 घंटे तक चर्चा हुई। बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने करीब 50 मिनट तक बिल पर अपनी बात रखी। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा भी हुआ, लेकिन अंततः बिल ध्वनि मत (Voice Vote) से पारित हो गया।
अब पेपर लीक पर होगी 10 साल तक की जेल
नए संशोधन के तहत पेपर लीक और अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सजा और जुर्माना दोनों बढ़ा दिए गए हैं।
- पेपर लीक या अन्य अनुचित साधनों के मामलों में अब कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकेगी।
- ऐसे मामलों में ₹50 लाख तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है, तो कम से कम 7 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
2 महीने में जांच, 3 महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य
नए कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब जांच और मुकदमे को वर्षों तक लंबित नहीं रखा जाएगा।
संशोधन के अनुसार—
- 2 महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- सुनवाई रोजाना (Day-to-Day Trial) की जाएगी ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और STF बनाने का भी प्रावधान
संशोधन विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरूरत पड़ने पर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का अधिकार दिया गया है।
इसके अलावा केंद्र सरकार भी आवश्यकता पड़ने पर विशेष जांच दल (STF) गठित कर सकेगी, ताकि बड़े और संगठित पेपर लीक मामलों की प्रभावी जांच हो सके।
अब 15 तरह के अपराधों को कानून में किया गया शामिल
पहले के कानून में अपराधों का इतना विस्तृत वर्गीकरण नहीं था।
नए संशोधन के तहत 15 प्रकार के अपराधों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख हैं—
- पेपर लीक
- OMR शीट से छेड़छाड़
- फर्जी वेबसाइट बनाना
- फर्जी एडमिट कार्ड तैयार करना
- परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी हस्तक्षेप
- अन्य संगठित परीक्षा धोखाधड़ी
परीक्षा सुरक्षा के लिए लागू होंगे नए मानक
संशोधन विधेयक में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए भी कई नए प्रावधान किए गए हैं।
अब परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों को—
- बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन
- परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट
- अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग
- सीट आवंटन की सुरक्षित प्रक्रिया
- प्रश्नपत्रों की सुरक्षा
- इनविजिलेशन
- परीक्षा के बाद की प्रक्रिया
जैसे सभी चरणों के लिए विस्तृत सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
राज्यसभा में वंदे मातरम को मिला कानूनी संरक्षण
बुधवार को राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक, 2026 भी पारित कर दिया।
इस कानून के लागू होने के बाद ‘वंदे मातरम’ को भी ‘जन-गण-मन’ की तरह कानूनी संरक्षण मिलेगा। अब वंदे मातरम का अपमान, अनादर करना या इसके गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
2024 के कानून से कितना अलग है नया संशोधन?
| विषय | 2024 का कानून | 2026 संशोधन |
|---|---|---|
| पेपर लीक | 3-5 साल जेल | 5-10 साल जेल |
| जुर्माना | पहले कम प्रावधान | ₹50 लाख तक |
| संगठित अपराध | 5-10 साल जेल, ₹1 करोड़ न्यूनतम जुर्माना | कम से कम 7 साल जेल, ₹10 करोड़ तक जुर्माना |
| जांच | समय सीमा नहीं | 2 महीने में जांच |
| ट्रायल | समय सीमा नहीं | 3 महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य |
| फास्ट ट्रैक कोर्ट | स्पष्ट प्रावधान नहीं | बनाया जा सकेगा |
| STF | प्रावधान नहीं | केंद्र सरकार गठित कर सकेगी |
| अपराध | सीमित | 15 प्रकार के अपराध शामिल |
| परीक्षा सुरक्षा | सामान्य व्यवस्था | बायोमेट्रिक और विस्तृत सुरक्षा मानक |