UPESSC Exam: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) की भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पूछे जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर यह बताने को कहा गया है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है, विशेषज्ञों का चयन कैसे किया जाता है और भविष्य में ऐसी गंभीर गलतियों को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
125 में 33 प्रश्न गलत मिलने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती परीक्षा के 125 प्रश्नों में से 33 प्रश्न गलत पाए जाना बेहद गंभीर मामला है। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि 35 प्रश्न गलत थे, जबकि आयोग ने स्वीकार किया कि विशेषज्ञों की जांच में कुल 33 प्रश्न त्रुटिपूर्ण पाए गए।
अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गलत प्रश्न परीक्षा प्रक्रिया की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
सिर्फ अंक बांटना समाधान नहीं: हाईकोर्ट
न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गलत प्रश्नों के अंक अन्य सही प्रश्नों में वितरित कर देना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब किसी परीक्षा में 25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न गलत पाए जाएं, तो केवल परिणाम संशोधित कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। इसके बजाय यह देखना जरूरी है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
आयोग ने कोर्ट को क्या बताया?
सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पहले 29 प्रश्न सिलेबस से बाहर पाए गए थे। बाद में विशेषज्ञों ने चार और प्रश्नों को भी गलत माना।
इसके बाद आयोग ने कुल 33 गलत प्रश्नों के अंक शेष सही प्रश्नों में वितरित करते हुए नई संशोधित चयन सूची जारी की, जिसमें 42 नए अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल किया गया।
हालांकि, हाईकोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ।
भर्ती परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पर उठे सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल परिणाम संशोधित करने का नहीं है, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने, विशेषज्ञों के चयन और पूरी परीक्षा प्रणाली की गुणवत्ता की जांच का विषय है।
अदालत ने कहा कि आयोग को यह बताना होगा कि प्रश्न तैयार करने की प्रक्रिया क्या है और इतनी बड़ी संख्या में गलत प्रश्न आखिर कैसे शामिल हो गए।
सचिव और परीक्षा नियंत्रक को कोर्ट में होना होगा पेश
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने रिट-ए संख्या 9799/2026 (आदित्य कुमार सिंह एवं 17 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) की सुनवाई के दौरान आदेश दिया कि आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों।
दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर निम्न बिंदुओं पर जवाब देना होगा:
- प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया क्या है?
- विषय विशेषज्ञों का चयन किस आधार पर किया जाता है?
- प्रश्नों की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था क्या है?
- भविष्य में ऐसी त्रुटियां रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
अगली सुनवाई 5 अगस्त को
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग अपना पूरा स्पष्टीकरण शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करेगा। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे अन्य संबंधित रिट याचिकाओं के साथ होगी।