UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए गुरुवार का दिन बेहद दुखद रहा। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार रात करीब 9:30 बजे दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे और लंबे समय से ब्रेन कैंसर से जूझ रहे थे। उनका इलाज अमेरिका तक में कराया गया था, लेकिन बीमारी चौथे स्टेज तक पहुंच चुकी थी। उनके निधन से बसपा को बड़ा झटका लगा है।
रसड़ा सीट से लगातार तीन बार बने विधायक
उमाशंकर सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए। उन्होंने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की।
2022 के चुनाव में जब बसपा पूरे प्रदेश में सिर्फ एक सीट जीत सकी थी, तब रसड़ा से उमाशंकर सिंह की जीत ने पार्टी का खाता खोला था। वह विधानसभा में बसपा के इकलौते विधायक थे।
परिवार में पत्नी, बेटा और बेटी
उमाशंकर सिंह अपने पीछे पत्नी पुष्पा सिंह, बेटी यामिनी सिंह और बेटे प्रिंस युकेश सिंह को छोड़ गए हैं।
यामिनी की शादी वर्ष 2019 में हुई थी, जबकि बेटे युकेश की शादी 2024 में हुई। युकेश की पत्नी कनिका सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह की भतीजी हैं। इस शादी में बसपा प्रमुख मायावती भी शामिल हुई थीं।
राजनीतिक विरासत संभाल सकते हैं प्रिंस युकेश
उमाशंकर सिंह की पत्नी पुष्पा सिंह उनकी कंपनी सी.एस. इंफ्राकंस्ट्रक्शन लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, जबकि बेटे प्रिंस युकेश कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं।
उमाशंकर सिंह के निधन के बाद माना जा रहा है कि भविष्य में युकेश उनकी राजनीतिक विरासत संभाल सकते हैं। हालांकि अब तक वह सक्रिय राजनीति में नजर नहीं आए हैं।
मायावती उन्हें छोटे भाई की तरह मानती थीं
बसपा प्रमुख मायावती और उमाशंकर सिंह के बीच बेहद करीबी रिश्ता था। मायावती उन्हें अपना छोटा भाई मानती थीं। पिछले साल रक्षाबंधन पर उन्होंने उमाशंकर सिंह को राखी भी बांधी थी।
निधन की खबर मिलने के बाद मायावती ने उनके बेटे युकेश से फोन पर बात कर परिवार को हिम्मत रखने की सलाह दी और कहा कि पूरा बसपा परिवार उनके साथ खड़ा है।
आज रसड़ा में होगा अंतिम संस्कार
बसपा सूत्रों के मुताबिक, उमाशंकर सिंह का अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके पैतृक क्षेत्र रसड़ा (बलिया) में पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समर्थकों और राजनीतिक नेताओं के पहुंचने की संभावना है।
आखिरी बार विधानसभा से ऑनलाइन जुड़े थे
स्वास्थ्य खराब होने के कारण उमाशंकर सिंह 24 फरवरी 2025 को विधानसभा सत्र में ऑनलाइन शामिल हुए थे।
उस समय विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उन्हें वर्चुअली बोलने की अनुमति दी थी और पूरे सदन की ओर से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। उमाशंकर सिंह ने भी विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया था।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
उमाशंकर सिंह के पिता घुरहू सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त थे। उन्होंने बलिया में पढ़ाई की और छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए।
बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव जीतने के बाद उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। राजनीति में आने से पहले वे ठेकेदारी का काम करते थे और बाद में जिला पंचायत चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में आए।
2012 में पहली बार बने विधायक
उन्होंने 2011 में बसपा जॉइन की और 2012 में पहली बार रसड़ा से विधायक बने। उस चुनाव में बसपा की सीटें 206 से घटकर 80 रह गई थीं, लेकिन उमाशंकर सिंह ने 84 हजार से अधिक वोट हासिल कर सपा के सनातन पांडेय को करीब 52 हजार वोटों से हराया।
इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 में भी जीत दर्ज कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की।
पूर्वांचल में बसपा का बड़ा चेहरा
उमाशंकर सिंह को पूर्वांचल में बसपा का सबसे मजबूत चेहरा माना जाता था। वर्ष 2012 में 251 लड़कियों और 2016 में 351 हिंदू-मुस्लिम जोड़ों का सामूहिक विवाह कराकर वे चर्चा में आए थे।
क्षेत्र में विकास कार्यों और जनसेवा के कारण उनकी अलग पहचान थी।
इलाज के दौरान आयकर विभाग की छापेमारी
फरवरी 2026 में जब वह कैंसर का इलाज करा रहे थे, उसी दौरान आयकर विभाग ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।
2017 में रद्द हुई थी विधायकी
14 जनवरी 2017 को तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक ने उन्हें रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के उल्लंघन के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया था।
आरोप था कि उन्होंने अपने नाम पर सरकारी ठेके लिए थे। लोकायुक्त की जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद चुनाव आयोग की सिफारिश पर उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी। बाद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां फैसला उनके पक्ष में आया।
54 करोड़ की संपत्ति और कई कारोबार
2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उमाशंकर सिंह के पास करीब 54.05 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। इसमें 18.05 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 35.99 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल थी। उन पर करीब 13 करोड़ रुपये का कर्ज भी था।
राजनीति के अलावा वे कारोबार में भी सक्रिय थे। उनकी कंपनी छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन्स सड़क निर्माण, खनन (माइनिंग), शिक्षा और होटल व्यवसाय से जुड़ी थी।
नेताओं ने जताया शोक
बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उमाशंकर सिंह पार्टी के बेहद वफादार नेता थे और उनका परिवार बसपा परिवार की तरह है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव, भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह और मंत्री दिनेश प्रताप सिंह समेत कई नेताओं ने भी उमाशंकर सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।
अब यूपी में पांच विधानसभा सीटें खाली
उमाशंकर सिंह के निधन के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा में अब 5 सीटें खाली हो गई हैं।
इनमें सपा की तीन, भाजपा की एक और बसपा की एक सीट शामिल है। हाल ही में आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से सपा विधायक आलमबदी आजमी, सोनभद्र की दुद्धी सीट से विजय सिंह गोंड, बरेली की फरीदपुर सीट से भाजपा विधायक श्याम बिहारी लाल और मऊ की घोसी सीट से सपा विधायक सुधाकर सिंह का भी निधन हो चुका है।
हालांकि विधानसभा का कार्यकाल एक वर्ष से कम बचने के कारण इन सीटों पर अब उपचुनाव होने की संभावना नहीं है।