पीलीभीत में आजादी के 80वें पर्व पर विकास और जनसेवा का संकल्प, डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने दिलाई गरीबों की मदद की शपथ
पीलीभीत। देश आज अपनी स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के 79 वर्ष पूरे होने के बाद स्वतंत्रता दिवस का यह अवसर देश के लिए गौरव, संकल्प और जिम्मेदारी—तीनों का संदेश लेकर आया है। इसी भावना के साथ पीलीभीत में भी स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाया गया। जिले में स्वतंत्रता दिवस को लेकर पहले से ही व्यापक तैयारियां की गई थीं और 9 से 17 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान के माध्यम से आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
कलेक्ट्रेट में डीएम ने फहराया तिरंगा
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। तिरंगा फहराते ही पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो उठा। अधिकारियों और कर्मचारियों ने राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी और देश की एकता, अखंडता तथा संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इसके बाद वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से वातावरण देशभक्ति के भाव से भर गया। इसके उपरांत जिलाधिकारी ने अधिकारियों को जनसेवा और अपने दायित्वों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की शपथ दिलाई।
वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है, जबकि जन गण मन राष्ट्रीय गान है।
डीएम का संदेश—गरीब और असहाय व्यक्ति तक पहुंचे सरकार की मदद
मीडिया से बातचीत करते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने जिलेवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में भी खुशहाली आए।
उन्होंने जिलेवासियों से आह्वान किया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम सभी यह संकल्प लें कि अपने आसपास रहने वाले जरूरतमंद, गरीब और असहाय लोगों की हरसंभव मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन भी लगातार यह प्रयास कर रहा है कि कोई गरीब या असहाय व्यक्ति सरकारी सहायता से वंचित न रहे और पात्र लोगों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय से पहुंचे।
डीएम का यह संदेश केवल औपचारिक शुभकामना नहीं, बल्कि जनसेवा को प्रशासन की प्राथमिकता बनाने और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा सकता है।
योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा माना जाएगा, जब उनका लाभ वास्तविक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल योजनाओं को लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि पात्र गरीब, किसान, महिला, युवा, बुजुर्ग, दिव्यांग और जरूरतमंद व्यक्ति सरकारी योजनाओं से जुड़ सकें।
उन्होंने इस भावना को प्रशासनिक कार्यशैली से जोड़ते हुए कहा कि जिले में विकास कार्यों के साथ-साथ जनकल्याण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं की जानकारी मिले, उनकी समस्याओं का समाधान हो और सरकारी सहायता पारदर्शी तरीके से उन तक पहुंचे।
स्वतंत्रता दिवस बना सेवा और संकल्प का पर्व
पीलीभीत में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन केवल ध्वजारोहण तक सीमित नहीं रहा। इससे पहले जिला प्रशासन की ओर से स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई थी। सरकारी, अर्द्धसरकारी और गैर-सरकारी भवनों पर ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शहीद स्मारकों पर श्रद्धांजलि, अस्पतालों और वृद्धाश्रमों में सेवा गतिविधियां, पौधरोपण, रक्तदान तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे कार्यक्रमों को शामिल किया गया था।
प्रशासन की ओर से स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के सम्मान को भी कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को यह याद दिलाना है कि आजादी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है।
हर घर तिरंगा से जनभागीदारी का संदेश
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिले में हर घर तिरंगा अभियान भी चलाया गया। प्रशासन की तैयारियों के अनुसार यह अभियान 9 से 17 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस को केवल सरकारी कार्यक्रम न बनाकर आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी वाला राष्ट्रीय पर्व बनाना है।
तिरंगा हर भारतीय के लिए गौरव, एकता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। ऐसे में घर-घर तिरंगा अभियान के माध्यम से प्रशासन ने नागरिकों को राष्ट्रीय पर्व से भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास किया।
विकसित पीलीभीत से विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की ओर
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि विकास की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे और जिले को विकास की नई दिशा मिले। यही प्रयास आगे चलकर विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत के बड़े संकल्प को मजबूती देगा।
आजादी के 80वें वर्ष में देश विकास, तकनीक, बुनियादी ढांचे, कृषि, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में आगे बढ़ने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का वास्तविक प्रभाव जमीन पर जिला स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से ही दिखाई देता है।
शहीदों के बलिदान से जनसेवा के संकल्प तक
स्वतंत्रता दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि आज देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था, अधिकार और विकास के अवसर उन लोगों के संघर्ष की देन हैं जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
आज जब तिरंगा कलेक्ट्रेट की इमारत पर शान से लहरा रहा है, तो उसके साथ एक जिम्मेदारी भी जुड़ी है—देश की आजादी को विकास, सुशासन, सामाजिक न्याय और जनसेवा के माध्यम से मजबूत करना।
पीलीभीत में जिलाधिकारी का गरीब और असहाय लोगों की मदद करने तथा पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का आह्वान इसी जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।
अब आजादी का अर्थ हर जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान
स्वतंत्रता के 80वें वर्ष का सबसे बड़ा संदेश यही है कि देश की प्रगति का पैमाना केवल बड़ी परियोजनाएं और विकास के आंकड़े नहीं, बल्कि समाज के कमजोर व्यक्ति के जीवन में आया बदलाव भी होना चाहिए।
जब किसी गरीब को उसका हक मिले, किसी किसान को सरकारी योजना का लाभ मिले, किसी बुजुर्ग को सहारा मिले, किसी महिला को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले, किसी युवा को रोजगार और कौशल का रास्ता मिले और किसी जरूरतमंद को सरकारी दफ्तरों में सम्मानपूर्वक अपनी बात रखने का अवसर मिले—तभी जनसेवा की भावना वास्तविक अर्थों में मजबूत होगी।
पीलीभीत में स्वतंत्रता दिवस पर लिया गया यह संकल्प इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला संदेश देता है कि आजादी का उत्सव केवल तिरंगा फहराने तक सीमित न रहे, बल्कि हर नागरिक के जीवन में सम्मान, सुरक्षा, अवसर और खुशहाली लाने का माध्यम बने।
जय हिंद। वंदे मातरम्।