Animal Love: मेरठ में एक पालतू कुत्ते टफ्फू की मौत ने उसके परिवार को इतना भावुक कर दिया कि तीन दिन तक घर में खाना तक नहीं बना। करीब 12 साल तक परिवार का हिस्सा रहे टफ्फू को रविवार को इंसानों की तरह अंतिम विदाई दी गई। परिवार ने उसकी तेरहवीं का आयोजन किया, जिसमें सुबह हवन हुआ और रिश्तेदारों व पड़ोसियों को प्रसाद बांटा गया। टफ्फू को परिवार इतना करीब मानता था कि उसकी पसंद के बूंदी के लड्डू भी प्रसाद में बनवाए गए।
रायबरेली से मेरठ आए थे सुनील यादव
टफ्फू का परिवार मूल रूप से रायबरेली का रहने वाला है। सुनील यादव पिछले 16 साल से मेरठ में रह रहे हैं। वह डीएन इंटर कॉलेज में माली के तौर पर काम करते हैं। परिवार में उनकी पत्नी सुनीता, 18 साल की बेटी वर्षा और 17 साल का बेटा शिवम है।
डीएन इंटर कॉलेज में हुआ था टफ्फू का जन्म
करीब 12 साल पहले डीएन इंटर कॉलेज में एक देसी नस्ल की डॉग ने टफ्फू को जन्म दिया था। सुनील यादव उसे अपने साथ घर ले आए। इसके बाद धीरे-धीरे टफ्फू परिवार का हिस्सा बन गया और उसकी जिंदगी परिवार के बाकी सदस्यों के साथ ही गुजरने लगी।
टफ्फू घर के हर सदस्य की आवाज पहचानता था। वह यह भी समझता था कि कौन परिवार का अपना सदस्य है और कौन बाहर से आया है। समय के साथ उसकी मौजूदगी परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई।
बेटी वर्षा ने रखा था टफ्फू नाम, हर साल बांधती थी राखी
टफ्फू का नाम भी परिवार की बेटी वर्षा ने रखा था। वर्षा उसे सिर्फ पालतू कुत्ता नहीं बल्कि अपना भाई मानती थी। पिछले 12 साल से वह हर रक्षाबंधन पर टफ्फू को राखी बांधती थी।
इस बार भी वर्षा ने टफ्फू को राखी बांधी थी। वर्षा का कहना है कि उसका एक भाई शिवम है और दूसरा टफ्फू था। परिवार के लिए टफ्फू और इंसानों के बीच का रिश्ता इसी वजह से इतना खास बन गया था।
शिवम के बचपन का साथी था टफ्फू
परिवार के बेटे शिवम के लिए भी टफ्फू बचपन का साथी था। 12 साल के दौरान दोनों ने साथ काफी वक्त बिताया। घर में किसी सदस्य के आने या जाने पर भी टफ्फू अपनी प्रतिक्रिया देता था और परिवार के लोगों को पहचानता था।
परिवार में जन्मदिन हो या कोई त्योहार, टफ्फू भी हर खुशी का हिस्सा बनता था। यही वजह है कि उसकी मौत के बाद परिवार के लिए घर का माहौल बिल्कुल बदल गया।
अचानक बिगड़ी तबीयत, डॉक्टर को दिखाने से पहले हो गई मौत
सुनील यादव के मुताबिक, शुक्रवार 11 सितंबर को अचानक टफ्फू की तबीयत खराब हो गई। परिवार उसे डॉक्टर के पास लेकर गया और उसका इलाज कराने की कोशिश की गई।
शाम को डॉक्टर को दोबारा घर आना था, लेकिन उससे पहले ही टफ्फू की मौत हो गई। परिवार के लिए यह अचानक हुआ नुकसान बेहद दुखद रहा।
टफ्फू की मौत के बाद तीन दिन तक घर में नहीं बना खाना
टफ्फू के जाने के बाद परिवार का दुख इतना गहरा था कि तीन दिन तक घर में खाना नहीं बना। सुनीता यादव बताती हैं कि वह टफ्फू की मौत के बाद से ठीक से सो भी नहीं पा रही हैं।
जिस जगह टफ्फू घर में रहा करता था, अब वहां उसकी यादें रह गई हैं। परिवार के मुताबिक, उसकी मौजूदगी रोजमर्रा की जिंदगी में इतनी घुल गई थी कि उसके जाने के बाद हर जगह उसकी कमी महसूस होती है।
सुनील यादव बोले- टफ्फू को छोटे बेटे की तरह मानते थे
टफ्फू की तेरहवीं करने का फैसला सुनील यादव ने खुद लिया। उनका कहना है कि वह टफ्फू को अपने छोटे बेटे की तरह मानते थे। इसलिए उसकी मौत के बाद परिवार ने इंसान की मृत्यु के बाद होने वाली रस्मों की तरह ही उसकी तेरहवीं करने का फैसला किया।
परिवार के लिए यह आयोजन सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि टफ्फू को अंतिम विदाई देने और उसकी यादों को सम्मान देने का तरीका था।
तेरहवीं में हुआ हवन, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को बुलाया
रविवार को टफ्फू की तेरहवीं का आयोजन किया गया। इसमें परिवार के रिश्तेदारों के साथ आसपास रहने वाले लोगों को भी बुलाया गया। सुबह हवन कराया गया और परिवार ने टफ्फू को याद करते हुए धार्मिक रस्में पूरी कीं।
तेरहवीं में प्रसाद तैयार कराने के लिए हलवाई भी लगाए गए थे। लोगों को भोजन और प्रसाद बांटा गया।
टफ्फू को पसंद थे बूंदी के लड्डू, तेरहवीं में वही बनवाए
तेरहवीं के लिए आलू और सीताफल की सब्जी, रायता, कचौरी और बूंदी के लड्डू बनवाए गए। खास बात यह रही कि टफ्फू को बूंदी के लड्डू बहुत पसंद थे।
सुनीता यादव के मुताबिक, टफ्फू की पसंद को ध्यान में रखते हुए प्रसाद में बूंदी के लड्डू भी शामिल किए गए। परिवार के लिए यह उसकी पसंद को याद करने का एक भावुक तरीका था।
तस्वीर लगाकर टफ्फू को दी गई अंतिम विदाई
तेरहवीं के दौरान टफ्फू की तस्वीर भी लगाई गई थी। परिवार के लोगों और रिश्तेदारों ने हवन में हिस्सा लिया और उसे याद किया।
सुनीता यादव कहती हैं कि टफ्फू उनके घर का अभिन्न हिस्सा था। उसकी मौजूदगी परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी। अब उसके जाने के बाद घर में उसकी कमी लगातार महसूस हो रही है।
जिस कॉलेज से शुरू हुई कहानी, वहीं दफनाया गया टफ्फू
टफ्फू की कहानी करीब 12 साल पहले डीएन इंटर कॉलेज से शुरू हुई थी। इसी कॉलेज में उसका जन्म हुआ था और यहीं से वह सुनील यादव के परिवार का हिस्सा बना था।
अब उसकी मौत के बाद परिवार ने उसे उसी डीएन इंटर कॉलेज के ग्राउंड में दफनाया। इस तरह जिस जगह से टफ्फू की जिंदगी की कहानी शुरू हुई थी, उसी जगह उसे अंतिम विदाई भी मिली।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).