Rajasthan Election 2026 के नतीजों ने प्रदेश की शहरी राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। 309 शहरी निकायों में हुए चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने सबसे ज्यादा वार्ड जीतकर अपना दबदबा कायम किया है। BJP ने 4,178 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 3,612 वार्डों के साथ दूसरे नंबर पर रही। निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी 2,273 वार्ड जीतकर बड़ा प्रभाव छोड़ा है।
इस चुनाव में जहां BJP का मजबूत प्रदर्शन चर्चा में है, वहीं कुछ नतीजे ऐसे भी रहे जिन्होंने पूरे चुनाव को ‘अजब-गजब’ बना दिया। नागौर के परबतसर में BJP प्रत्याशी को महज एक वोट मिला, जबकि दूसरी जगह RLP प्रत्याशी का खाता ही नहीं खुला। यही नहीं, बड़े शहरों में भी कई जगह निर्दलीयों ने राजनीतिक समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
309 निकायों में BJP का सबसे बड़ा प्रदर्शन
राजस्थान में इस बार 309 शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव हुआ। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल थीं। कुल 10,245 पार्षद पदों के लिए चुनाव कराया गया। पहले और दूसरे चरण में मतदान हुआ और कुल मिलाकर 1.44 करोड़ से ज्यादा मतदाता इस चुनाव में वोट डालने के लिए पात्र थे।
नतीजों में BJP सबसे आगे रही। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार BJP ने 4,178 वार्डों पर कब्जा जमाया। कांग्रेस 3,612 वार्डों के साथ पीछे रही, जबकि निर्दलीयों ने 2,273 सीटों पर जीत हासिल की। बाकी सीटें अन्य दलों के खाते में गईं।
यानी कुल वार्डों के हिसाब से देखें तो BJP ने कांग्रेस से 566 ज्यादा वार्ड जीते। यह अंतर बताता है कि राजस्थान के शहरी इलाकों में BJP का संगठन और चुनावी पकड़ फिलहाल मजबूत बनी हुई है।
जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में BJP की बड़ी बढ़त
बड़े नगर निगमों की बात करें तो BJP का प्रदर्शन खास तौर पर मजबूत रहा। उपलब्ध अंतिम नतीजों के मुताबिक जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में BJP का मेयर बनना तय हुआ है। वहीं बीकानेर में कांग्रेस ने बाजी मारी है।
जयपुर जैसे बड़े शहरी क्षेत्र में BJP का प्रदर्शन खास महत्व रखता है। जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड हैं और चुनाव में BJP और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला।
अजमेर और पाली में कांग्रेस मजबूत, निर्दलीयों का बड़ा खेल
हालांकि पूरे राजस्थान में BJP आगे रही, लेकिन हर शहर में कहानी एक जैसी नहीं रही। अजमेर और पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। यहां बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। जोधपुर और भरतपुर समेत कुछ अन्य बड़े निकायों में भी निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी बनकर उभरे हैं।
इसका मतलब यह है कि BJP ने राज्य स्तर पर बढ़त जरूर बनाई है, लेकिन हर नगर निकाय में बोर्ड बनाना सिर्फ सबसे ज्यादा सीटें जीतने से तय नहीं होगा। कई जगह निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक हो सकता है।
अब सबसे मजेदार नतीजा: BJP प्रत्याशी को सिर्फ 1 वोट
राजस्थान निकाय चुनाव का सबसे ज्यादा चर्चा में आया नतीजा नागौर जिले के परबतसर नगरपालिका के वार्ड नंबर 13 से सामने आया।
यहां BJP प्रत्याशी कैलाशचंद को सिर्फ 1 वोट मिला। खास बात यह है कि यह वोट भी उनका अपना नहीं था, क्योंकि कैलाशचंद वार्ड नंबर 13 के वोटर ही नहीं हैं। वह वार्ड नंबर 12 के मतदाता हैं।
इस वार्ड में कांग्रेस की हिना खानम ने 376 वोट हासिल करके जीत दर्ज की। यानी BJP प्रत्याशी और विजेता उम्मीदवार के बीच वोटों का अंतर ही 375 रहा।
यह नतीजा सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई कि आखिर प्रत्याशी के अपने वार्ड से बाहर चुनाव लड़ने का क्या असर पड़ा।
परिवार ने भी वोट नहीं दिया? रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा
इस एक वोट वाले मामले को और ज्यादा दिलचस्प बनाने वाली बात कुछ मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है। रिपोर्टों में दावा किया गया कि BJP प्रत्याशी की पत्नी, माता और पिता ने भी उन्हें वोट नहीं दिया और कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया।
हालांकि इस दावे को स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य की तरह नहीं रखा जा सकता। इसलिए इसे सिर्फ मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
लेकिन इतना जरूर है कि सिर्फ एक वोट मिलने का आंकड़ा अपने आप में ही राजस्थान निकाय चुनाव के सबसे असामान्य नतीजों में शामिल हो गया है।
दूसरी तरफ RLP प्रत्याशी का खाता ही नहीं खुला
सिर्फ BJP प्रत्याशी का एक वोट वाला मामला ही नहीं है। राजस्थान के निकाय चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी RLP के प्रत्याशी ओमप्रकाश को भी बेहद चौंकाने वाला परिणाम मिला।
सिणधरी में ओमप्रकाश को एक भी वोट नहीं मिला, यानी उनका खाता ही नहीं खुला। रिपोर्ट के मुताबिक वह जिस वार्ड से चुनाव लड़ रहे थे, उसके मतदाता भी नहीं थे।
एक तरफ BJP प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट मिला और दूसरी तरफ RLP प्रत्याशी को जीरो वोट। दोनों मामले इस चुनाव के सबसे चर्चित और मजेदार चुनावी किस्सों में शामिल हो गए हैं।
77 प्रत्याशी तो वोटिंग से पहले ही जीत गए थे
राजस्थान निकाय चुनाव में एक और दिलचस्प आंकड़ा सामने आया था। चुनाव से पहले ही 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे।
इनमें BJP के 44, कांग्रेस के 16 और निर्दलीय 17 प्रत्याशी शामिल थे। यानी निर्विरोध जीतने वालों में भी BJP सबसे आगे थी।
इन 77 निर्विरोध विजेताओं में 37 महिलाएं भी शामिल थीं। सीकर की 22 वर्षीय सोफिया सबसे कम उम्र की निर्विरोध विजेताओं में शामिल रहीं।
बारां में BJP-कांग्रेस दोनों को AAP ने चौंकाया
पूरे चुनाव में BJP का दबदबा रहा, लेकिन बारां नगर परिषद का नतीजा अलग कहानी बताता है। यहां आम आदमी पार्टी ने बड़ा उलटफेर करते हुए बहुमत हासिल किया।
बारां की 60 सीटों वाली नगर परिषद में AAP ने 31 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 18 और BJP को सिर्फ 9 सीटें मिलीं। इस तरह AAP ने अकेले दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल कर ली।
यह नतीजा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान की शहरी राजनीति में सामान्य तौर पर मुकाबला BJP और कांग्रेस के बीच माना जाता है। ऐसे में किसी तीसरे दल का सीधे बहुमत हासिल करना बड़ा राजनीतिक संदेश है।
BJP की बढ़त का सबसे बड़ा मतलब क्या?
राजस्थान निकाय चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि शहरी क्षेत्रों में BJP अभी भी मजबूत स्थिति में है। 4,178 वार्ड जीतकर BJP ने कांग्रेस से 566 वार्ड ज्यादा हासिल किए हैं। इसके अलावा चुनाव से पहले निर्विरोध जीती 44 सीटें भी BJP की संगठनात्मक पकड़ को दिखाती हैं।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। अजमेर, पाली और बीकानेर जैसे इलाकों में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जबकि कई निकायों में निर्दलीयों ने बड़ी संख्या में जीत हासिल की है। बारां में AAP की जीत भी बताती है कि स्थानीय स्तर पर तीसरे दल और स्थानीय चेहरे समीकरण बदल सकते हैं।
2028 से पहले BJP के लिए बड़ा सियासी संदेश
राजस्थान में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में निकाय चुनाव को सिर्फ स्थानीय चुनाव मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शहरी क्षेत्रों में BJP का यह प्रदर्शन पार्टी के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक और संगठनात्मक फायदा माना जा सकता है।
वहीं कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह उन शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ कैसे मजबूत करे जहां BJP ने स्पष्ट बढ़त बनाई है। निर्दलीयों और स्थानीय मुद्दों की भूमिका भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगी।
कुल मिलाकर राजस्थान निकाय चुनाव की तस्वीर में तीन बातें सबसे ज्यादा उभरकर सामने आई हैं—BJP की 4,178 वार्डों वाली बड़ी बढ़त, कांग्रेस का 3,612 वार्डों पर प्रदर्शन और निर्दलीयों की 2,273 सीटों पर मजबूत मौजूदगी। और इसी बड़े राजनीतिक मुकाबले के बीच परबतसर का ‘एक वोट’ और सिणधरी का ‘जीरो वोट’ वाला किस्सा चुनाव का सबसे मजेदार पहलू बन गया है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).