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Pilibhit में बवाल! BJP विधायक बोले – ‘वोट नहीं दिया तो काम नहीं होगा’, फिर ग्रामीणों को गनर-चालक ने लात-घूंसों से मारा..

Pilibhit में बवाल! BJP विधायक बोले - ‘वोट नहीं दिया तो काम नहीं होगा’, फिर ग्रामीणों को गनर-चालक ने लात-घूंसों से मारा..

Pilibhit के न्यूरिया क्षेत्र के मानपुर गांव में जलभराव और तालाब की गंदगी की शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीणों और बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद के बीच विवाद का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक ने वोट नहीं देने की बात कहते हुए काम कराने से इनकार किया और विरोध करने पर गाली-गलौज तथा गनर-चालक से मारपीट कराई। मामले को लेकर ग्रामीणों ने डीएम-एसपी के नाम शिकायत दी है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विधायक ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।

मानपुर में जलभराव और तालाब की गंदगी से परेशान ग्रामीण

समस्या लेकर जनप्रतिनिधि तक पहुंचे थे ग्रामीण

ग्रामीणों के मुताबिक मानपुर गांव में तालाब के चोक होने, गंदगी और बारिश का पानी घरों में घुसने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इसी समस्या के समाधान की उम्मीद में ग्रामीण बैठक कर रहे थे और अपनी शिकायत जनप्रतिनिधि तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे।

शिकायत के अनुसार, इसी दौरान बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद अपने सुरक्षाकर्मी के साथ वहां पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि बातचीत के दौरान उनकी समस्या के बजाय वोट देने या नहीं देने की बात उठाई गई।

‘तुम लोगों ने मुझे वोट नहीं दिया, तुम्हारा काम नहीं होगा!’

वोट को लेकर कथित टिप्पणी से बढ़ा विवाद

ग्रामीणों का दावा है कि विधायक ने कहा कि उन्होंने वोट नहीं दिया है, इसलिए उनका काम नहीं होगा। आरोप है कि इस बात पर एक ग्रामीण ने विरोध करते हुए कहा—‘तो अगली बार वोट मांगने मत आइएगा।’

ग्रामीणों के अनुसार, इस जवाब के बाद विधायक नाराज हो गए और विवाद बढ़ गया। शिकायत में प्रेमशंकर ने आरोप लगाया है कि उनके साथ हाथापाई की गई और उन्हें थप्पड़ मारा गया, जिसके बाद वह कंटीले तार पर गिरकर घायल हो गए।

इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। विधायक ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज किया है।

गनर-चालक से पिटवाने और मोबाइल का डाटा डिलीट करने का आरोप

वीडियो बनाने की कोशिश पर मोबाइल छीनने का दावा

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटना का वीडियो बनाने की कोशिश करने पर मोबाइल छीन लिया गया। शिकायत में मोबाइल में मौजूद डाटा डिलीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

हालांकि, मोबाइल छीनने, डाटा डिलीट करने और गनर-चालक से मारपीट कराने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

विधायक से सवाल: क्या वोट के आधार पर जनता का काम होगा?

जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी पूरे क्षेत्र के प्रति

ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जनप्रतिनिधि और जनता के रिश्ते को लेकर गंभीर सवाल खड़े करेगा। किसी नागरिक ने किसे वोट दिया या नहीं दिया, यह उसका लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी समस्या लेकर विधायक के पास जाना भी नागरिक का अधिकार है।

विधायक जनता के वोट से चुना जाता है, लेकिन पद संभालने के बाद उसकी जिम्मेदारी पूरे क्षेत्र की जनता के प्रति होती है। ऐसे में वोट के आधार पर काम कराने से इनकार करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

योगी सरकार की जनसेवा की सोच के बीच सवाल

उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से जनता की समस्याओं के समाधान और सभी वर्गों के कल्याण पर जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में किसी जनप्रतिनिधि पर वोट के आधार पर नागरिक की समस्या सुनने या काम कराने से इनकार करने का आरोप सामने आता है, तो यह सरकार की घोषित जनसेवा की भावना के संदर्भ में भी सवाल खड़े करता है।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। जनता की समस्या का समाधान उसके मतदान व्यवहार से अलग होना चाहिए।

ग्रामीण पहुंचे डीएम-एसपी के पास, निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर

मामले से नाराज मानपुर के ग्रामीण कलक्ट्रेट पहुंचे और डीएम-एसपी के नाम शिकायती पत्र देकर निष्पक्ष जांच तथा कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराने की बात कही गई है। अब ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों, कथित मारपीट और विवाद के वास्तविक घटनाक्रम की जांच पर नजर है।

विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने आरोपों को बताया निराधार

मंदिर निर्माण को लेकर संवाद का दिया पक्ष

उधर, विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह गांव में मंदिर निर्माण को लेकर लोगों से संवाद कर रहे थे।

विधायक के अनुसार, एक युवक ने अपनी मांग रखी थी, जिस पर उन्होंने अपने साथियों से उसे दर्ज करने के लिए कहा। लेकिन इसी दौरान युवक ने सुरक्षाकर्मी से अभद्रता की।

विधायक ने अपने और सुरक्षाकर्मी पर लगाए गए आरोपों को गलत बताया है।

अब निष्पक्ष जांच से सामने आना चाहिए सच

आरोप और विधायक के पक्ष के बीच प्रशासन की भूमिका अहम

मानपुर विवाद में एक तरफ ग्रामीणों ने वोट को लेकर कथित टिप्पणी, गाली-गलौज और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, तो दूसरी तरफ विधायक ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

ऐसे में निष्पक्ष जांच ही तय करेगी कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ। यदि मारपीट या अन्य आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

जनता अपने मताधिकार का इस्तेमाल स्वतंत्र रूप से करती है। विधायक जनता का प्रतिनिधि होता है, जनता का मालिक नहीं। अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होती है।