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Pilibhit News: 18 साल की सेवा के बाद भी संविदा कर्मियों का बुरा हाल! पीलीभीत में NHM कर्मियों का आर-पार का ऐलान..

Pilibhit News: 18 साल की सेवा के बाद भी संविदा कर्मियों का बुरा हाल! पीलीभीत में NHM कर्मियों का आर-पार का ऐलान..

Pilibhit News: पीलीभीत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो गया है। स्वास्थ्य विभाग में 15 से 18 साल तक लगातार सेवाएं देने के बावजूद नियमित कर्मचारी का दर्जा और उससे जुड़ी सुविधाएं नहीं मिलने से नाराज 332 संविदा कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर धरना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत कर्मचारी नियमितीकरण, समान वेतन, स्वास्थ्य बीमा और दूसरी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। संगठन ने साफ किया है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। मांगों पर ठोस और लिखित फैसला नहीं हुआ तो 12 अक्टूबर से लखनऊ में ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन शुरू किया जाएगा।

15 से 18 साल की सेवा, फिर भी स्थायी कर्मचारी जैसी सुविधाएं नहीं

NHM संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं पहुंचाने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीन पर लागू करने और कोरोना जैसी महामारी के दौरान जोखिम उठाकर काम करने में भी उनकी अहम भूमिका रही है।

इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सेवा सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। कर्मचारियों का सवाल है कि जब उनसे वर्षों तक लगातार काम लिया जा रहा है और जिम्मेदारियां भी नियमित कर्मचारियों जैसी हैं, तो वेतन, सुरक्षा और दूसरे अधिकारों के मामले में अंतर क्यों रखा जा रहा है?

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ का कहना है कि अब कर्मचारियों के सब्र का बांध टूटने लगा है। संगठन चाहता है कि सरकार लंबे समय से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाए और उनकी मांगों पर लिखित निर्णय ले।

NHM संविदा कर्मचारियों की 8 प्रमुख मांगें क्या हैं?

संघ की ओर से दिए गए ज्ञापन में कर्मचारियों ने आठ प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें नियमितीकरण से लेकर वेतन, स्वास्थ्य बीमा और नौकरी की सुरक्षा तक के मुद्दे शामिल हैं।

1. लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों का नियमितीकरण

संघ की सबसे प्रमुख मांग है कि लंबे समय से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि 15 से 18 साल तक सेवा देने के बाद भी अस्थायी व्यवस्था में बने रहना उनके भविष्य को लेकर चिंता पैदा करता है।

2. नियमितीकरण होने तक समान कार्य के लिए समान वेतन

कर्मचारियों ने मांग की है कि जब तक उन्हें नियमित नहीं किया जाता, तब तक समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। उनका तर्क है कि जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद वेतन और सुविधाओं में अंतर नहीं होना चाहिए।

3. कर्मचारियों और आश्रितों को 10 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा

संघ ने कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की मांग की है। इससे बीमारी या अस्पताल में इलाज के दौरान कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।

4. महंगाई भत्ता, EPF, HRA और ग्रेच्युटी

कर्मचारियों ने महंगाई भत्ता (DA), कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), मकान किराया भत्ता (HRA) और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं देने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

5. रिक्त पदों के सापेक्ष दूसरे जिलों में स्थानांतरण की नीति

संघ ने खाली पदों के आधार पर कर्मचारियों के एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण के लिए नीति बनाने की मांग की है। इससे जरूरत और उपलब्ध पदों के अनुसार कर्मचारियों को स्थानांतरण का अवसर मिल सकेगा।

6. सेवाकाल में मृत्यु होने पर आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति

कर्मचारियों की मांग है कि सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर नियमानुसार पात्र आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाए। इससे परिवार को आर्थिक सहारा मिल सकेगा।

7. आउटसोर्स कर्मचारियों का समायोजन

संघ ने आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों के समायोजन की मांग भी रखी है। संगठन चाहता है कि ऐसे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।

8. नियमित भर्तियों में NHM कर्मियों के लिए 25 प्रतिशत कोटा

कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग की नियमित भर्तियों में NHM कर्मियों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से अनुभव के साथ काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित पदों पर भर्ती के दौरान अवसर मिलना चाहिए।

हरियाणा समेत दूसरे राज्यों का दिया उदाहरण

संघ का तर्क है कि हरियाणा सहित कुछ अन्य राज्यों में संविदा कर्मचारियों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी वर्षों से सेवाएं दे रहे NHM कर्मचारियों की मांगों पर ठोस निर्णय होना चाहिए।

कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार से टकराव करना नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद नौकरी की सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन और बेहतर भविष्य हासिल करना है। इसी वजह से संगठन ने अपने ज्ञापन में सभी प्रमुख मांगों को शामिल करते हुए सरकार से लिखित निर्णय की मांग की है।

पीलीभीत में 332 संविदा कर्मियों के कार्य बहिष्कार से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

पीलीभीत में आंदोलन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। 332 संविदा कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार और धरने के कारण टीकाकरण, ओपीडी, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, पैथोलॉजी जांच और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़ी सेवाएं प्रभावित होने की सूचना है।

ये सेवाएं आम लोगों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में कर्मचारियों के आंदोलन से स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि गंभीर मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए आपातकालीन सेवाएं जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। उनका दावा है कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन मरीजों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

जिलाध्यक्ष शेर सिंह बोले- 15 से 18 साल काम करने के बाद भी आंदोलन करना पड़ रहा

NHM संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष शेर सिंह ने कहा कि कर्मचारी 15 से 18 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने से लेकर राष्ट्रीय कार्यक्रमों को जमीन पर लागू करने तक कर्मचारियों ने अपनी भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी कर्मचारी पीछे नहीं हटे। इसके बावजूद वर्षों की सेवा के बाद नियमितीकरण और सम्मानजनक वेतन के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।

शेर सिंह के मुताबिक, कर्मचारी सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपना अधिकार मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब मांगों पर लिखित निर्णय होना चाहिए। केवल आश्वासन देकर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश कर्मचारियों को स्वीकार नहीं होगी।

देवेंद्र अस्थाना ने कहा- यह पूरे प्रदेश के एक लाख से अधिक कर्मचारियों के भविष्य की लड़ाई

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र अस्थाना ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक जिले या कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के एक लाख से अधिक संविदा कर्मियों के भविष्य से जुड़ी है।

उन्होंने कहा कि वर्षों तक कर्मचारियों से सेवाएं लेने के बाद भी उन्हें अस्थायी व्यवस्था में बनाए रखना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। संगठन ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगें स्पष्ट कर चुका है। अब सरकार को तय करना है कि वह कर्मचारियों को उनका अधिकार देती है या आंदोलन को और व्यापक होने के लिए मजबूर करती है।

देवेंद्र अस्थाना ने बताया कि 12 अक्टूबर से लखनऊ में ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन की तैयारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस और लिखित फैसला होने तक आंदोलन वापस लेने का सवाल नहीं उठता।

5 से 10 अक्टूबर तक विरोध, 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन आंदोलन की तैयारी

संघ के ज्ञापन के अनुसार, आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • 5 से 7 अक्टूबर: कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।
  • 8 से 10 अक्टूबर: जिला मुख्यालयों पर कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा गया।
  • 12 अक्टूबर से: मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने की स्थिति में लखनऊ में अनिश्चितकालीन ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई है।

इस कार्यक्रम के तहत पीलीभीत में भी संविदा कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार और धरने के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया है। अब संगठन की नजर सरकार के अगले कदम पर है।

सरकार के फैसले पर टिकी नजरें, कर्मचारियों ने लिखित आश्वासन की मांग की

पीलीभीत के NHM संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि नियमितीकरण, समान वेतन और सम्मानजनक भविष्य चाहिए। उनकी आठ सूत्रीय मांगों में नौकरी की सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य बीमा और नियमित भर्ती में अवसर देने तक के मुद्दे शामिल हैं।

दूसरी ओर, कार्य बहिष्कार के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की सूचना है, जिससे मरीजों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में आंदोलन और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

अब देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत और ठोस निर्णय के जरिए समाधान निकालती है या 12 अक्टूबर से प्रस्तावित लखनऊ आंदोलन के साथ यह विरोध और व्यापक रूप लेता है।