Akshara Singh Song: नवरात्रि की सप्तमी और मां कालरात्रि की आराधना के खास मौके पर भोजपुरी गायिका और अभिनेत्री अक्षरा सिंह की आवाज में नया गीत ‘दुर्गा मइया से सीखऽ ना धूल चटावे के’ रिलीज हुआ है। गीत के बोल गीतकार मनोज भावुक ने लिखे हैं, जबकि इसका संगीत मधुकर आनंद ने तैयार किया है। अक्षरा सिंह के आधिकारिक यूट्यूब चैनल ‘अक्षरा सिंह ऑफिसियल’ पर रिलीज हुए इस गाने में नारी के साहस, आत्मसम्मान और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की ताकत को दिखाया गया है।
मां कालरात्रि के रौद्र रूप से प्रेरित है गीत
नारी की शक्ति और साहस को दिखाते हैं बोल
मां दुर्गा के नौ रूपों में सातवां स्वरूप मां कालरात्रि का है। उन्हें उनके रौद्र, विकराल और दुष्टों का संहार करने वाले रूप के लिए जाना जाता है। गीतकार मनोज भावुक ने इसी स्वरूप को आधार बनाकर अपने नए भोजपुरी गीत में नारी की शक्ति को प्रभावशाली तरीके से पेश किया है।
गीत का संदेश है कि नारी सिर्फ ममता, त्याग और धैर्य की प्रतिमूर्ति नहीं है। जरूरत पड़ने पर वह अन्याय के खिलाफ चंडी बनकर खड़ी भी हो सकती है। गीत महिलाओं को अपनी ताकत पहचानने, आत्मसम्मान के साथ जीने और गलत के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देता है।
‘खाली पूजा के थाल सजावे के’ नहीं, अन्याय का जवाब देना भी सीखें
गीत के बोल नारी को केवल पूजा-पाठ और परंपराओं तक सीमित रहने के बजाय अपनी रक्षा और सम्मान के लिए आवाज उठाने का संदेश देते हैं। मनोज भावुक लिखते हैं:
“मर्यादा पर हाथ बढ़ावे केहू त ललकारऽ, चंडी बन जा, खूब दहाड़ऽ, पटक-पटक के मारऽ। मत सीखऽ खाली पूजा के थाल सजावे के, दुर्गा मइया से सीखऽ ना… धूल चटावे के।”
इन पंक्तियों के जरिए गीत में यह बात कही गई है कि अगर कोई महिला की मर्यादा और सम्मान पर हमला करे, तो उसे चुपचाप सहने के बजाय उसका विरोध करना चाहिए। मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप से प्रेरणा लेकर अन्याय के सामने डटकर खड़े होने का संदेश इस गीत का मुख्य आकर्षण है।
मनोज भावुक के बोल, अक्षरा सिंह की आवाज और मधुकर आनंद का संगीत
सामाजिक मुद्दों पर भी लिखते हैं मनोज भावुक
मनोज भावुक समकालीन भोजपुरी के प्रमुख गीतकारों में गिने जाते हैं। उन्हें फिल्मफेयर और फेमिना जैसे प्रतिष्ठित मंचों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी लेखनी में प्रेम और संवेदना के साथ-साथ सामाजिक विसंगतियों पर सवाल उठाने का अंदाज भी देखने को मिलता है।
उनका चर्चित हिंदी गीत भी सामाजिक पाखंड पर चोट करता है:
“मरे हुए एक रावण को हर साल जलाते हैं हम लोग, जिंदा रावण-कंसों से तो आँख चुराते हैं हम लोग।”
यह गीत समाज में मौजूद दोहरे रवैये पर सवाल उठाता है। इसी तरह ‘दुर्गा मइया से सीखऽ ना धूल चटावे के’ में भी मनोज भावुक ने नारी के सम्मान और अन्याय के विरोध को केंद्र में रखा है।
अक्षरा सिंह की आवाज ने गीत को दिया ओजपूर्ण अंदाज
अक्षरा सिंह ने इस गीत को प्रभावशाली अंदाज में गाया है। प्रशंसकों के बीच ‘शेरनी’ की छवि रखने वाली अक्षरा सिंह पर नारी शक्ति और आत्मसम्मान का संदेश देने वाला यह गीत खूब जंचता है। उनकी आवाज गीत के आक्रामक और प्रेरक भाव को सामने लाती है।
वहीं, मधुकर आनंद ने गीत को संगीतबद्ध किया है। उनका संगीत गीत के ओजपूर्ण भाव को उभारता है। हालांकि, गीत की दृश्य-परिकल्पना और फिल्मांकन को और बेहतर बनाया जा सकता था, जिससे इसके संदेश को वीडियो के जरिए अधिक प्रभावशाली ढंग से सामने लाने का मौका मिलता।
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‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार’ के बाद फिर साथ आए मनोज भावुक और अक्षरा सिंह
नए गीत में नारी शक्ति, पिछले गीत में बिहार की पीड़ा और आस्था
गौरतलब है कि हाल ही में मनोज भावुक और अक्षरा सिंह का गीत ‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार’ भी चर्चा में रहा था। उस गीत में बाढ़ जैसी आपदा से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदना और छठी मइया में आस्था का भाव सामने आया था।
वहीं, इस नई पेशकश में दोनों ने नारी के आत्मसम्मान, साहस और शक्ति को केंद्र में रखा है। दोनों गीतों के विषय अलग हैं, लेकिन इनमें सामाजिक सरोकार और भावनात्मक जुड़ाव की झलक मिलती है।
भोजपुरी संगीत में सामाजिक संदेश देने की कोशिश
मां कालरात्रि की आराधना के दिन खास है गीत की रिलीज
नवरात्रि की सप्तमी और मां कालरात्रि की पूजा के अवसर पर रिलीज हुआ यह गीत धार्मिक आस्था के साथ महिलाओं की शक्ति का संदेश भी देता है। गीत के जरिए महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानने और अन्याय के सामने मजबूती से खड़े होने की प्रेरणा देने की कोशिश की गई है।
ऐसे दौर में, जब भोजपुरी संगीत के कुछ गीतों को उनके बोल और प्रस्तुति के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है, मनोज भावुक की यह पेशकश सार्थक शब्दों के जरिए सामाजिक चेतना जगाने की कोशिश करती है। गीत का केंद्रीय विचार साफ है—नारी का सम्मान जरूरी है और जरूरत पड़ने पर उसे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).