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UP Election 2027: पीलीभीत में BJP टिकट के लिए दीपक अग्रवाल ने ठोकी दावेदारी, क्या मंत्री संजय सिंह गंगवार का कटेगा टिकट?

UP Election 2027: पीलीभीत में BJP टिकट के लिए दीपक अग्रवाल ने ठोकी दावेदारी, क्या मंत्री संजय सिंह गंगवार का कटेगा टिकट?

UP Election 2027: पीलीभीत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर टिकट की दावेदारी का मामला सामने आने लगा है। पीलीभीत के पुराने भाजपा नेता दीपक अग्रवाल ने पीलीभीत सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए पार्टी हाईकमान के सामने अपनी दावेदारी पेश की है। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र भेजकर खुद को विधानसभा सीट संख्या 127 से प्रत्याशी बनाने की मांग की है। अपने पत्र में दीपक अग्रवाल ने परिवार की कई पीढ़ियों के संगठनात्मक जुड़ाव, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में अपनी शुरुआती भूमिका, विश्व हिंदू परिषद में जिम्मेदारी, राजनीतिक आंदोलनों में भागीदारी और पिछले विधानसभा चुनावों में टिकट न मिलने के बावजूद पार्टी के लिए काम करने का उल्लेख किया है। अब सवाल है कि क्या भाजपा लगातार दो विधानसभा चुनाव जीत चुके मौजूदा विधायक और राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार का टिकट काटकर दीपक अग्रवाल को मौका दे सकती है?

दीपक अग्रवाल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा पत्र

दीपक अग्रवाल ने 1 अक्टूबर 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को संबोधित पत्र भेजा। पत्र के विषय में उन्होंने लिखा है कि आयु सीमा के कारण 2032 में चुनाव लड़ने में असमर्थ होने की स्थिति को देखते हुए 2027 का चुनाव उनके जीवन का पहला और अंतिम चुनाव हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने पीलीभीत नगर विधानसभा सीट संख्या 127 से प्रत्याशी बनाए जाने की मांग की है। पत्र में उन्होंने “अभी नहीं तो कभी नहीं” का उल्लेख भी किया है।

दीपक अग्रवाल ने पार्टी नेतृत्व से अपील की है कि उनके परिवार के लंबे समय के समर्पण, संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक छवि और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रत्याशी घोषित करने पर विचार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि संगठन की इस पूंजी को कार्यकर्ताओं और समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए ब्याज सहित लौटाने का संकल्प लेते हैं।

तीन पीढ़ियों के संगठनात्मक जुड़ाव का दिया हवाला

दीपक अग्रवाल ने अपने पत्र में परिवार की तीन पीढ़ियों के संगठन से जुड़ाव को अपनी दावेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया है। उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय वेद प्रकाश अग्रवाल का उल्लेख करते हुए लिखा कि उनके पिता का जन्म वर्ष 1944 में हुआ था और उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा अटल बिहारी वाजपेयी के मार्गदर्शन में पीलीभीत में संगठन के काम की नींव रखी थी।

पत्र में दीपक अग्रवाल ने दावा किया है कि उनके पिता के 64 वर्षों के तपस्वी जीवन और संगठन के प्रति समर्पण से प्रेरित होकर परिवार की तीन पीढ़ियों ने संगठन के लिए योगदान दिया है। उन्होंने अपने पुत्र अंकुर अग्रवाल का भी उल्लेख किया है, जो वर्तमान में संघ में जिला व्यवस्था प्रमुख के रूप में संगठन को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

दीपक अग्रवाल ने विशेष टिप्पणी में रामलाल जी और शिव प्रकाश जी के सानिध्य में लंबे समय तक कार्य करने का सौभाग्य मिलने की बात लिखी है। उन्होंने कहा है कि उनके परिवार की पृष्ठभूमि के बारे में इन वरिष्ठ लोगों से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

9 साल की उम्र में RSS से जुड़े, 28 साल तक निभाईं जिम्मेदारियां

दीपक अग्रवाल ने पत्र में बताया है कि वह वर्ष 1972 में 9 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से बाल स्वयंसेवक के रूप में जुड़े थे। उन्होंने संघ में स्वयंसेवक, मुख्य शिक्षक, विस्तारक, नगर संपर्क प्रमुख और जिला संपर्क प्रमुख जैसी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने का दावा किया है। उनके मुताबिक, उन्होंने करीब 28 वर्षों तक संगठन में अलग-अलग दायित्वों का निर्वहन किया।

उन्होंने अपनी दावेदारी के समर्थन में यह भी बताया है कि उनकी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता लंबे समय से रही है। पत्र के मुताबिक, वह संगठन से जुड़ाव को केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित नहीं मानते, बल्कि इसे अपने परिवार की पुरानी परंपरा का हिस्सा बताते हैं।

विश्व हिंदू परिषद में 14 साल तक जिलाध्यक्ष रहने का दावा

दीपक अग्रवाल ने अपने पत्र में विश्व हिंदू परिषद (VHP) में निभाई गई भूमिका का भी उल्लेख किया है। उन्होंने दावा किया है कि पीलीभीत जिले में विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष के रूप में उन्होंने 14 वर्षों तक काम किया।

उनके मुताबिक, इस दौरान उन्होंने विषम और विपरीत परिस्थितियों में ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया। पत्र में उन्होंने 18 बार राजनीतिक मुकदमे झेलने और तीन बार जेल यात्राएं करने की बात भी कही है। दीपक अग्रवाल ने इन अनुभवों को अपनी संगठनात्मक पृष्ठभूमि और राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बताया है।

ये सभी बातें दीपक अग्रवाल की ओर से पार्टी हाईकमान को भेजे गए पत्र में किए गए दावों पर आधारित हैं।

2014 में भाजपा की सक्रिय राजनीति में प्रवेश, 2017 में नहीं मिला टिकट

दीपक अग्रवाल ने पत्र में बताया है कि उन्होंने वर्ष 2014 में भाजपा की सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था। उनके अनुसार, 2017 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दौरान पार्टी के निर्देश पर उन्होंने पूरी विधानसभा और नगरीय क्षेत्र में जनसंपर्क तथा संगठनात्मक गतिविधियां कीं।

उन्होंने दावा किया है कि पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक छवि के कारण उन्हें जनसमर्थन मिला और जनमानस उनके समर्थन में एकजुट था। हालांकि, उनके मुताबिक, उस समय उन्हें टिकट नहीं मिला। उन्होंने लिखा है कि टिकट न मिलने के निर्देश के बावजूद उन्होंने पार्टी के फैसले का विरोध नहीं किया और भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को पूरी निष्ठा तथा लगन से चुनाव लड़ाने में योगदान दिया।

दीपक अग्रवाल ने इस प्रसंग को अपनी अनुशासित कार्यकर्ता की छवि से जोड़ते हुए बताया है कि टिकट नहीं मिलने के बाद भी उन्होंने संगठन के फैसले को प्राथमिकता दी।

2022 में भी टिकट नहीं मिला, अधिकृत प्रत्याशी के लिए काम करने का दावा

दीपक अग्रवाल ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव का भी पत्र में उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि स्थानीय जातीय समीकरणों और संगठन की बाध्यताओं के कारण उन्हें चुनावी मैदान से पीछे रहने का निर्देश मिला था। उनके अनुसार, उन्होंने एक अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में इस निर्देश का पालन किया और पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को दोबारा जीत दिलाने के लिए काम किया।

इस तरह दीपक अग्रवाल ने 2017 और 2022 दोनों चुनावों के संदर्भ में यह संदेश देने की कोशिश की है कि टिकट न मिलने के बावजूद उन्होंने पार्टी से अलग रास्ता नहीं अपनाया। अब 2027 के चुनाव से पहले वह अपनी दावेदारी को संगठन के प्रति लंबे समर्पण और पिछले अनुभवों के आधार पर आगे बढ़ा रहे हैं।

पीलीभीत में सामाजिक और जातीय समीकरणों का भी किया जिक्र

दीपक अग्रवाल ने अपने पत्र में पीलीभीत की सामाजिक संरचना और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को भी अपनी दावेदारी का आधार बनाया है। उन्होंने लिखा है कि वर्तमान में जिले के चारों विधायक और जिलाध्यक्ष पिछड़ी जाति से प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही उन्होंने पीलीभीत में सवर्ण समाज की ऐतिहासिक राजनीतिक भूमिका का जिक्र किया है।

पत्र में दीपक अग्रवाल ने कहा है कि पीलीभीत में सवर्ण समाज भाजपा का एक मजबूत आधार रहा है। उन्होंने पूर्व में डॉ. विनोद तिवारी और स्वर्गीय बी.के. गुप्ता जैसे नेताओं के प्रतिनिधित्व का उल्लेख करते हुए कहा है कि वर्तमान में क्षेत्र के सवर्ण समाज के बीच सकारात्मक संतुलन और प्रतिनिधित्व की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

उनका दावा है कि ऐसे संतुलन से पार्टी की ऐतिहासिक विजय का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। यह दीपक अग्रवाल की ओर से हाईकमान के सामने रखे गए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों से संबंधित तर्क हैं।

संजय सिंह गंगवार के सामने टिकट की चुनौती या पार्टी का भरोसा?

पीलीभीत सदर विधानसभा सीट से भाजपा के मौजूदा विधायक संजय सिंह गंगवार हैं, जो उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री भी हैं। वह 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर चुके हैं। ऐसे में 2027 के लिए टिकट का फैसला भाजपा के लिए महत्वपूर्ण होगा।

दीपक अग्रवाल की दावेदारी सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा मौजूदा विधायक को तीसरी बार मौका देगी या किसी दूसरे चेहरे पर विचार करेगी। दीपक अग्रवाल ने अपनी पुरानी संगठनात्मक पृष्ठभूमि, परिवार के योगदान, आंदोलनों में भागीदारी और टिकट न मिलने के बावजूद पार्टी के लिए काम करने को अपनी दावेदारी का आधार बनाया है।

हालांकि, केवल किसी नेता की ओर से टिकट मांगने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मौजूदा विधायक का टिकट कटने वाला है। भाजपा ने अभी पीलीभीत सदर सीट के लिए 2027 के उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

क्या दीपक अग्रवाल की दावेदारी से भाजपा में बदलेगा टिकट का समीकरण?

दीपक अग्रवाल ने अपने पत्र के जरिए पार्टी नेतृत्व को यह बताने की कोशिश की है कि वह लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव को अपने लिए महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं। उन्होंने अपने परिवार की तीन पीढ़ियों के योगदान, RSS और विश्व हिंदू परिषद में जिम्मेदारियों तथा पिछले चुनावों में पार्टी के फैसले का पालन करने का हवाला दिया है।

अब देखना होगा कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पीलीभीत सदर सीट पर उम्मीदवार चयन के दौरान दीपक अग्रवाल की दावेदारी को किस तरह देखता है। क्या संजय सिंह गंगवार पर भरोसा बरकरार रहेगा, या पार्टी किसी नए चेहरे को मौका देने पर विचार करेगी? फिलहाल यह राजनीतिक चर्चा का विषय है, अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को ही करना है।