UP Election 2027: बदायूं जिले की बिसौली विधानसभा सीट से पूर्व भाजपा विधायक कुशाग्र सागर ने पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। आठ पन्नों के त्यागपत्र में उन्होंने पार्टी के भीतर उपेक्षा, अपमान और अपनी बात को अनसुना किए जाने के आरोप लगाए हैं। 2017 में भाजपा को बिसौली सीट पर जीत दिलाने वाले कुशाग्र सागर के इस फैसले से जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके समाजवादी पार्टी (सपा) में जाने की चर्चा भी चल रही है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुशाग्र सागर ने क्यों छोड़ी भाजपा?
समर्थकों के साथ बैठक के बाद लिया फैसला
बुधवार को बिसौली के एक बरातघर में कुशाग्र सागर ने अपने समर्थकों के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने भाजपा की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को संबोधित आठ पन्नों का लिखित त्यागपत्र दिया है।
अपने इस्तीफे में कुशाग्र सागर ने पार्टी में बिताए राजनीतिक सफर के साथ अपनी नाराजगी की वजहों का विस्तार से जिक्र किया है। उनके पत्र से साफ है कि उनकी शिकायत केवल टिकट या किसी पद को लेकर नहीं, बल्कि पार्टी संगठन में सम्मान और अपनी भूमिका को लेकर भी है।
पूर्व विधायक का कहना है कि वह राजनीति में धन कमाने या बड़े पद की महत्वाकांक्षा लेकर नहीं आए थे। उनका उद्देश्य सम्मान के साथ जनता की सेवा करना था, लेकिन लगातार उपेक्षा से उन्हें दुख पहुंचा। इसी वजह से उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया।
विधायक आशुतोष मौर्य को लेकर भी उठाए सवाल
राजनीतिक विरोधी को पार्टी में शामिल करने से नाराजगी
कुशाग्र सागर ने अपने इस्तीफे में आरोप लगाया कि भाजपा ने उनके राजनीतिक विरोधी विधायक आशुतोष मौर्य को अपने साथ मिला लिया, लेकिन इस बारे में उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने वर्तमान विधायक की पत्नी और बहन को भी पार्टी की सदस्यता दिलाए जाने का उल्लेख किया है।
पूर्व विधायक की नाराजगी का एक बड़ा कारण यही बताया गया है कि उनके अनुसार, उनके राजनीतिक विरोधियों को संगठन में जगह दी गई, जबकि उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला। उन्होंने इस घटनाक्रम को पार्टी में अपनी उपेक्षा से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।
हालांकि, ये आरोप कुशाग्र सागर ने अपने त्यागपत्र में लगाए हैं। इस मामले में संबंधित नेताओं या भाजपा संगठन का पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य पर लगाए आरोप
कार्यक्रमों की जानकारी नहीं देने और अपमानित करने का दावा
कुशाग्र सागर ने अपने इस्तीफे में तत्कालीन क्षेत्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में होने वाले पार्टी कार्यक्रमों की जानकारी नहीं दी जाती थी।
पूर्व विधायक ने राजनीतिक मंचों पर अपमानित किए जाने का आरोप भी लगाया है। उनके मुताबिक, उन्होंने प्रदेश स्तर पर अपनी शिकायतों से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अवगत कराया था, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।
कुशाग्र सागर का आरोप है कि लगातार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी उपेक्षा और असंतोष ने पार्टी से दूरी बढ़ा दी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
2017 में करीब 24 साल बाद भाजपा ने जीती थी बिसौली सीट
एक लाख से ज्यादा वोट मिलने का किया जिक्र
अपने आठ पन्नों के इस्तीफे में कुशाग्र सागर ने 2017 के विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि भाजपा ने करीब 24 साल बाद बिसौली विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। उन्होंने दावा किया कि उस चुनाव में उन्हें एक लाख से अधिक वोट मिले थे।
कुशाग्र सागर ने 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी संगठन के लिए सक्रिय रहने की बात कही है। उनके अनुसार, चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने पार्टी से दूरी नहीं बनाई और संगठन के काम में जुटे रहे।
उन्होंने लोकसभा चुनावों के दौरान प्रचार करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और पार्टी का जनाधार बढ़ाने में योगदान देने का भी जिक्र किया है। इस्तीफे में इन बातों के जरिए उन्होंने यह बताने की कोशिश की है कि चुनावी हार के बाद भी वह पार्टी के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।
क्या समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे कुशाग्र सागर?
अगले राजनीतिक कदम पर टिकी नजरें
भाजपा से इस्तीफे के बाद कुशाग्र सागर के अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यदि वह सपा में शामिल होते हैं, तो बदायूं जिले की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वह किसी दूसरी पार्टी में जाएंगे या आगे की राजनीति को लेकर कोई अलग फैसला करेंगे।
कुशाग्र सागर के इस्तीफे ने भाजपा के स्थानीय संगठन में उनके असंतोष और पार्टी के भीतर सम्मान को लेकर उठ रहे सवालों को चर्चा में ला दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा नेतृत्व उनकी शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया देता है या नहीं और पूर्व विधायक अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या फैसला लेते हैं।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).