3

Recent News

Pilibhit SIR: वोटर लिस्ट गड़बड़ी के 3 आरोपियों को बचाने के लिए Form-8 का खेल? कांग्रेस के कुमुद गंगवार का चौंकाने वाला दावा..
Abhishek Sharma Record: सिर्फ 27 रन की पारी में रचा इतिहास, रोहित शर्मा को पछाड़कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड!

Abhishek Sharma Record: अभिषेक शर्मा न्यूजीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च टी20 मुकाबले में बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन अपनी छोटी…

Punjab Brutal Murder: घर में घुसकर युवक की हत्या, हाथ काटकर लिफाफे में रखा, फिर दुकानदार को थमाया..

Punjab Brutal Murder: पंजाब के लुधियाना में बदमाशों ने घर में घुसकर शक्ति नाम के युवक पर तेजधार हथियारों से…

Delhi News: दिल्ली के सरकारी स्कूल में 12वीं की छात्रा की मौत, जली हुई हालत में मिली; 3 पन्नों का नोट में लिखा दर्द?

Delhi News: दिल्ली के शाहदरा जिले के कृष्णा नगर स्थित एक सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा की 17 वर्षीय छात्रा…

UP MLC Election 2026: 20 शहरों में हंगामा, सपा प्रत्याशी फूट-फूटकर रोए; बोले- जामा मस्जिद जाकर इस्लाम कबूल कर लूंगा!
3

Recent News

Abhishek Sharma Record: अभिषेक शर्मा न्यूजीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च टी20 मुकाबले में बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन अपनी छोटी…

Punjab Brutal Murder: पंजाब के लुधियाना में बदमाशों ने घर में घुसकर शक्ति नाम के युवक पर तेजधार हथियारों से…

Delhi News: दिल्ली के शाहदरा जिले के कृष्णा नगर स्थित एक सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा की 17 वर्षीय छात्रा…

Breaking News

Pilibhit SIR: वोटर लिस्ट गड़बड़ी के 3 आरोपियों को बचाने के लिए Form-8 का खेल? कांग्रेस के कुमुद गंगवार का चौंकाने वाला दावा..

Pilibhit SIR: वोटर लिस्ट गड़बड़ी के 3 आरोपियों को बचाने के लिए Form-8 का खेल? कांग्रेस के कुमुद गंगवार का चौंकाने वाला दावा..

Pilibhit SIR: पीलीभीत में मतदाता सूची में नाम बदलने के विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। तीन लोगों के खिलाफ FIR होने के बाद कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि जिन मतदाताओं के नाम कथित तौर पर बदले गए थे, उनसे अब Form-8 पर हस्ताक्षर और पहचान पत्र लिए जा रहे हैं। नेता का दावा है कि ऐसा करके पुराने बदलावों को गलती बताने के लिए रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है। यह आरोप 24 अक्टूबर को मतदेय स्थलों पर विशेष अभियान से जुड़े प्रेस नोट के बाद उठाया गया है।

पीलीभीत में SIR विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर विवाद शुरू हुआ था। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाए गए कि कई मतदाताओं के रिकॉर्ड में बदलाव किया गया, कुछ लोगों के नाम हटाए गए और कुछ ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए जो संबंधित क्षेत्र के निवासी नहीं थे।

कांग्रेस की ओर से पहले 13,150 रिकॉर्ड में बदलाव, 884 नाम हटाए जाने और 2,600 गैर-निवासियों के नाम जोड़े जाने के आंकड़े सामने रखे गए थे। ये आंकड़े कांग्रेस के दावों से जुड़े हैं। इन्हें जांच में प्रमाणित निष्कर्ष के तौर पर नहीं, बल्कि लगाए गए आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

इस विवाद में एक अहम सवाल यह था कि जिन मतदाताओं के नाम या दूसरी जानकारी बदली गई, क्या उनके लिए नियमानुसार आवेदन किया गया था? क्या संबंधित फॉर्म और रिकॉर्ड प्रशासन के पास मौजूद थे? इसी सवाल ने मामले को गंभीर बना दिया।

DM की कार्रवाई के बाद दो SDM समेत तीन लोगों पर FIR

विवाद के बीच जिलाधिकारी अलोक कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जांच और कार्रवाई का मामला सामने आया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दो SDM मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी तथा एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

यानी मामला केवल मतदाता सूची में गलत नाम दर्ज होने की शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सवाल भी उठने लगा कि मतदाताओं के रिकॉर्ड में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किए गए और इसके लिए जरूरी दस्तावेज मौजूद थे या नहीं।

अब इसी मामले में कांग्रेस नेता ने नया आरोप लगाते हुए कहा है कि FIR के बाद भी कुछ ऐसा किया जा रहा है, जिससे पुराने बदलावों को सही ठहराने की कोशिश हो सकती है।

24 अक्टूबर के प्रेस नोट में क्या था?

24 अक्टूबर को मतदेय स्थलों पर विशेष अभियान को लेकर एक प्रेस नोट जारी किया गया था। इसी प्रेस नोट को लेकर कांग्रेस नेता ने सवाल उठाए हैं।

प्रेस नोट का संदर्भ इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि नेता का आरोप है कि विशेष अभियान के दौरान Form-8 के जरिए उन मतदाताओं से दस्तखत और पहचान पत्र लिए जा रहे हैं, जिनके नाम पहले कथित तौर पर बदले गए थे।

हालांकि, प्रेस नोट जारी होने भर से किसी गड़बड़ी या साजिश की पुष्टि नहीं होती। यह समझने के लिए कि उस दिन कौन-से फॉर्म लेने के निर्देश थे और किन मतदाताओं के लिए यह प्रक्रिया निर्धारित थी, निर्वाचन आयोग की मूल गाइडलाइन और प्रेस नोट के निर्देशों का मिलान जरूरी है।

कांग्रेस नेता का आरोप- Form-8 के जरिए रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में दावा किया कि तहसील में ऐसे Form-8 तैयार किए गए, जिन पर तारीख नहीं डाली गई थी। उनके मुताबिक, इन फॉर्मों पर मतदाताओं का नाम और EPIC नंबर दर्ज करके लेखपाल के माध्यम से BLOs तक पहुंचाया गया।

EPIC नंबर वह पहचान संख्या होती है, जो मतदाता पहचान पत्र पर लिखी होती है। वहीं, BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर वह अधिकारी होता है, जो अपने क्षेत्र में मतदाता सूची से जुड़े काम संभालता है।

नेता का आरोप है कि BLOs से कहा गया कि इन फॉर्मों पर संबंधित मतदाताओं के हस्ताक्षर कराए जाएं, उनकी पहचान से जुड़े दस्तावेज लगाए जाएं और फिर फॉर्म वापस किए जाएं।

कांग्रेस नेता का दावा है कि जिन लोगों के नाम पहले कथित तौर पर बदले गए थे, उन्हीं से अब फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। हालांकि, कितने फॉर्म तैयार हुए, किन मतदाताओं से संपर्क किया गया और क्या वास्तव में ऐसे फॉर्मों पर हस्ताक्षर कराए गए, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

तीन आरोपियों को बचाने की साजिश का आरोप क्यों?

कांग्रेस नेता ने इस पूरी प्रक्रिया को तीन आरोपियों को बचाने की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि अगर अब इन मतदाताओं के हस्ताक्षर वाले Form-8 और पहचान पत्र इकट्ठा कर लिए जाते हैं, तो बाद में यह कहा जा सकता है कि नाम बदलने के लिए आवेदन मौजूद था और नाम में बदलाव गलती से हो गया।

यानी नेता का आरोप है कि पुराने बदलावों के लिए पहले से आवेदन मौजूद होने का रिकॉर्ड तैयार करने की कोशिश की जा रही है, ताकि जिम्मेदार लोगों पर लगे आरोप कमजोर पड़ सकें।

लेकिन यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह कांग्रेस नेता की आशंका और आरोप है। अभी उपलब्ध बयान के आधार पर यह साबित नहीं होता कि फॉर्म वास्तव में इसी उद्देश्य से तैयार किए गए या किसी अधिकारी ने तीन आरोपियों को बचाने के लिए ऐसा निर्देश दिया। इसकी पुष्टि के लिए फॉर्म की तारीख, रिकॉर्ड, संबंधित अधिकारियों के निर्देश और जांच से जुड़े दस्तावेज देखने होंगे।

निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का हवाला देकर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का भी हवाला दिया। उनका दावा है कि 24 अक्टूबर को जारी निर्देशों के अनुसार, उस दिन Form-6 लेने की बात थी। उनके मुताबिक, यह फॉर्म उन लोगों के लिए था, जो उस दिन 18 वर्ष की उम्र पूरी कर रहे थे।

नेता ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद प्रशासन Form-8 भी भरवा रहा था। उनका कहना है कि जब उन्होंने संबंधित अधिकारियों के सामने गाइडलाइन रखी, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

यहां Form-6 और Form-8 का अंतर समझना जरूरी है। सामान्य तौर पर Form-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है, जबकि Form-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज जानकारी में सुधार या निर्धारित अन्य बदलावों के लिए किया जाता है।

हालांकि, किसी विशेष दिन कौन-सा फॉर्म लिया जाना था, यह उस दिन के आधिकारिक निर्देशों पर निर्भर करेगा। इसलिए यह तय करने के लिए कि Form-8 लेना नियमों के खिलाफ था या नहीं, संबंधित गाइडलाइन की पूरी प्रति देखना जरूरी है।

अमरिया के तहसीलदार से बातचीत का भी जिक्र

कांग्रेस नेता ने बताया कि इस मामले में उनकी बातचीत अमरिया के तहसीलदार से हुई थी। उनके मुताबिक, जब उन्होंने तहसीलदार को निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन दिखाई और Form-8 लिए जाने पर सवाल किया, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। नेता का दावा है कि इसके बाद तहसीलदार अपना कागज उठाकर वहां से चले गए।

यह घटनाक्रम भी फिलहाल कांग्रेस नेता के बयान पर आधारित है। इस बारे में अमरिया के तहसीलदार का पक्ष सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

मझोला के नेहरू इंटर कॉलेज के बूथों का मामला

अपने बयान में कांग्रेस नेता ने मझोला के नेहरू इंटर कॉलेज में गुलड़िया भंडारा से जुड़े बूथों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह वहां मौजूद थे और चार-पांच बूथों का जिक्र किया।

बयान में बूथ नंबरों का हिस्सा स्पष्ट नहीं है, इसलिए उनकी पुष्टि किए बिना निश्चित बूथ संख्या लिखना उचित नहीं होगा। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित तौर पर फॉर्म किन-किन बूथों के मतदाताओं के लिए तैयार किए गए और संबंधित BLOs तक कितने फॉर्म पहुंचाए गए।

FIR की वजह को लेकर कांग्रेस नेता ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में कहा कि FIR इसलिए हुई थी, क्योंकि प्रशासन के पास कथित तौर पर नाम बदलने से जुड़े ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन उपलब्ध नहीं थे। उनका आरोप है कि मतदाताओं से Form-8 लिए बिना और उनकी सहमति के बगैर नाम बदल दिए गए थे।

अपने आरोप को समझाने के लिए उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का नाम राम से श्याम या श्याम से किसी दूसरे नाम में बदल दिया गया। उनका कहना था कि कई मामलों में नाम इस तरह बदलने की शिकायतें सामने आई थीं।

हालांकि, FIR में दर्ज वास्तविक आरोप और जांच की स्थिति की पुष्टि संबंधित FIR और आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए। कांग्रेस नेता के बयान को FIR का आधिकारिक विवरण मानना सही नहीं होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल- फॉर्म कब तैयार हुए और किसके निर्देश पर?

इस पूरे विवाद में अब कुछ सवाल अहम हो गए हैं। क्या जिन मतदाताओं के नाम कथित तौर पर बदले गए, उनके लिए पहले कोई आवेदन मौजूद था? अगर Form-8 तैयार किए गए हैं, तो वे कब तैयार हुए और किसके निर्देश पर? क्या संबंधित फॉर्म पर दर्ज जानकारी और हस्ताक्षर मूल रिकॉर्ड से मेल खाते हैं? और क्या 24 अक्टूबर के विशेष अभियान के निर्देशों में उन फॉर्मों को लेने की अनुमति थी?

इन सवालों के जवाब के लिए मूल Form-8, उनकी तारीख, BLOs को दिए गए निर्देश, निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन और जांच से जुड़े दस्तावेजों का मिलान जरूरी है।

कांग्रेस नेता ने तीन आरोपियों को बचाने के लिए रिकॉर्ड तैयार करने का आरोप लगाया है, लेकिन इस दावे की पुष्टि अभी स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है। मामले में प्रशासन का पक्ष और संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि Form-8 की प्रक्रिया नियमित मतदाता-संशोधन का हिस्सा थी या इसमें किसी तरह की अनियमितता हुई।