Pilibhit Encounter: पंजाब में पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमला करने वाले तीन खालिस्तानी आतंकियों को पीलीभीत में मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया। यह घटना कई सवाल खड़े करती है, खासकर आतंकियों के स्थानीय कनेक्शन को लेकर। पुलिस ने इनकी गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है, जिसमें यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर ये आतंकी पीलीभीत में क्यों रुके और उनकी यहां से नेपाल भागने की योजना थी या नहीं।
कैसे हुआ एनकाउंटर?
पंजाब और यूपी पुलिस की संयुक्त टीम ने सोमवार सुबह पूरनपुर के माधोटांडा मार्ग पर खालिस्तानी आतंकियों से मुठभेड़ की। सुबह 5:30 बजे खमरिया पट्टी के पास तीन संदिग्ध बाइक सवारों को रोकने की कोशिश की गई। खुद को घिरा देख आतंकियों ने पुलिस पर गोलियां चलाईं। जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई।
एसपी पीलीभीत अविनाश पांडेय ने बताया कि मुठभेड़ में दो सिपाही भी घायल हुए हैं। आतंकियों से दो AK-47 राइफल, दो विदेशी पिस्टल और चोरी की बाइक बरामद हुई है।

घटनास्थल पर खून के निशान
घटनास्थल पर दूर तक खून के निशान पाए गए। पुलिस को शक है कि गोली लगने के बाद आतंकी बाइक छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे थे।
पंजाब से पीलीभीत तक का सफर
18 दिसंबर को आतंकियों ने पंजाब के बख्शीवाल पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमला किया था। इसके बाद ये आतंकी नेपाल भागने की योजना से पीलीभीत पहुंचे। हालांकि, उनकी गतिविधियों की सूचना पंजाब पुलिस को मिल चुकी थी। यूपी-पंजाब पुलिस ने मिलकर ऑपरेशन चलाया और आतंकियों का पीछा किया।
जंगी ऐप से करते थे संपर्क
आतंकी मोबाइल कॉल के बजाय जंगी ऐप का इस्तेमाल करते थे। यह ऐप भेजे गए संदेश और डाटा को 20 सेकंड में खुद ही डिलीट कर देता है।
स्थानीय कनेक्शन पर उठे सवाल
पंजाब में वारदात को अंजाम देने के बाद आतंकी पीलीभीत क्यों आए? क्या उनका यहां कोई मददगार था? सूत्रों के अनुसार, आतंकी पीलीभीत में दो दिनों से छिपे हुए थे। उनकी गतिविधियों और ठिकानों की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगा रही है कि चोरी की बाइक उन्हें किसने दी और वे नेपाल जाने के लिए किन रास्तों का इस्तेमाल करने वाले थे।
चोरी की बाइक का इस्तेमाल
आतंकियों के पास से जो बाइक बरामद हुई, वह रविवार शाम चोरी की गई थी। यह बाइक पूरनपुर के नाजिम की है, जो रेडीमेड कपड़े की दुकान चलाता है।
नेपाल भागने की फिराक
पीलीभीत से सटी नेपाल सीमा ने इसे आतंकियों के लिए छिपने की सुरक्षित जगह बना दिया है। पुलिस को शक है कि आतंकी नेपाल भागने की फिराक में थे। पीलीभीत के जंगल और नेपाल की खुली सीमा अपराधियों के लिए पनाहगाह बन गए हैं।
33 साल बाद फिर आतंकी घटनाओं का केंद्र बना पीलीभीत
1991 में भी पीलीभीत में खालिस्तानी आतंकियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन हुआ था, जिसमें 10 आतंकी मारे गए थे। दरअसल, पीलीभीत का घना जंगल और नेपाल सीमा इसे आतंकियों के लिए छिपने की आदर्श जगह बनाते हैं। पीलीभीत के घने जंगल छिपने के लिए आतंकवादियों को खूब भाते हैं। कोई भी बड़ी घटना करने के बाद आतंकवादी घने जंगलों के बीच बने घरों में छिप जाते थे। जिन तक पहुंचने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। इन घने जंगलों में नेटवर्क की समस्या के कारण छिपे हुए आतंकियों को ट्रैक करना भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहता है।
पुलिस का बयान और आगामी कार्रवाई
एडीजी रमित शर्मा ने बताया कि आतंकियों के स्थानीय कनेक्शन की गंभीरता से जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि वे यहां किसके संपर्क में थे और उनकी क्या योजनाएं थीं।
निष्कर्ष
खालिस्तानी आतंकियों का पीलीभीत में मारा जाना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता है। लेकिन, आतंकियों का यहां आना और स्थानीय मदद मिलने की संभावना चिंता का विषय है। यह घटना न केवल पुलिस की सतर्कता को बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित करती है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को भी सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर देती है।