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Sitapur: बड़ा एनकाउंटर, पत्रकार हत्याकांड के दोनों शूटर एनकाउंटर में ढेर

सीतापुर मुठभेड़ में ढेर हुए पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी हत्याकांड के दोनों शूटर, लेकिन परिजन बोले – हमें नहीं मिला न्याय

 रॉकेट पोस्ट लाइव | स्थान – सीतापुर, उत्तर प्रदेश

Sitapur: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में आठ मार्च को हुए पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी हत्याकांड की जड़ें अब धीरे-धीरे उखड़ती नजर आ रही हैं। गुरुवार सुबह पिसावां क्षेत्र में हुए एक एनकाउंटर में इस हत्याकांड से जुड़े दोनों वांछित शूटरों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। लेकिन जहां एक ओर पुलिस इसे बड़ी कामयाबी मान रही है, वहीं दूसरी ओर पत्रकार राघवेंद्र की पत्नी रश्मि बाजपेयी इस कार्रवाई से असंतुष्ट और आहत हैं। उनके अनुसार, ना तो उन्हें शूटरों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई, ना ही एनकाउंटर से पहले किसी प्रकार की सूचना मिली। उन्होंने साफ कहा – “हमें न्याय नहीं मिला है।”

Sitapur: पत्रकार की हत्या से दहला था सीतापुर

बीते 8 मार्च 2025 को सीतापुर के महोली निवासी पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह वारदात हेमपुर ओवरब्रिज पर अंजाम दी गई, जब दो बाइक सवार शूटरों ने पत्रकार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। घटना दोपहर तीन बजे के आसपास हुई और इस निर्मम हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई थी।

Sitapur: खुलासा हुआ, पर दो शूटर थे फरार

पुलिस ने घटना के 34 दिन बाद हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए कारेदेव बाबा मंदिर के पुजारी और उनके दो साथियों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश इन्हीं के द्वारा रची गई थी। वहीं इस हत्या को अंजाम देने वाले दो शूटर संजय तिवारी और राजू तिवारी तब से फरार चल रहे थे। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इनकी तलाश में क्राइम ब्रांच की तीन टीमें और एसटीएफ की सात टीमें लगातार काम कर रही थीं।

पिसावां में हुई मुठभेड़ – दोनों शूटर मारे गए

गुरुवार सुबह, सीतापुर के पिसावां-महोली मार्ग पर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम कॉम्बिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक पर सवार दो संदिग्ध युवक आते दिखाई दिए। पुलिस ने जब उन्हें रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई। मुठभेड़ में दोनों शूटर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया

Sitapur: दोनों की हुई पहचान, आपराधिक इतिहास भी खुला

एसपी अंकुर अग्रवाल के अनुसार, मारे गए दोनों बदमाशों की पहचान संजय तिवारी उर्फ अकील खान और राजू तिवारी उर्फ रिजवान के रूप में हुई है। दोनों ही सीतापुर जिले के मिश्रित के अटवा गांव के निवासी थे। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इन दोनों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास और अन्य गंभीर अपराधों के कई मामले दर्ज थे।

पुलिस मुठभेड़ पर राघवेंद्र की पत्नी की प्रतिक्रिया

जहां एक ओर पुलिस इसे बड़ी सफलता बता रही है, वहीं राघवेंद्र की पत्नी रश्मि बाजपेयी इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मीडिया से कहा –

“हमने पहले ही कहा था कि जब तक शूटर पकड़े ना जाएं, हम अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। फिर भी, जब हमने समझाया तो अंतिम संस्कार किया। अब पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया, लेकिन हमें कोई जानकारी नहीं दी। ना तो हमें पकड़े जाने की खबर मिली, ना ही उनके सामने लाया गया। हम संतुष्ट नहीं हैं। यह न्याय नहीं है।”

क्या यह एनकाउंटर सच्चाई है या पर्दा?

राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या के बाद समाज और पत्रकारिता जगत में गहरा आक्रोश था। ऐसे में शूटरों की मौत को एक बड़ी कामयाबी बताने वाली पुलिस पर अब विश्वसनीयता का सवाल भी उठने लगा है। रश्मि बाजपेयी का सवाल करना इस बात की ओर इशारा करता है कि कहीं ये एनकाउंटर मात्र “फाइल बंद करने की जल्दबाजी” तो नहीं?

पत्रकार संगठनों ने की न्यायिक जांच की मांग

घटना के बाद कई पत्रकार संगठनों और सिविल सोसाइटी ने इस मुठभेड़ की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पत्रकार की हत्या जैसे संगीन मामले में, यदि एनकाउंटर जैसी कार्रवाई हो रही है, तो उसके हर पहलू को पारदर्शी और जनसामान्य के विश्वास के साथ सामने लाया जाना चाहिए।

क्या अब बंद हो जाएगा राघवेंद्र हत्याकांड का अध्याय?

पुलिस की माने तो हत्याकांड से जुड़े सभी आरोपी अब या तो गिरफ्तार हो चुके हैं, या एनकाउंटर में मारे गए हैं। लेकिन पीड़ित परिवार की असंतुष्टि और उठते सवाल बताते हैं कि इस केस की फाइल भले बंद हो जाए, पर जख्म अब भी ताजे हैं।

पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या का मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि व्यवस्था पर एक गहरा सवाल है। यदि अपराधियों को सजा देने का तरीका केवल मुठभेड़ है, तो न्याय व्यवस्था की जरूरत क्या है? वहीं, यदि ये मुठभेड़ असली है, तो क्या पीड़ित परिवार को इसकी पूरी जानकारी नहीं मिलनी चाहिए थी? इस पूरे प्रकरण ने पत्रकार सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।

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