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“शारदीय नवरात्र 2023” – “पंडित नीरज शर्मा” से जानिए “शुभ मुहूर्त” – हाथी” पर सवार होकर आईं “माता रानी”

रिपोर्ट – सर्वेश शर्मा – कानपुर नगर  
 
Kanpur News – हिन्दू धर्म में  शुभ नवरात्रि का पर्व पूरे भारत में बेहद खास माना जाता है| नवरात्रि के शुभ इन नौ दिनों में माता के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 15 अक्टूबर 2023 से शुरू होने जा रहे हैं, जो आने वाली 24 अक्टूबर 2023 को समाप्त होंगे। आपको बताते चलें कि हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार नवरात्र अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होंगे। कुछ इसी विषय हम चलते हैं पंडित नीरज शर्मा जी साथ और जानते हैं इस नवरात्र में शुभ मुहूर्त और पूजा अर्चना की ख़ास विधि, जो हम पर माता रानी की कृपा बनाए रखेगी।   
 
जानिए शारदीय नवरात्रि का शुभ मुहूर्त
 
आज शारदीय नवरात्रि का पहला दिन है। नवरात्रि की अष्टमी 22 अक्टूबर को और नवमी 23 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस नौ दिन के उत्सव का समापन 24 अक्टूबर यानी दशहरे के दिन होगा। शारदीय नवरात्रि सबसे बड़ी नवरात्रि की मानी जाती है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है जिसका एक मुहूर्त होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह की प्रतिपदा तिथि 14 अक्टूबर को रात 11 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी और प्रतिपदा तिथि का समापन 15 अक्टूबर को रात 12 बजकर 32 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार शारदीय नवरात्रि इस बार 15 अक्टूबर को ही मनाई जा रही है। 
 
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
 
ज्योतिषाचार्य पंडित नीरज शर्मा के अनुसार शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को यानी पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 15 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। ऐसे में कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त इस साल 48 मिनट ही रहेगा। घटस्थापना का अभिजीत मुहूर्त* सुबह 11:48 मिनट से दोपहर 12:36 मिनट तक ही रहेगा। आपको बता दें कि इस वर्ष मां हाथी पर सवार होकर आ रही हैं ऐसे में इस बात के प्रबल संकेत मिल रहे हैं कि इससे सर्वत्र सुख संपन्नता बढ़ेगी। इसके साथ ही देश भर में शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों में सफलता मिलेगी| यानी कि पूरे देश के लिए यह नवरात्रि शुभ साबित होने वाली है। 
 
कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
 
सप्तधान्य (7 तरह के अनाज), मिट्टी का एक बर्तन, मिट्टी, कलश, गंगाजल (उपलब्ध न हो तो सादा जल), पत्ते (आम या अशोक के), सुपारी, जटा वाला नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, पुष्प ही पूजा की पूर्ण सामग्री होगी। 
 
घटस्थापना की विधि
 
नवरात्रि के पहले दिन व्रती द्वारा व्रत का संकल्प लिया जाता है।  इस दिन लोग अपने सामर्थ्य अनुसार 2, 3 या पूरे 9 दिन का उपवास रखने का संकल्प लेते हैं। संकल्प लेने के बाद मिट्टी की वेदी में जौ बोया जाता है और इस वेदी को कलश पर स्थापित किया जाता है। हिन्दू धर्म में किसी भी मांगलिक काम से पहले भगवान गणेश की पूजा का विधान बताया गया है और कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता है। इसलिए इस परंपरा का निर्वाह किया जाता है। कलश को गंगाजल से साफ की गई जगह पर रख दें। इसके बाद देवी-देवताओं का आवाहन करें. कलश में सात तरह के अनाज, कुछ सिक्के और मिट्टी भी रखकर कलश को पांच तरह के पत्तों से सजा लें। स कलश पर कुल देवी की तस्वीर स्थापित करें| दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इस दौरान अखंड ज्योति अवश्य प्रज्वलित करें। अंत में देवी मां की आरती करें और प्रसाद को सभी लोगों में बांट दें। माता रानी आप पर कृपा बनाए रखेंगी। 
 
“जय माता दी” 
ज्योतिषाचार्य पंडित नीरज शर्मा