अक्सर कहा जाता है कि “छोटा आदमी शिकायत करे तो कौन सुनता है?”
लेकिन यूपी के सीतापुर में एक जोड़ी चप्पल ने यह कहावत ही उलट दी।
₹1700 की चप्पल टूटी, ग्राहक फोरम पहुंचा, और नतीजा ये कि अब लिबर्टी शोरूम के मैनेजर पर गैर-जमानती वारंट जारी हो गया।
यह खबर हल्की मुस्कान भी देती है और एक बड़ा भरोसा भी।
₹1700 की चप्पल, 6 महीने की वारंटी और 1 महीने की सच्चाई
मामला 2022 का है। आरिफ नाम के ग्राहक ने लिबर्टी शोरूम से चप्पल खरीदी।
शोरूम मैनेजर ने बड़े आत्मविश्वास से कहा — “छह महीने की वारंटी है साहब!”
लेकिन चप्पल ने सिर्फ एक महीने में ही जवाब दे दिया।
शिकायत की तो टालमटोल, चप्पल रख ली… पर समाधान गायब
जब ग्राहक शिकायत करने शोरूम पहुंचा, पहले कहा गया “देखते हैं”, फिर चप्पल रख ली गई,
लेकिन नई चप्पल देने की हिम्मत किसी में नहीं हुई।
शायद सोचा गया — “₹1700 के लिए कौन कोर्ट जाएगा?”
जब आम आदमी कोर्ट गया, तो कानून खड़ा मिला
आरिफ ने हार नहीं मानी और उपभोक्ता फोरम का दरवाज़ा खटखटाया।
नोटिस गए, तारीखें पड़ीं —
लेकिन शोरूम मैनेजर साहब ने सोचा होगा,
“कोर्ट-वोर्ट कुछ नहीं करता।”
फोरम का आदेश: पैसा दो, इज्जत भी रखो
जनवरी 2024 में फोरम ने साफ आदेश दिया —
-
चप्पल की कीमत लौटाओ
-
मानसिक प्रताड़ना के ₹2500
-
मुकदमे का खर्च ₹5000
यानि कुल मिलाकर कानून ने कहा — ग्राहक को हल्के में मत लो।
आदेश भी नहीं माना, अब पुलिस बुला रही है
जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो फोरम ने अगला कदम उठाया —
👉 गैर-जमानती वारंट
👉 पुलिस अधीक्षक को सीधा निर्देश
👉 2 जनवरी 2026 तक गिरफ्तारी हर हाल में
अब मामला चप्पल का नहीं, कानून की अवहेलना का हो गया है।
व्यंग्य भी, संदेश भी
यह खबर हंसाती है, लेकिन सिखाती भी है —
-
अगर आम आदमी हिम्मत करे
-
अगर सिस्टम ईमानदारी से चले
-
तो ₹1700 की चप्पल भी इंसाफ दिला सकती है
सिस्टम काम करे तो कानून आम आदमी के साथ है
यह मामला बताता है कि
भारत का कानून सिर्फ बड़ी कंपनियों या रसूखदारों के लिए नहीं,
बल्कि उस ग्राहक के लिए भी है जो टूटी चप्पल लेकर खड़ा है।