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अमरोहा: ट्रेन से टकराकर तेंदुए की मौत, सिस्टम और वन्यजीव सुरक्षा पर बड़ा सवाल

अमरोहा में ट्रेन से टकराकर तेंदुए की दर्दनाक मौत, इलाके में दहशत का अंत लेकिन सिस्टम और वन्यजीव सुरक्षा पर बड़ा सवाल।

अमरोहा में खौफनाक दहशत का अंत — ट्रेन से कटकर तेंदुए की दर्दनाक मौत

अमरोहा जिले में बीते कई दिनों से खौफ, डर और दहशत का पर्याय बने आदमखोर तेंदुए का आखिरकार  अंत हो गया। गजरौला थाना क्षेत्र में देर रात एक तेज रफ्तार एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से तेंदुए की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह वही तेंदुआ बताया जा रहा है, जिसकी मौजूदगी से पूरा इलाका सहमा हुआ था और ग्रामीण रात में घर से निकलने से डर रहे थे

घटना के सामने आते ही इलाके में हड़कंप मच गया। रेलवे ट्रैक के आसपास सुबह-सुबह जब ग्रामीणों की नजर पटरियों के बीच पड़े तेंदुए के  शव पर पड़ी, तो पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई।

पटरियों पर बिखरा जंगल का खौफ, गर्दन मुड़ी, शरीर छलनी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेंदुए का शव रेलवे ट्रैक के बीच पड़ा हुआ था। गर्दन टेढ़ी, शरीर पर गंभीर चोटों के निशान और साफ संकेत थे कि टक्कर बेहद भीषण रही होगी। माना जा रहा है कि देर रात अंधेरे में तेंदुआ जंगल या गन्ने के खेतों से निकलकर रेलवे ट्रैक पार कर रहा था, तभी तेज रफ्तार एक्सप्रेस ट्रेन से उसकी सीधी भिड़ंत होना माना जा रहा है ।

सूचना मिलते ही वन विभाग मौके पर, शव कब्जे मेंलेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा 

जैसे ही घटना की जानकारी मिली, वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने  भीड़ को हटाया और तेंदुए के शव को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जा सके।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि मौत केवल ट्रेन की टक्कर से हुई या कोई अन्य कारण रहा।

काफी समय से बना हुआ था खतरा, लोगों की नींद उड़ चुकी थी

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह तेंदुआ काफी समय से क्षेत्र में घूम रहा था। कई बार इसे गन्ने के खेतों, गांव की पगडंडियों और आबादी के पास देखा गया था। इसकी वजह से लोगों में भारी दहशत थी।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते थे। खेतों पर जाना मुश्किल हो गया था और पशुओं को बाहर निकालने में भी डर लगता था। कई बार इसकी सूचना वन विभाग को दी गई, तेंदुआ लगातार इलाके में दिखाई देता रहा।

मौत के बाद राहत की सांस, लेकिन सवाल भी खड़े

तेंदुए की मौत की खबर मिलते ही क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस जरूर ली, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि अब खतरा टल गया है। लेकिन इस राहत के साथ-साथ कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वन्यजीव आबादी के इतने करीब क्यों पहुंच रहे हैं? क्या जंगलों में उनके लिए पर्याप्त भोजन और सुरक्षित इलाका नहीं बचा? और क्या रेलवे ट्रैक जैसे खतरनाक इलाकों पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम हैं?

इस साल की कई घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

यह घटना कोई पहली नहीं है। अमरोहा और आसपास के जिलों में बीते महीनों में तेंदुओं की मौत की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कभी सड़क हादसों में, तो कभी ट्रेन की चपेट में आकर वन्यजीव दम तोड़ चुके हैं

लगातार हो रही ऐसी घटनाएं मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर पेश करती हैं। जंगल सिमटते जा रहे हैं, खेत और रेलवे लाइनें फैलती जा रही हैं और इसी टकराव की कीमत जंगल के बेजुबान शिकारी अपनी जान देकर चुका रहे हैं।

जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

फिलहाल वन विभाग द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी और विभागीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं प्रशासन के स्तर पर भी यह मंथन शुरू हो गया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जाए

यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर चेतावनी दे गया है कि अगर वन्यजीवों की आवाजाही वाले इलाकों में ठोस सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो ऐसे दृश्य बार-बार सामने आते रहेंगे।

दहशत खत्म, लेकिन सिस्टम पर बड़ा सवाल

अमरोहा में तेंदुए की मौत से भले ही इलाके की दहशत खत्म हो गई हो, लेकिन यह घटना व्यवस्था की एक बड़ी चूक को भी उजागर करती है। एक ओर इंसान अपनी सुरक्षा चाहता है, तो दूसरी ओर प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी भी उसी के कंधों पर है।

अब जरूरत है कि प्रशासन और वन विभाग मिलकर ऐसे ठोस कदम उठाएं, जिससे न इंसानों की जान जाए और न ही जंगल के बेजुबान शिकारी इस तरह पटरियों पर कटकर दम तोड़ने को मजबूर हों