पुलिस के लोगो वाली कार में गांजे का खेल, जहानाबाद पुलिस ने सरगना समेत चार को दबोचा
पीलीभीत। पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए गाड़ी पर पुलिस का लोगो लगाया, अंदर पुलिस का डंडा रखा और अलग-अलग जिलों में अलग गाड़ियों व मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया। लेकिन जहानाबाद पुलिस की नजर से यह खेल बच नहीं सका। रिछा तिराहे के पास पुलिस ने अंतरजनपदीय गांजा तस्करी गिरोह के सरगना समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 01 किलो 03 ग्राम गांजा, 380 ग्राम चरस, 200 कागजी चिलम, 30 मिट्टी की चिलम, 480 बंडल बीड़ी, 500 रैपर, गांजे में इस्तेमाल होने वाली सिगरेट के 50 डिब्बे और एक काले रंग की किया सेल्टोस कार बरामद हुई है।
मुखबिर की सूचना पर रात में हुई कार्रवाई
थाना जहानाबाद पुलिस को 24 सितंबर की रात सूचना मिली थी कि रिछा तिराहे से अमरिया रोड की ओर गांजा तस्करी से जुड़े लोग मौजूद हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने रात करीब 10 बजे ओमप्रकाश के मकान के बाहर खड़ी काले रंग की किया सेल्टोस कार को रोक लिया।
पुलिस के मुताबिक कार में चार लोग मौजूद थे। तलाशी लेने पर गांजा और चरस समेत नशे की बिक्री में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद हुआ।
कार पर पुलिस का लोगो, अंदर मिला डंडा
मामले में सबसे हैरान कर देने वाली बात यह सामने आई कि आरोपियों की कार पर पुलिस का लोगो लगा हुआ था। पुलिस के अनुसार कार के अंदर पुलिस का डंडा भी मिला।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए कार पर पुलिस का लोगो लगाया गया था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस तरीके का इस्तेमाल गिरोह ने और कहां-कहां किया।
नानपारा से कई जिलों तक फैला नेटवर्क
पुलिस पूछताछ के अनुसार गिरोह का संचालन नानपारा, बहराइच से होता था। आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि नेपाल और सीमावर्ती जिलों से गांजा मंगाकर उसे अलग-अलग जिलों में पहुंचाया जाता था।
पुलिस के मुताबिक गिरोह का नेटवर्क बाराबंकी, लखनऊ, शाहजहांपुर, बरेली और पीलीभीत तक फैला होने की जानकारी मिली है।
पुलिस का कहना है कि सरकारी भांग के ठेकों की आड़ में भी अवैध गांजा बेचने की जानकारी सामने आई है। इस संबंध में पुलिस आगे जांच कर रही है।
60 और 120 रुपये में बिकती थी पुड़िया
पूछताछ में पुलिस के अनुसार गांजे को छोटी और बड़ी पुड़िया में बेचा जाता था। छोटी पुड़िया की कीमत करीब 60 रुपये और बड़ी पुड़िया की कीमत करीब 120 रुपये बताई गई है।
पुलिस के मुताबिक एक छोटी पुड़िया में करीब दो ग्राम गांजा रखा जाता था।
सस्ते में खरीदकर महंगे दाम में बेचते थे
पुलिस के अनुसार गिरोह खुले गांजे को करीब 10 से 15 हजार रुपये किलो में खरीदता था। इसके बाद उसमें सिगरेट की तंबाकू और अन्य केमिकल मिलाकर नशीला बनाकर महंगे दामों में बेचने की बात पूछताछ में सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक एक जनपद से गिरोह की कथित कमाई हर महीने करीब 5 से 7 लाख रुपये तक थी।
अब पुलिस इस अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों की भी जांच करेगी।
मोबाइल बंद कर करते थे सफर
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते थे। अलग जिलों में अलग गाड़ियों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस का कहना है कि गिरोह के सदस्य ज्यादातर बातचीत व्हाट्सऐप कॉलिंग से करते थे। माल लेकर निकलने के बाद मोबाइल बंद कर देते थे और मंजिल पर पहुंचने के बाद मोबाइल चालू करते थे।
पीलीभीत में सत्येंद्र संभालता था नेटवर्क
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार सत्येंद्र चौधरी निवासी नानपारा, बहराइच पीलीभीत में गांजे के अवैध कारोबार को संभालता था। घटना में इस्तेमाल किया गया सेल्टोस वाहन भी उसी का बताया गया है।
पूछताछ में सत्येंद्र के चाचा विनय चौधरी के कारोबार को देखने की बात भी सामने आने का दावा पुलिस ने किया है।
वहीं यशवंत और हरिओम के गिरोह से जुड़े होने की जानकारी मिली है। दोनों की तलाश की जा रही है।
चार गिरफ्तार, तीन की तलाश जारी
पुलिस ने मामले में सत्येंद्र चौधरी, मुकेश कुमार, ओमप्रकाश और विजय कुमार को गिरफ्तार किया है।
इनमें सत्येंद्र चौधरी नानपारा बहराइच, मुकेश कुमार और ओमप्रकाश रिछा तिराहा थाना जहानाबाद तथा विजय कुमार लिखा खास थाना गजरौला, पीलीभीत का निवासी बताया गया है।
वहीं विजय चौधरी निवासी नानपारा, हरिओम वर्मा निवासी पीलीभीत और यशवंत निवासी नानपारा की तलाश की जा रही है।
सरगना पर पहले भी दर्ज है मुकदमा
पुलिस के अनुसार सत्येंद्र चौधरी के खिलाफ थाना सुनगढ़ी, पीलीभीत में वर्ष 2020 में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
वर्तमान मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ थाना जहानाबाद में धारा 3(5) बीएनएस और धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
अब सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचेगी पुलिस
जहानाबाद पुलिस की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा अब गिरफ्तार आरोपियों से आगे बढ़ गया है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, गांजा सप्लाई करने वालों, बिक्री के ठिकानों, वाहनों, मोबाइल नंबरों और अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक जयशंकर सिंह, उपनिरीक्षक देवेंद्र कुमार, उपनिरीक्षक रामकिशोर वर्मा, हेड कांस्टेबल सुरेशचंद्र, कांस्टेबल मनोज कुमार, कांस्टेबल सोनू नागर और रिजर्व कांस्टेबल हर्ष शर्मा शामिल रहे।
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