UP News: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। गुरुवार दोपहर 23 वर्षीय युवा वकील प्रियांशु श्रीवास्तव ने कचहरी की 5वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड से पहले उसने दो पेज का नोट लिखा और उसे अपने व्हाट्सऐप स्टेटस पर डाल दिया। इस नोट में उसने अपने बचपन से लेकर अब तक झेले मानसिक उत्पीड़न का जिक्र किया है।
15 मिनट तक खिड़की पर बैठा, फिर लगा दी छलांग
प्रियांशु कचहरी की पांचवीं मंजिल पर पहुंचा और टूटी खिड़की के पास करीब 15 मिनट तक बैठा रहा। इसके बाद अचानक नीचे कूद गया। तेज आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे वकीलों ने उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सुसाइड से पहले व्हाट्सऐप स्टेटस पर डाला नोट
जांच में सामने आया कि प्रियांशु ने दोपहर 12:05 बजे सुसाइड नोट लिखा और करीब 21 मिनट पहले उसे व्हाट्सऐप स्टेटस पर अपलोड किया। उसने यह नोट अपने पिता और दोस्तों को भी भेजा था, लेकिन जब तक लोग पढ़ पाते, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
पिता के साथ करता था वकालत की प्रैक्टिस
प्रियांशु, बर्रा-8 के वरुण विहार का रहने वाला था। उसके पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी वकील हैं और वह उनके साथ ही प्रैक्टिस कर रहा था। 2025 में उसने लॉ की पढ़ाई पूरी की थी और बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में था।
सुसाइड नोट में बचपन से मानसिक टॉर्चर का आरोप
प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उसे 5-6 साल की उम्र से ही मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी। उसने बताया कि एक बार आम का जूस पी लेने पर उसे निर्वस्त्र कर घर से बाहर भगा दिया गया था।
पढ़ाई को लेकर दबाव और अपमान
उसने लिखा कि पढ़ाई को लेकर उस पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाला गया। परीक्षा में कम नंबर आने पर पिता द्वारा निर्वस्त्र कर घर से निकालने की धमकी दी जाती थी। इसी डर से वह एक बार घर से भागकर मथुरा तक चला गया था।
हर वक्त निगरानी और बेइज्जती का आरोप
प्रियांशु के मुताबिक, उसके पिता हर समय उस पर शक करते थे, हर मिनट का हिसाब मांगते थे और छोटी-छोटी बातों पर मोहल्ले में उसे गालियां देकर बेइज्जत करते थे। उसने लिखा कि यह सब मानसिक टॉर्चर है।
खुद कमाकर चलाता था खर्च
उसने बताया कि इंटर के बाद उसने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और बाद में ऑनलाइन काम भी किया। वह अपने मोबाइल, परिवार के खर्च और बिजली बिल तक खुद भरता था, लेकिन इसके बावजूद उसे अपमान ही मिलता रहा।
“इतनी बेइज्जती के साथ अब नहीं जी सकता”
सुसाइड नोट में उसने लिखा कि वह अब इस तरह की जिंदगी नहीं जी सकता। रोज-रोज घुटकर मरने से बेहतर है एक बार मर जाना। उसने लिखा — “मैं हार गया, पापा जीत गए।”
अंतिम इच्छा: पिता को लाश न छूने देना
प्रियांशु ने अपनी अंतिम इच्छा में लिखा कि उसके पिता उसकी लाश को न छुएं। हालांकि उसने यह भी कहा कि वह पिता पर कोई कार्रवाई नहीं चाहता, ताकि परिवार बर्बाद न हो।
साथी वकील बोले: कभी तनाव में नहीं दिखा
उसके साथी वकील शरद के मुताबिक, कुछ दिन पहले ही मुलाकात हुई थी और वह सामान्य लग रहा था। उसने कभी अपने परिवार की समस्या का जिक्र नहीं किया।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस ने मोबाइल कब्जे में लेकर कई एंगल से जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).