Shocking News: उत्तर प्रदेश में होमगार्ड भर्ती परीक्षा के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र का जिला स्पष्ट न होने के कारण अभ्यर्थी प्रीति देवी गलत शहर पहुंच गईं और समय पर सही केंद्र नहीं पहुंच पाने की वजह से परीक्षा देने से वंचित रह गईं। यह मामला परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गलत शहर पहुंचीं अभ्यर्थी, छूट गई परीक्षा
हरदोई के शाहाबाद निवासी वीरेश सिंह अपनी पत्नी प्रीति देवी को परीक्षा दिलाने के लिए बरेली के नवाबगंज स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पहुंचे।
लेकिन बाद में पता चला कि प्रीति देवी का असली परीक्षा केंद्र उन्नाव जिले के नवाबगंज में स्थित इसी नाम का स्कूल था। जब तक उन्हें सही जानकारी मिली, तब तक परीक्षा शुरू हो चुकी थी और वह परीक्षा नहीं दे सकीं।
गूगल सर्च बना भ्रम की वजह
प्रीति देवी ने बताया कि उन्होंने एडमिट कार्ड पर दिए गए स्कूल का नाम गूगल पर सर्च किया था।
- सर्च रिजल्ट में बरेली का नवाबगंज सामने आया
- एडमिट कार्ड में जिले का नाम स्पष्ट नहीं था
इसी कारण वह बरेली पहुंच गईं। लेकिन असल में उनका सेंटर उन्नाव में था, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
एडमिट कार्ड में स्पष्ट जानकारी की कमी
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी वजह एडमिट कार्ड में जिले का नाम साफ-साफ न होना बताया जा रहा है।
नवाबगंज नाम के दो अलग-अलग जिलों (बरेली और उन्नाव) में एक जैसे स्कूल होने से कई अभ्यर्थियों के लिए स्थिति कन्फ्यूजिंग हो गई।
यह लापरवाही सीधे तौर पर परीक्षा आयोजकों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है।
पति ने दी परीक्षा, पत्नी रह गई वंचित
दिलचस्प बात यह है कि प्रीति देवी के पति वीरेश सिंह ने भी अपनी परीक्षा बरेली में ही दी थी।
- उनके एडमिट कार्ड में भी जिले का नाम स्पष्ट नहीं था
- उन्होंने भी गूगल सर्च के आधार पर सेंटर खोजा
- 25 अप्रैल को उन्होंने सफलतापूर्वक परीक्षा दे दी
लेकिन यही तरीका प्रीति देवी के मामले में उल्टा पड़ गया और वह परीक्षा से वंचित रह गईं।
Shocking News: यह मामला दिखाता है कि छोटी सी प्रशासनिक चूक कैसे किसी अभ्यर्थी के भविष्य पर भारी पड़ सकती है।
अगर एडमिट कार्ड में पूरी और स्पष्ट जानकारी दी जाती, तो प्रीति देवी जैसी स्थिति से बचा जा सकता था। अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।