IPS अजय पाल शर्मा: अजय पाल शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं—लेकिन इस बार वजह यूपी में कोई एनकाउंटर नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 है।
चुनाव आयोग ने उन्हें पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर बंगाल भेजा है और उनकी तैनाती के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
बंगाल चुनाव में एंट्री और क्यों मचा बवाल?
अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना में तैनात किया गया है—यह इलाका अभिषेक बनर्जी का प्रभावशाली क्षेत्र माना जाता है, जो ममता बनर्जी के भतीजे हैं।
ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में एक “सख्त” छवि वाले IPS की तैनाती ने राजनीतिक हलकों में तुरंत हलचल पैदा कर दी।
वायरल वीडियो में क्या था?
चुनाव ड्यूटी के दौरान अजय पाल शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे TMC प्रत्याशी जहांगीर खान के समर्थकों को सख्त लहजे में चेतावनी देते दिखे।
उनका मशहूर डायलॉग—
“गड़बड़ी होगी तो कायदे से इलाज होगा”
यही लाइन सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
क्यों वायरल हुआ वीडियो?
वीडियो वायरल होने के पीछे कई वजहें रहीं:
- उनकी पहले से “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” वाली इमेज
- चुनाव जैसा संवेदनशील माहौल
- सख्त और सीधे शब्दों में दी गई चेतावनी
लोगों ने इसे दो नजरियों से देखा—किसी ने “सख्त प्रशासन” कहा, तो किसी ने “ओवर-एक्शन”।
दो खेमों में बंटी राजनीति: किस नेता ने क्या कहा?
समर्थन वाला नैरेटिव (BJP लाइन)
- “ऐसे ही अफसर चाहिए चुनाव में”
- सख्ती से ही निष्पक्ष मतदान संभव
विरोध वाला नैरेटिव (TMC और विपक्ष)
- किरिट सोमैया के बयान के जवाब में TMC नेताओं ने तीखा हमला बोला
- एक नेता ने कहा—“अगर वो Singham हैं, तो मैं Pushpa हूं”
- कुछ नेताओं ने उन्हें “trigger-happy cowboy” तक बता दिया
यानी मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक टकराव बन गया।
कौन हैं अजय पाल शर्मा?
- 2011 बैच के यूपी कैडर के IPS अधिकारी
- मूल रूप से लुधियाना के रहने वाले
- BDS (डेंटल साइंस) की पढ़ाई की
- हाल ही में प्रमोट होकर DIG रैंक पर पहुंचे
वर्तमान में उनकी पहचान एक सख्त और एक्शन लेने वाले अधिकारी की है।
‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ इमेज कैसे बनी?
यूपी में शामली, नोएडा, जौनपुर और रामपुर जैसी जगहों पर तैनाती के दौरान उन्होंने कई बड़े ऑपरेशन लीड किए।
कहा जाता है कि उन्होंने योगी आदित्यनाथ के “अपराध मुक्त यूपी” विजन के तहत कई मुठभेड़ों को अंजाम दिया।
इसी वजह से उन्हें “एनकाउंटर एक्सपर्ट” या “सिंघम” कहा जाने लगा।
विवादों से भी रहा नाता
उनका करियर पूरी तरह बेदाग नहीं रहा:
- 2020 में शामली एनकाउंटर पर सवाल उठे
- समाजवादी पार्टी ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताया
- एक अन्य केस में संदिग्ध अपराधी और पुलिसकर्मी की मौत के बाद भी विवाद हुआ
- कुछ मौकों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे
यानी उनकी छवि जितनी मजबूत है, उतनी ही विवादित भी रही है।
पूरा पॉलिटिकल ड्रामा क्या है?
यह मामला अब सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं रहा, बल्कि:
- चुनाव आयोग की तैनाती
- सख्त अफसर की इमेज
- TMC बनाम BJP नैरेटिव
इन सबका टकराव बन गया है
सरल शब्दों में:
- BJP: “सख्ती = फ्री एंड फेयर चुनाव”
- TMC: “सख्ती नहीं, दबाव और टारगेटिंग”
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).