“बदलापुर” में बदला “फतेहपुर” – बदले की भावना से “बुजुर्ग” को मारी गई “गोली”
रिपोर्ट – मोहम्मद लईक – फतेहपुर जनपद
Fatehpur News – उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में अभी एक माँ और उसके दो मासूम बच्चों की मौत का दंश अभी शांत भी नहीं हुआ था कि जमीनी विवाद की पुरानी रंजिश के चलते एक की गोली मार कर हत्या कर दी गई। हत्यारोपियों ने पूरी वारदात को पुलिस चौकी से लगभग पचास मीटर की दूरी पर ही अंजाम दे डाला था। बताया यह भी जा रहा है कि गोली मरकर हत्या का षणयंत्र रचकर ताड़ में बैठे हत्यारे मृतक बुजुर्ग की नहीं बल्कि उसके बेटे को मारना चाहते थे।
चौकी से चंद क़दमों पर मारी गोली
पूरी वारदात रविवार रात की है। जब फतेहपुर जिले की सदर कोतवाली थाना क्षेत्र की आबुपुर पुलिस चौकी के पास दो बाइक सार लोगों ने साइकिल से जा रहे एक बुजुर्ग को गोली मार दी और फरार हो गए। गोली की आवाज सुनते ही पुलिस चौकी से चौकी प्रभारी और अन्य पुलिस कर्मचारी मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया था। कुछ ही देर में मृतक की शिनाख्त वर्षीय हरिओम गुप्ता के रूप में की गई। कुछ ही देर में मृतक के बेटे सहित परिवार के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। चारों तरफ रोने बिलखने की आवाज गूंज रही थी। कुछ समय बाद जब पुलिस ने हत्या के पीछे की वजह जाननी चाही तो परिजनों ने पुलिस को बताया कि परिवार के लोगों में जमीनी विवाद चलता चला आ रहा है।
बदले की भावना से की हत्या
हरिओम गुप्ता की हत्या के पीछे परिवार का जमीनी विवाद अब रंजिश में बदल चुका है। अभी तक की तफ्तीश के अनुसार आज से पंद्रह वर्ष पूर्व इसी विवाद को लेकर मृतक हरिओम के बेटे दीपू और दिलीप ने अपने चाचा उमाशंकर की हत्या कर दी थी। जिसके बाद दीपू और दिलीप पिछले वर्ष ही जेल से छूट कर बाहर आए हुए थे। जिसको लेकर मृतक चाचा उमाशंकर का अधिवक्ता बेटा ज्ञानेंद्र कुमार उर्फ़ ज्ञान प्रकश ने बदले की नियत बना ली थी। जिसको लेकर रविवार की रात ज्ञानेंद्र ने हरिओम की हत्या करते हुए बदले की भावना को अंजाम दे डाला। वहीं मौके पर पहुंचे जिले के एसपी उदय शंकर सिंह ने हत्यारोपियों की गिरफ़्तारी के लिए तीन टीम का गठन किया है।
गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है
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