Video: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से इंसानियत और मजबूरी की एक भावुक तस्वीर सामने आई है। यहां एक बहू अपनी 90 साल की सास को पीठ पर लादकर करीब 5 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंची, ताकि उन्हें उनकी पेंशन मिल सके। यह घटना सिस्टम की खामियों और ग्रामीण इलाकों की कठिन सच्चाई दोनों को उजागर करती है।
कहां का है मामला?
यह मामला सरगुजा जिले के मैनपाट ब्लॉक के कुनिया गांव के जंगलपारा का है।
यहां रहने वाली सुखमनिया अपनी सास सोनवारी को लेकर सेंट्रल बैंक पहुंची थीं।
₹500 रुपये वृद्धापेंशन के लिए सुखमनिया अपनी 90 वर्षीय सास को पीठ में लादकर 7 किमी पैदल चलकर बैंक पहुंची..
अब बताओ कौन ज्यादा तप रहा है.. 44° की गर्मी या विष्णुदेव का KYC ..??
– प्रदेशभर के निःशक्त जन छः महीने से पेंशन के लिए भटक रहे हैं
– वृद्धा पेंशन की हितग्राही महिलाएं KYC के… pic.twitter.com/1Ci7twZ5AM— Devendra Yadav (@Devendra_1925) May 23, 2026
5 किलोमीटर पैदल सफर, वो भी सास को पीठ पर लादकर
सुखमनिया को अपनी सास को लेकर बैंक तक पहुंचने के लिए:
- पहले करीब 1.5 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ा, जहां एक नाला पड़ता है
- इसके बाद 3.5 किलोमीटर और पैदल चलना पड़ा
नाले के कारण वहां कोई वाहन नहीं पहुंच पाता, इसलिए उन्हें पूरा रास्ता पैदल ही तय करना पड़ा।
सिर्फ ₹500 की पेंशन के लिए इतनी मशक्कत
बुजुर्ग सोनवारी को वृद्धावस्था पेंशन के रूप में सिर्फ ₹500 प्रति माह मिलते हैं।
इस बार उन्हें 3 महीने की रुकी हुई पेंशन ₹1500 दी गई, जबकि खाते में 4 महीने के ₹2000 जमा थे।
वीडियो हुआ वायरल
इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बहू अपनी बुजुर्ग सास को पीठ पर उठाकर ले जाती नजर आ रही है।
यह वीडियो लोगों को भावुक कर रहा है और सिस्टम पर सवाल भी खड़े कर रहा है।
क्यों उठानी पड़ी इतनी परेशानी?
इस पूरे मामले के पीछे दो बड़ी वजहें सामने आई हैं:
बैंक मित्र ने घर आना बंद किया
पहले बैंक मित्र घर पर आकर पेंशन दे देता था, लेकिन कुछ महीनों से उसने आना बंद कर दिया।
KYC अधूरा होने से पेंशन अटकी
केवाईसी पूरा न होने के कारण कई महीनों से पेंशन रुकी हुई थी।
इसी वजह से मजबूरी में बहू को सास को लेकर बैंक जाना पड़ा।
बहू ने क्या कहा?
सुखमनिया ने रोते हुए बताया कि:
- 3 महीने से पेंशन के लिए भटक रही थी
- कोई मदद नहीं मिली
- मजबूरी में सास को पीठ पर लादकर बैंक आना पड़ा
बैंक का क्या कहना है?
सेंट्रल बैंक के मैनेजर मिर्जा अल्ताफ बेग के अनुसार:
- इलाके में घर-घर पेंशन पहुंचाने की व्यवस्था है
- 8 बैंक मित्र इस काम के लिए नियुक्त हैं
- जरूरत होने पर परिजन सूचना दें, तो बैंक मित्र को घर भेजा जा सकता है
सिस्टम पर उठे सवाल
यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है:
- क्या ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाएं सही तरीके से पहुंच रही हैं?
- क्या बुजुर्गों को समय पर पेंशन मिल रही है?
- क्या जिम्मेदार लोग अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं?
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).