भारत के लिए खुशखबरी: राजस्थान के जैसलमेर जिले से देश के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। डांडेवाला क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 23 मई को इसकी जानकारी साझा की। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने इस खोज को अंजाम दिया है।
कहां और कैसे मिली गैस की नई खोज?
यह खोज जैसलमेर के डांडेवाला ऑनशोर तेल एवं गैस क्षेत्र में हुई है।
- जमीन से करीब 950 मीटर गहराई पर
- ‘सानू फॉर्मेशन’ नाम की परत से
- पहली बार सफलतापूर्वक गैस का प्रवाह हासिल किया गया
यह खोज इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि पहले यहां गहरे कुओं से ही गैस मिलती थी।
कितना हो रहा है गैस उत्पादन?
परीक्षण के दौरान यहां से:
- करीब 25,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (SCMD)
प्राकृतिक गैस उत्पादन दर्ज किया गया है।
यह शुरुआती उत्पादन है, आगे इसमें और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
साफ और बेहतर क्वालिटी की गैस
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- इस गैस में CO2 की मात्रा बहुत कम है
- इसे साफ और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन माना जा रहा है
इसका इस्तेमाल घरों, उद्योगों और बिजली उत्पादन में ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी होगा।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बड़ा बल
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि:
- इस खोज से विदेशों से तेल-गैस आयात पर निर्भरता कम होगी
- यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन को मजबूत करेगा
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह एक अहम कदम है।
क्या होता है ‘सानू फॉर्मेशन’?
‘सानू फॉर्मेशन’ दरअसल जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों की एक खास परत होती है।
- यह मुख्य रूप से बलुआ पत्थर और गाद से बनी होती है
- इसमें तेल और गैस को संग्रहित रखने की क्षमता होती है
वैज्ञानिकों ने इसी परत को भेदकर यह नई खोज की है।
जैसलमेर बना रणनीतिक हाइड्रोकार्बन हब
इस खोज के बाद:
- पश्चिमी राजस्थान, खासकर जैसलमेर बेसिन का महत्व बढ़ गया है
- यह क्षेत्र पहले से ही गैस उत्पादन के लिए जाना जाता है
अब इसे देश का एक मजबूत हाइड्रोकार्बन हब माना जा रहा है।
नई खोज से खुलीं और संभावनाएं
ऑयल इंडिया लिमिटेड के अनुसार:
- इस खोज के बाद आसपास के इलाकों में भी गैस मिलने की संभावना बढ़ी है
- अब आधुनिक तकनीक से पूरे क्षेत्र में और सर्वे किए जाएंगे
यानी आने वाले समय में और बड़े भंडार मिल सकते हैं।
जैसलमेर में पहले से सक्रिय हैं कई गैस फील्ड
इस क्षेत्र में पहले से कई कंपनियां काम कर रही हैं:
- ऑयल इंडिया लिमिटेड
- ओएनजीसी
- फोकस एनर्जी
प्रमुख गैस क्षेत्र:
तनोट, बागीटिब्बा, मनहेरा टिब्बा, घोटारू, बांकिया और चिनैवाला टिब्बा
पूरे जैसलमेर बेसिन में करीब 10.8 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस भंडार का अनुमान है।
गैस से बनती है बिजली, कैसे होता है इस्तेमाल?
यहां से निकलने वाली गैस:
- रामगढ़ गैस थर्मल पावर स्टेशन भेजी जाती है
- यह राजस्थान का पहला गैस आधारित पावर प्लांट है (क्षमता 270.5 मेगावाट)
गैस पाइपलाइन (GAIL) के जरिए लगभग 67 किमी दूर पहुंचती है
रोजाना 6–8 लाख क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई होती है
इससे बनी बिजली का उपयोग:
- बॉर्डर फ्लडलाइट
- पेयजल योजनाएं
- घर और फैक्ट्रियां
डांडेवाला फील्ड का इतिहास
- पहली खोज: 1991-92 (ऑयल इंडिया लिमिटेड)
- उत्पादन शुरू: 1996
तब से लगातार गैस उत्पादन हो रहा है।
मई 2026 की खोज क्यों है खास?
- पहले गैस गहरे कुओं से मिलती थी
- अब कम गहराई (950 मीटर) पर नया भंडार मिला
- आधुनिक तकनीक से पुराने क्षेत्र में नई खोज
इसे मौजूदा फील्ड के भीतर मिली बड़ी और नई खोज माना जा रहा है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).