बढ़ती मंगाई की मार पर पीलीभीत में सपा का प्रदर्शन: रस्सों से खिंची कार, अर्धनग्न कार्यकर्ता और सरकार के खिलाफ की नारेवाजी
“जब पेट्रोल महंगा हो जाए तो कार नहीं, जनता उसे खींचती है” — इसी संदेश को देने सड़कों पर उतरे सपाई
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में शुक्रवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतर आए। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर और भीतर हुए इस प्रदर्शन ने अपने अनोखे अंदाज, तीखे नारों और सरकार पर सीधे हमला क्या। सपाइयों ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई ने आम आदमी का जीवन मुश्किल बना दिया है, जबकि सरकार जमीनी समस्याओं से आंखें मूंदे बैठी है।
प्रदर्शन के दौरान जो तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में रही, वह थी रस्सों से खींची जा रही एक बंद कार की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती जाएं तो आम आदमी के लिए वाहन चलाना भी मुश्किल हो जाता है। इसी दर्द को दिखाने के लिए कार को रस्सों से बांधकर कलेक्ट्रेट तक खींचा गया। इस दौरान एक कार्यकर्ता अर्धनग्न होकर कार के बोनट पर बैठकर नारे लगाए और महंगाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराता रहा।
महंगाई के खिलाफ गुस्सा
कलेक्ट्रेट पहुंचते ही प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरा परिसर “महंगाई बंद करो”, “युवाओं को रोजगार दो”, “किसानों को खाद दो”, “जनता परेशान, सरकार बेखबर” जैसे नारे लगते रहे । हाथों में बैनर और झंडे लिए कार्यकर्ता सरकार को घेरने की रणनीति के साथ पहुंचे थे।
बैनरों पर लिखे संदेश भी सत्ता पर सीधा हमला कर रहे थे। कहीं बेरोजगारी को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे तो कहीं किसानों की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से दिख रहा था। कई पोस्टरों में बढ़ती महंगाई को देश की सबसे बड़ी समस्या बताया गया।
“महंगाई डायन” के गीत से सरकार पर तंज
प्रदर्शन को और प्रभावी बनाने के लिए कार्यकर्ताओं ने चर्चित गीत “महंगाई डायन खाए जात है” बजाया। गीत बजते ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ता शोर मचाते हुए सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। यह दृश्य केवल विरोध नहीं बल्कि जनता के आर्थिक दर्द को राजनीतिक संदेश में बदलने की कोशिश थी।
सपाइयों का कहना था कि आज रसोई का बजट बिगड़ चुका है। सब्जियों से लेकर खाद्य पदार्थों तक की कीमतें बढ़ चुकी हैं। गैस सिलेंडर आम परिवारों के लिए बोझ बन गया है और पेट्रोल-डीजल के दामों ने रोजमर्रा की जिंदगी को महंगा कर दिया है।
प्रशासन से हुई बहस, प्रदर्शन में दिखा तनाव
प्रदर्शन के दौरान एक बार ऐसा मौका भी आया जब प्रशासनिक अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सपाइयों का आरोप था कि जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
कुछ देर तक माहौल गर्म रहा, लेकिन बाद में पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं को शांत कराया और प्रदर्शन आगे बढ़ता रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन की विशेष निगरानी बनी रही।
जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह ने सरकार पर बोला हमला
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समाजवादी Party के जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह उर्फ जग्गा ने कहा कि आज प्रदेश का किसान परेशान है, युवा रोजगार के लिए भटक रहा है और आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की मूल समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल पार्टी प्रचार में व्यस्त है।
उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही, खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं। ऐसे में विपक्ष का कर्तव्य है कि वह जनता की आवाज बनकर संघर्ष करे।
इन नेताओं की रही अहम भागीदारी
प्रदर्शन में जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र मिश्रा कट्टर, पूरनपुर क्षेत्र से सक्रिय नेता राजू, पूर्व विधायक पीतम राम की पुत्रवधू आरती महेंद्र, बरखेड़ा विधान सभा क्षेत्र से भावी प्रत्याशी रामसनेही वर्मा, यूसुफ क़ादरी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने अपने संबोधन में सरकार को जनविरोधी बताते हुए जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
किसानों, युवाओं और आम जनता के नाम पर सियासी घेराबंदी
समाजवादी पार्टी ने इस प्रदर्शन के जरिए साफ संकेत दिया कि आने वाले समय में महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दे विपक्ष की राजनीति के केंद्र में रहने वाले हैं। पार्टी नेताओं का कहना था कि यदि जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि किसानों को खाद के लिए लाइनें लगानी पड़ रही हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा और महंगाई ने मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। ऐसे में सरकार को जवाब देना चाहिए कि आखिर जनता को राहत कब मिलेगी।
ज्ञापन देकर सरकार तक पहुंचाई नाराजगी
प्रदर्शन के अंत में समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में महंगाई पर नियंत्रण, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी, रसोई गैस को सस्ता करने, किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने और युवाओं के लिए रोजगार सृजन की मांग की गई।
जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर संघर्ष
पीलीभीत में हुआ यह प्रदर्शन केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्ष ने इसे जनता के गुस्से और आर्थिक परेशानियों की आवाज के रूप में प्रस्तुत किया। रस्सों से खींची गई कार ने बढ़ती ईंधन कीमतों का प्रतीकात्मक चित्र खींचा, जबकि अर्धनग्न प्रदर्शनकारी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि महंगाई ने आम आदमी की स्थिति को किस हद तक प्रभावित कर दिया है।
फिलहाल इतना तय है कि पीलीभीत की सड़कों पर दिखा यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में जिले की राजनीति और जनचर्चाओं का बड़ा विषय बना रहेगा। विपक्ष ने अपना राजनीतिक संदेश दे दिया है, अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन आरोपों और मांगों पर क्या रुख अपनाती है।