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पीलीभीत: मंत्री जी, हम किसान हैं कोई गुनाहगार नहीं, किसानों ने संजय सिंह गंगवार के आवास पर बोला धावा

पीलीभीत में 205 करोड़ रुपये के गन्ना बकाया भुगतान को लेकर किसानों का गुस्सा फूटा। मंत्री संजय सिंह गंगवार के आवास पर घंटों प्रदर्शन और हंगामा।

गन्ना मंत्री के जिले में ही किसानों के 205 करोड़ रुपये फंसे, भुगतान और वादों से नाराज किसानों ने मंत्री आवास पर बोला धावा

चार पेराई सत्र बीत गए, न भुगतान मिला न वादे पूरे हुए

पीलीभीत में शनिवार को उस समय सत्ता के दावों की जमीनी हकीकत खुलकर सामने आ गई, जब सैकड़ों गन्ना किसानों ने प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री संजय सिंह गंगवार के आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में बैनर लिए किसान एक ही सवाल पूछ रहे थे—”मंत्री जी, हम किसान हैं कोई गुनाहगार नहीं, फिर अपने ही पैसे के लिए दर-दर क्यों भटक रहे हैं?”

गन्ना मंत्री के जिले में ही किसानों का करोड़ों रुपये फंसा

विडंबना यह है कि जिस विभाग की जिम्मेदारी खुद मंत्री संजय सिंह गंगवार के पास है, उसी विभाग से जुड़े किसान वर्षों से अपने बकाया भुगतान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसानों के अनुसार बजाज चीनी मिल पर उनका गन्ने का करीब 135 करोड़ रुपये और नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल पर लगभग 70 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इसके बावजूद किसानों को केवल आश्वासन ही मिले हैं।

योगी का 14 दिन वाला वादा भी कागजों तक सीमित

किसानों ने यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत दौरे के दौरान कहा था कि गन्ना बिकने के 14 दिन के भीतर किसानों को भुगतान सुनिश्चित कराया जाएगा। लेकिन जमीनी स्थिति यह है कि महीनों और वर्षों बाद भी किसान अपने हक के पैसे का इंतजार कर रहे हैं। इससे किसानों में सरकार और प्रशासन दोनों के प्रति गहरी नाराजगी दिखाई दी।

मझोला चीनी मिल का भी वादा भी हवा हवाई

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मंत्री संजय गंगवार के उस वादे पर भी सवाल उठाए जिसमें उन्होंने विधायक बनने और बाद में मंत्री बनने के बाद बंद पड़ी मझोला चीनी मिल को हर हाल में चालू कराने की बात कही थी। किसानों का कहना है कि मंत्री बने चार पेराई सत्र गुजर चुके हैं और पांचवां सत्र आने वाला है, लेकिन चीनी मिल आज भी बंद पड़ी है। जिससे किसानों का भरोसा टूट चुका है।

अधिकारियों का समझाना बेअसर, मंत्री से सीधी बात पर अड़े किसान

संजय रॉयल पार्क स्थित मंत्री आवास के बाहर घंटों चले प्रदर्शन के दौरान जिला गन्ना अधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट और बजाज चीनी मिल के प्रबंधक समेत कई अधिकारी किसानों को समझाने पहुंचे, लेकिन किसान मंत्री से सीधे संवाद की मांग पर अड़े रहे। बाद में मंत्री संजय सिंह गंगवार ने फोन पर बातचीत कर पांच किसानों की टीम को मुख्यमंत्री से मिलवाने का आश्वासन दिया, लेकिन किसान इस प्रस्ताव पर भी राजी नहीं हुए। उनका कहना था कि पहले भी कई बार समितियां बनीं, बैठकें हुईं, लेकिन न भुगतान अभी तक मिला है और न ही समस्याओं का समाधान हुआ है।

अब सवाल मंत्री की जवाबदेही पर

गन्ना विभाग के मुखिया और जिले के प्रभावशाली नेता होने के बावजूद यदि किसानों को अपने ही पैसे के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, तो यह केवल मिलों की विफलता नहीं बल्कि व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल है। किसानों का साफ संदेश है कि उन्हें अब समितियां, बैठकें और आश्वासन नहीं, बल्कि अपने खून-पसीने की कमाई का भुगतान से उगाई फसल का हर हाल में भुगतान चाहिए।