UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अभी 2027 चुनाव भले दूर दिख रहे हों, लेकिन सियासी हलचल अभी से तेज होने लगी है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले की बात लगातार हो रही है। लेकिन इस बीच समाजवादी पार्टी के अंदर से उठ रही कुछ आवाजों ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल ये है कि क्या पार्टी के अंदर सब सामान्य है या फिर अंदर ही अंदर कुछ ऐसा पक रहा है, जो आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकता है।
महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ जो हुआ, उसमें पहले अंदरूनी मतभेद दिखे और बाद में मामला काफी आगे निकल गया। कई दलों में चुनाव के बाद नेताओं की नाराजगी और गुटबाजी भी सामने आई। अब यूपी में भी समाजवादी पार्टी को लेकर इसी तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
रुचि वीरा के बयान ने फिर बढ़ा दी चर्चा
कुछ दिन पहले ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी के भीतर सब ठीक नहीं चल रहा। उस बयान पर सियासत चल ही रही थी कि अब सपा सांसद रुचि वीरा खुलकर सामने आ गईं।
रुचि वीरा ने अपनी ही पार्टी के एक स्थानीय नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें एक राजनीतिक कार्यक्रम में जानबूझकर नहीं बुलाया गया। इतना ही नहीं, कार्यक्रम के पोस्टर और बैनरों से भी उनकी तस्वीर गायब रखी गई।
यहीं से मामला सिर्फ एक कार्यक्रम का नहीं रहा, बल्कि पार्टी के अंदर चल रही खींचतान की तरफ इशारा करने लगा।
सांसद को ही किनारे कर दिया गया?
रुचि वीरा का कहना है कि अगर गलती से ऐसा होता तो बात अलग थी, लेकिन यहां तो पूरा मामला सोच-समझकर किया गया लगता है।
राजनीति में किसी मौजूदा सांसद को कार्यक्रम से अलग रखना छोटी बात नहीं मानी जाती। खासकर तब, जब मंच से लेकर पोस्टर तक हर जगह उसे नजरअंदाज किया जाए। ऐसे मामलों में अक्सर सवाल उठने लगते हैं कि मामला सिर्फ भूल का है या फिर इसके पीछे कोई अंदरूनी राजनीति चल रही है।
महिला सम्मान का मुद्दा भी उठा
रुचि वीरा ने अपनी नाराजगी सिर्फ राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रखी। उन्होंने कहा कि वह मुरादाबाद की पहली महिला सांसद हैं और प्रदेश में समाजवादी पार्टी की अकेली महिला जनप्रतिनिधि भी हैं।
उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी महिला सांसद को ही इस तरह साइड किया जाएगा तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
अखिलेश को बचाया, लेकिन अपने ही नेता पर बरसीं
इस पूरे विवाद में एक बात काफी दिलचस्प रही। रुचि वीरा ने अखिलेश यादव पर कोई सवाल नहीं उठाया। उन्होंने साफ कहा कि अखिलेश महिलाओं को सम्मान देने वाले नेता हैं और पार्टी की सोच भी ऐसी नहीं है।
लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने पार्टी के एक नेता पर गंभीर आरोप लगा दिए। उनका कहना था कि एक नेता लगातार गुटबाजी कर रहा है और लोगों को बांटने का काम कर रहा है।
अब यहां सवाल यही खड़ा होता है कि अगर पार्टी के अंदर सब ठीक है, तो फिर अपने ही सांसद को इस तरह खुलकर सामने आने की जरूरत क्यों पड़ी?
क्या आजम खान खेमे से जुड़ रही है कहानी?
राजनीतिक गलियारों में इस पूरे मामले को सिर्फ मुरादाबाद के कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जा रहा। रुचि वीरा को लंबे समय से आजम खान के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है।
इसी वजह से अब इस मामले को बड़े राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी ने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन सियासी चर्चाएं जरूर तेज हो गई हैं।
2027 से पहले सपा के लिए चेतावनी?
समाजवादी पार्टी यूपी में बीजेपी के खिलाफ सबसे बड़े विपक्ष की भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में अगर पार्टी के अंदर से ही असंतोष की आवाजें उठने लगें तो विपक्ष को भी मौका मिल जाता है।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पार्टी में कोई बड़ी टूट होने वाली है, लेकिन इतना जरूर है कि ऐसे बयान और विवाद चुनाव से पहले सवाल खड़े जरूर कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि यह मामला सिर्फ स्थानीय नाराजगी तक सीमित रहता है या फिर आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और भी आवाजें उठती हैं।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).