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Death Sentence: प्रेमी के लिए माँ बनी हैवान, 2 बच्चों का कत्ल.. कोर्ट ने नहीं किया रहम, सुनाई फांसी की सजा..

Death Sentence: प्रेमी के लिए माँ बनी हैवान, 2 मासूम बच्चों का कत्ल.. कोर्ट ने नहीं किया रहम, सुनाई फांसी की सजा..

Death Sentence: बिहार के मधुबनी के झंझारपुर से एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। अपने ही दो मासूम बच्चों की हत्या के मामले में झंझारपुर व्यवहार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मां अनीता कुमारी और उसके प्रेमी जयप्रकाश मंडल को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में माना है। यह झंझारपुर कोर्ट के इतिहास का पहला मामला बताया जा रहा है जिसमें दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है।

बच्चों को याद कर भावुक हुए पिता प्रमोद साफी

फैसले के बाद बच्चों के पिता प्रमोद कुमार साफी अपने बच्चों को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि अदालत ने न्याय किया है और उन्हें भरोसा था कि देर-सवेर न्याय जरूर मिलेगा।

प्रमोद ने कहा, “2018 में मेरी शादी अनीता से हुई थी। मुझे कभी अंदाजा नहीं था कि वह मेरे बच्चों के साथ इतनी बेरहमी कर सकती है। उस समय मैं काम के सिलसिले में कोलकाता में रहता था। घटना की जानकारी मिलते ही मैं घर पहुंचा, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।”

कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय अभिषेक रंजन ने अनीता कुमारी और जयप्रकाश मंडल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत फांसी की सजा सुनाई।

फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि एक मां पर अपने बच्चों की सुरक्षा और देखभाल की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस मामले में मां ने ही प्रेमी के साथ मिलकर दोनों मासूम बच्चों की हत्या कर दी।

कोर्ट ने इस अपराध को बेहद क्रूर, अमानवीय और समाज को झकझोरने वाला अपराध बताया।

कोर्ट ने लगाया आर्थिक जुर्माना भी

अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अगर जुर्माना जमा नहीं किया जाता है तो उन्हें छह-छह महीने की अतिरिक्त जेल सजा भुगतनी होगी।

इसके अलावा IPC की धारा 201 और 34 के तहत सात-सात साल की कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।

आखिर क्या था पूरा मामला?

यह घटना 3 जुलाई 2023 की है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक प्रमोद कुमार साफी की पत्नी अनीता अपने दोनों बच्चों को मायके ले जाने की बात कहकर घर से निकली थी।

आरोप है कि बलान नदी के खाप पुल के पास जयप्रकाश मंडल उससे मिला। वहीं दोनों बच्चों की गला दबाकर हत्या की गई और शवों को नदी में फेंक दिया गया।

ग्रामीणों को हुआ शक, फिर खुल गया मामला

घटना के समय पुल के आसपास कुछ ग्रामीण खेतों में काम कर रहे थे। ग्रामीणों को दोनों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। इसके बाद लोगों ने दोनों का पीछा किया।

ग्रामीणों ने अनीता और जयप्रकाश को पकड़ लिया और उनकी पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा शुरू हुआ।

बेटी का शव मिला, बेटे का अभी तक नहीं चला पता

प्रमोद कुमार साफी की शिकायत के बाद घोंघरडीहा थाना में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने शवों की तलाश शुरू की। घटना के सात दिन बाद यानी 10 जुलाई 2023 को डेढ़ साल की सृष्टि कुमारी का शव बरामद कर लिया गया।

हालांकि चार साल के बेटे प्रिंस कुमार का शव आज तक बरामद नहीं हो सका है।

प्रेम संबंध को लेकर रची गई थी साजिश

ग्रामीणों के अनुसार प्रमोद कुमार साफी और अनीता की शादी साल 2018 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद प्रमोद काम के लिए कोलकाता चले गए थे।

बताया गया कि इसी दौरान अनीता की मुलाकात जयप्रकाश मंडल से हुई और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। आरोप है कि दोनों साथ रहना चाहते थे, लेकिन बच्चों को रास्ते की बाधा मान रहे थे।

इसके बाद दोनों ने कथित रूप से बच्चों की हत्या की साजिश रची।

फैसले के बाद अब आगे क्या होगा?

फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को झंझारपुर उपकारा से किसी केंद्रीय कारागार में शिफ्ट किया जाएगा, क्योंकि उपकारा में पांच साल से ज्यादा सजा पाने वाले कैदियों को रखने का प्रावधान नहीं है।

अब इस मामले से जुड़े आदेश, दस्तावेज और फैसले की प्रतियां पटना हाईकोर्ट भेजी जाएंगी। कानूनी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही फांसी की सजा पर अंतिम मुहर लगेगी।

28 पन्नों के फैसले में कोर्ट ने ठहराया दोषी

न्यायालय ने अपने 28 पन्नों के फैसले में दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 और 34 के तहत दोषी ठहराया है। दोनों आरोपी 10 जुलाई 2023 से झंझारपुर उपकारा में बंद हैं।

यह मामला पूरे समाज के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि किसी भी रिश्ते, स्वार्थ या व्यक्तिगत संबंध से बढ़कर बच्चों की सुरक्षा और उनका जीवन होता है।