UP Solar Panel: बढ़ते बिजली बिल से परेशान लोगों के लिए सोलर पैनल एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आ रहा है। अब आप अपने घर की छत पर सोलर सिस्टम लगाकर बिजली का बिल काफी हद तक कम या लगभग शून्य कर सकते हैं। खास बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी योजना के तहत 1.08 लाख रुपए तक की सहायता भी मिल सकती है। हालांकि सोलर लगवाने से पहले कई जरूरी बातों को समझना जरूरी है, जैसे कितने किलोवाट का सिस्टम लेना चाहिए, कितना खर्च आएगा और कौन सा सिस्टम आपके लिए सही रहेगा।
कैसे लगभग शून्य हो सकता है बिजली का बिल?
पुराने शहर में रहने वाले आलोक श्रीवास्तव हर महीने लगभग 3 से 4 हजार रुपए तक बिजली का बिल भरते थे। उन्होंने अपने घर की छत पर 4 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगवाया।
उनके मुताबिक अच्छी धूप होने पर उनका सिस्टम रोज करीब 25 यूनिट बिजली तैयार करता है। यानी महीने में लगभग 750 यूनिट बिजली बन जाती है। अगर घर में बिजली की खपत 750 यूनिट तक रहती है तो उन्हें केवल मीटर चार्ज देना पड़ता है, जो लगभग 300 रुपए के आसपास होता है।
अगर खपत इससे ज्यादा होती है तो अतिरिक्त यूनिट के हिसाब से अलग बिजली बिल देना पड़ता है।
सरकार कितनी देती है सब्सिडी?
अगर आप घर पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगवाना चाहते हैं, तो पीएम सूर्य घर योजना और उत्तर प्रदेश सरकार की अतिरिक्त सहायता के तहत सब्सिडी का लाभ मिल सकता है।
सब्सिडी का विवरण:
1 kW सोलर प्लांट
केंद्र सरकार: ₹30,000
यूपी सरकार: ₹15,000
कुल सब्सिडी: ₹45,000
2 kW सोलर प्लांट
केंद्र सरकार: ₹60,000
यूपी सरकार: ₹30,000
कुल सब्सिडी: ₹90,000
3 kW सोलर प्लांट
केंद्र सरकार: ₹78,000
यूपी सरकार: ₹30,000
कुल सब्सिडी: ₹1,08,000
ध्यान देने वाली बात यह है कि 3 किलोवाट से ऊपर की अतिरिक्त क्षमता पर सब्सिडी नहीं मिलती।
सोलर सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें?
सब्सिडी का लाभ लेने के लिए आपको पीएम सूर्य घर पोर्टल पर आवेदन करना होगा।
आवेदन प्रक्रिया में अपना राज्य, बिजली वितरण कंपनी (DISCOM), बिजली बिल पर मौजूद कंज्यूमर नंबर और अन्य जानकारी भरनी होती है। इसके बाद पहचान पत्र और बिजली बिल अपलोड करना होता है।
आवेदन जमा होने के बाद साइट सर्वे किया जाता है। मंजूरी मिलने पर रजिस्टर्ड वेंडर का चयन करना होता है। इंस्टॉलेशन के बाद नेट मीटर लगाया जाता है और सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सब्सिडी सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
सोलर सिस्टम लगवाने में कितना खर्च आता है?
3 किलोवाट के सोलर सिस्टम पर अलग-अलग ब्रांड के अनुसार लगभग ₹1.68 लाख से ₹1.93 लाख तक खर्च आ सकता है।
इस लागत में शामिल होते हैं:
- सोलर पैनल
- इन्वर्टर
- वायरिंग
- स्ट्रक्चर
- इंस्टॉलेशन खर्च
सब्सिडी मिलने के बाद यह खर्च काफी कम हो सकता है।
पैसे नहीं हैं तो बैंक से ले सकते हैं लोन
अगर आपके पास पूरा बजट नहीं है तो सरकारी या निजी बैंक से सोलर लोन भी लिया जा सकता है।
सरकारी बैंक आमतौर पर लगभग 7% के आसपास ब्याज दर पर लोन देते हैं, जबकि निजी बैंकों की ब्याज दर लगभग 9% से 12% तक हो सकती है।
सब्सिडी की राशि लोन अकाउंट में जमा करके EMI का बोझ भी कम किया जा सकता है।
सोलर पैनल लगवाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सोलर लगवाने से पहले घर की छत और जगह की जांच करना जरूरी है।
1 किलोवाट सिस्टम के लिए करीब 100 वर्गफीट जगह चाहिए। वहीं 3 किलोवाट के लिए लगभग 300 वर्गफीट जगह जरूरी होती है।
ध्यान रखें कि जिस जगह पैनल लग रहा हो वहां पूरे दिन अच्छी धूप आती हो। अगर पेड़ या दूसरी इमारत की छाया पड़ती है तो बिजली उत्पादन 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
छत की मजबूती की जांच करना भी जरूरी है क्योंकि सोलर पैनल का वजन काफी होता है।
ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड सिस्टम में क्या अंतर है?
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम
यह सिस्टम बिजली विभाग के ग्रिड से जुड़ा होता है। दिन में सोलर से बनने वाली बिजली का इस्तेमाल घर में किया जाता है और अतिरिक्त बिजली नेट मीटर के जरिए ग्रिड में चली जाती है।
रात में जरूरत पड़ने पर बिजली ग्रिड से मिलती है। यह सिस्टम अपेक्षाकृत सस्ता होता है क्योंकि इसमें बैट्री लगाने की जरूरत नहीं होती।
सरकारी सब्सिडी भी इसी सिस्टम पर मिलती है।
ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम
ऑफ-ग्रिड सिस्टम बिजली विभाग के ग्रिड से जुड़ा नहीं होता। इसमें बैट्री की जरूरत होती है ताकि बिजली स्टोर की जा सके।
बिजली कटने के दौरान भी यह सिस्टम काम करता रहता है, लेकिन बैट्री के कारण इसकी लागत ज्यादा होती है।
साथ ही इस सिस्टम पर सरकारी सब्सिडी नहीं मिलती।
यूपी में तेजी से बढ़ रहा सोलर का इस्तेमाल
रूफटॉप सोलर लगाने के मामले में उत्तर प्रदेश देश में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में हर दिन करीब 2 हजार रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
फरवरी 2024 से जून 2026 तक लाखों सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से हजारों करोड़ रुपए की सब्सिडी भी दी गई है।
बढ़ती बिजली की कीमतों के बीच सोलर अब सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि जेब बचाने का भी एक मजबूत विकल्प बनता जा रहा है।