Delhi Protest: दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों और AI से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो की बाढ़ आ गई है। भारतीय एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान समर्थित और भारत विरोधी सोशल मीडिया हैंडल्स संगठित तरीके से गलत जानकारी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय सेना की फैक्ट चेक यूनिट और PIB Fact Check ने कई वायरल वीडियो और दावों की जांच कर उन्हें फर्जी बताया है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।
AI से बनाया गया रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का फर्जी वीडियो
हाल के दिनों में सबसे ज्यादा चर्चा में एक वीडियो रहा, जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
इस AI जनरेटेड डीपफेक वीडियो में दावा किया गया कि उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ “राज्य की पूरी ताकत” इस्तेमाल करने की चेतावनी दी है।
भारतीय सेना की फैक्ट चेक यूनिट और PIB Fact Check ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है। अधिकारियों के मुताबिक मूल वीडियो में छेड़छाड़ कर नकली ऑडियो जोड़ा गया और भ्रामक कैप्शन के साथ वायरल किया गया।
पूर्व सेना प्रमुख और एयर चीफ के नाम से भी फैलाए गए झूठे दावे
फर्जी प्रचार अभियान केवल रक्षा मंत्री तक सीमित नहीं रहा।
सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल किया गया, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नाम से प्रदर्शन को लेकर कथित बयान जोड़ा गया। जांच में यह दावा भी गलत निकला।
इसी तरह एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के नाम से भी AI तकनीक की मदद से तैयार किया गया वीडियो वायरल किया गया। PIB Fact Check ने बताया कि असली वीडियो में नकली ऑडियो जोड़कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई।
दिल्ली में सेना तैनात होने का दावा भी निकला फर्जी
सोशल मीडिया पर यह दावा भी वायरल हुआ कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भारतीय सेना को तैनात कर दिया गया है और सेना नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
भारतीय सेना ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है।
सेना ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPFs) और अन्य संबंधित एजेंसियों की है। इस तरह की कार्रवाई में सेना की कोई भूमिका नहीं है।
प्रदर्शन में मौत के दावे भी गलत पाए गए
सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में प्रदर्शन के दौरान लोगों की मौत होने का दावा किया गया।
PIB Fact Check ने इन दावों की जांच के बाद कहा कि दिल्ली पुलिस ने ऐसी किसी भी मौत की पुष्टि नहीं की है।
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की अफवाहें लोगों में डर और भ्रम फैलाने के उद्देश्य से शेयर की जा रही हैं।
पुराने वीडियो को नए बताकर किया जा रहा वायरल
जांच एजेंसियों ने पाया कि कई पुराने वीडियो और AI से तैयार किए गए क्लिप को नए कैप्शन के साथ साझा किया जा रहा है।
इन वीडियो को ऐसा दिखाया जा रहा है, मानो वे दिल्ली में चल रहे मौजूदा प्रदर्शनों के हों, जबकि उनका वर्तमान घटनाओं से कोई संबंध नहीं है।
अधिकारियों का कहना है कि यह सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने का एक सुनियोजित तरीका बन चुका है।
कैसे काम करता है यह दुष्प्रचार अभियान?
भारतीय सेना की फैक्ट चेक सेल के अनुसार, इस तरह के दुष्प्रचार का एक तय पैटर्न अपनाया जाता है।
- पहले किसी असली वीडियो को लिया जाता है।
- फिर उसमें AI की मदद से नकली ऑडियो जोड़ा जाता है।
- इसके बाद किसी वरिष्ठ अधिकारी या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के नाम से झूठा बयान जोड़ दिया जाता है।
- अंत में भ्रामक कैप्शन लगाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाता है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इसका उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों और सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाना है।
जांच एजेंसियां रख रही हैं सोशल मीडिया पर नजर
अधिकारियों का कहना है कि भारत विरोधी तत्व दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों का फायदा उठाकर जनमत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके लिए AI वीडियो, एडिटेड क्लिप और झूठे दावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच एजेंसियां ऐसे सोशल मीडिया नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
भारतीय सेना और PIB की लोगों से अपील
भारतीय सेना और PIB Fact Check ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो, फोटो या पोस्ट को बिना जांचे-परखे शेयर न करें।
लोगों से कहा गया है कि केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें। बिना पुष्टि के सामग्री साझा करना अनजाने में फेक न्यूज और दुष्प्रचार अभियान को बढ़ावा दे सकता है।