Pilibhit Murder Case: अनाथ हुए बच्चों का सहारा बने डीएम ज्ञानेंद्र सिंह, पढ़ाई से लेकर पालन-पोषण तक प्रशासन उठाएगा जिम्मेदारी
मां ने छीना पिता का साया, अब प्रशासन बनेगा दोनों बच्चों का सहारा
पीलीभीत। माधोटांडा थाना क्षेत्र के लोहरपुरी गांव में पत्नी द्वारा कथित प्रेम प्रसंग के चलते अपने पति उमाशंकर की हत्या किए जाने की दर्दनाक घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। इस खौफनाक वारदात में जहां दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, वहीं उनकी मां भी हत्या के आरोप में पुलिस हिरासत में है। ऐसे में अब इन दोनों बच्चों के भविष्य को लेकर जिला प्रशासन आगे आया है।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दोनों बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और अन्य आवश्यक जरूरतों की जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया है।
Pilibhit Murder Case: क्या था पूरा मामला
शुक्रवार को लोहरपुरी गांव निवासी उमाशंकर की उनकी पत्नी ने कथित रूप से कोल्ड ड्रिंक में नींद की गोलियां मिलाकर बेहोश किया और फिर साड़ी के फंदे से गला घोंटकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी महिला स्वयं माधोटांडा थाने पहुंच गई और पुलिस को हत्या की जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच अभी भी जारी है।
दो बच्चों के भविष्य की चिंता, डीएम ने दिखाई संवेदनशीलता
घटना के बाद सामने आया कि मृतक उमाशंकर अपने पीछे विकास और पुत्री गीता देवी को छोड़ गए हैं। पिता की मौत और मां के गिरफ्तार के बाद दोनों बच्चे पूरी तरह असहाय हो गए।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दोनों बच्चों को तत्काल सरकारी संरक्षण उपलब्ध कराया जाए तथा उनकी पढ़ाई, रहन-सहन और अन्य आवश्यक खर्चों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सरकारी योजनाओं का मिलेगा पूरा लाभ
डीएम ने निर्देश दिए हैं कि दोनों बच्चों को शासन द्वारा संचालित सभी पात्र योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों की शिक्षा किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके।
प्रशासन लगातार रखेगा निगरानी
जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन दोनों बच्चों की हर संभव सहायता करेगा। समय-समय पर उनकी स्थिति की निगरानी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मदद भी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि इस दर्दनाक घटना का असर बच्चों के भविष्य पर न्यूनतम पड़े और उन्हें बेहतर जीवन जीने का अवसर मिल सके।
मानवीय पहल की हो रही सराहना
जहां एक ओर यह हत्याकांड रिश्तों के टूटते विश्वास की भयावह तस्वीर पेश करता है, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन की यह संवेदनशील पहल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। अनाथ हुए दोनों बच्चों के लिए डीएम ज्ञानेंद्र सिंह द्वारा आगे बढ़ाया गया मदद का हाथ उनके भविष्य के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया है।
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