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आत्मनिर्भर भारत: क्या सिर्फ नौकरी ही कमाई का रास्ता है? पीलीभीत की 30 महिलाओं ने 12 दिन में बदल दी अपनी तकदीर..

आत्मनिर्भर भारत: क्या सिर्फ नौकरी ही कमाई का रास्ता है? पीलीभीत की 30 महिलाओं ने 12 दिन में बदल दी अपनी तकदीर..

आत्मनिर्भर भारत: मोमबत्ती से शुरू हुई कहानी, अब डिटर्जेंट, डिशवॉश और झाड़ू बनाकर भी कमाएंगी पैसा, जिला प्रशासन ने भी दिया पूरा साथ

पीलीभीत। क्या सिर्फ नौकरी ही कमाई का रास्ता है? बिल्कुल नहीं… अगर हुनर हो, सीखने की इच्छा हो और प्रशासन का साथ मिल जाए, तो स्वरोजगार भी सफलता की नई पहचान बन सकता है। पीलीभीत में 12 दिनों की एक ऐसी ट्रेनिंग ने 30 महिलाओं के हाथों में सिर्फ मोमबत्ती बनाने की कला ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनने की नई उम्मीद भी थमा दी है। अब ये महिलाएं सिर्फ उत्पाद नहीं बनाएंगी, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक ताकत भी बनेंगी। सबसे बड़ी बात यह है कि जिला प्रशासन ने भी इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का भरोसा दिया है।

12 दिनों की ट्रेनिंग ने सिखाए कमाई के कई हुनर

बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस 12 दिवसीय प्रशिक्षण में जनपद के विभिन्न विकास खंडों से आईं 30 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने डिजाइनर, सुगंधित और सजावटी मोमबत्तियां बनाना सीखा। इतना ही नहीं, उन्हें डिशवॉश, डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ) और झाड़ू जैसे रोजमर्रा के उपयोग वाले उत्पाद बनाने का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे एक ही उत्पाद पर निर्भर न रहें और अपनी आय के कई स्रोत तैयार कर सकें।

जिलाधिकारी बोले—बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रशासन निभाएगा

प्रशिक्षण के समापन समारोह में जिलाधिकारी ने महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का निरीक्षण किया और उनकी गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का असली उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब महिलाओं के बनाए उत्पाद बाजार तक पहुंचेंगे और उन्हें नियमित आय मिलेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन स्थानीय बाजारों, सरस मेलों और जिला स्तरीय बिक्री केंद्रों के माध्यम से इन उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री में हरसंभव सहयोग करेगा।

प्रशिक्षण ले रही महिलाओं का दावा—हमारा उत्पाद बेहतर भी, सस्ता भी

प्रशिक्षण ले रही एक युवती ने उत्साह के साथ बताया कि उनके द्वारा बनाई जा रही मोमबत्तियां बाजार में बिकने वाली कई मोमबत्तियों से बेहतर गुणवत्ता की हैं और उनकी कीमत भी कम है। उनका कहना है कि यदि लोगों का सहयोग मिला तो यह छोटा-सा प्रशिक्षण भविष्य में बड़ा रोजगार बन सकता है।

जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह का सहयोग बना महिलाओं के आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव

इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात केवल महिलाओं को हुनर सिखाना नहीं रही, बल्कि उन्हें बाजार से जोड़ने की ठोस पहल भी रही। समापन समारोह में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं के उत्पाद केवल बनकर नहीं रह जाएंगे, बल्कि उन्हें स्थानीय बाजार, सरस मेले और जिला स्तरीय आउटलेट्स तक पहुंचाने में जिला प्रशासन हरसंभव सहयोग करेगा। यह भरोसा उन महिलाओं के लिए किसी नई उम्मीद से कम नहीं है, जो अब तक अपने उत्पादों की बिक्री को लेकर चिंतित थीं। प्रशासन का यह सहयोग न केवल स्वयं सहायता समूहों के आत्मविश्वास को मजबूत करेगा, बल्कि उन्हें स्थायी स्वरोजगार स्थापित करने का अवसर भी देगा। यदि प्रशिक्षण, उत्पादन और बाजार—इन तीनों कड़ियों को इसी तरह जोड़ा जाता रहा, तो पीलीभीत की अनेक महिलाएं आने वाले समय में अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकती हैं और जिले में महिला सशक्तिकरण का यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

ट्रेनर फ़िज़ा खान ने बताया ऐसे बदलेगी महिलाओं की जिंदगी

वहीं प्रशिक्षण की ट्रेनर फ़िज़ा खान ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और युवतियों को सिर्फ एक हुनर सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि सभी प्रतिभागी पूरे मन से प्रशिक्षण ले रही हैं और अब अपना स्वयं का काम शुरू करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि प्रशिक्षण के दौरान तैयार किए गए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में जिला प्रशासन पूरा सहयोग करेगा, जिससे महिलाओं के लिए स्वरोजगार की राह और आसान होगी।

आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूत करता एक सफल प्रयास

दरअसल, ऐसे प्रशिक्षण सिर्फ उत्पाद बनाना नहीं सिखाते, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की सोच बदलते हैं। जब महिलाएं अपने हाथों से उत्पाद तैयार करती हैं, उन्हें बाजार में बेचती हैं और अपने परिवार की आय बढ़ाने में भागीदार बनती हैं, तो पूरा गांव आर्थिक रूप से मजबूत होता है। यही सरकार की भी मंशा है कि स्वयं सहायता समूह बचत तक सीमित न रहें, बल्कि छोटे-छोटे उद्योगों के जरिए रोजगार पैदा करें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दें।

पीलीभीत बना आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

पीलीभीत का यह 12 दिवसीय प्रशिक्षण इसी सोच का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां महिलाओं के हाथों में सिर्फ मोमबत्तियां नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भविष्य की नई रोशनी भी दिखाई दे रही है। यदि ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे, तो आने वाले समय में यही महिलाएं अपने गांव और जिले की आर्थिक प्रगति की नई पहचान बन सकती हैं।