NEET-UG 2026 Paper Leak मामले में CBI ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी की चार्जशीट के मुताबिक, पेपर लीक की साजिश परीक्षा से काफी पहले रची गई थी और इसमें NTA की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तीन subject experts की कथित भूमिका सामने आई है। आरोप है कि इन एक्सपर्ट्स ने प्रश्नपत्र तैयार करने के दौरान सवाल याद किए, फिर उन्हें बाहर ले जाकर बिचौलियों और कोचिंग नेटवर्क के जरिए छात्रों तक पहुंचाया। CBI ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
28 जुलाई को राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल हुई चार्जशीट
CBI ने 28 जुलाई 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी ने इसमें 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का हवाला दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
पेपर लीक के पीछे पूरा नेटवर्क था, सिर्फ एक व्यक्ति नहीं
CBI के मुताबिक यह किसी एक व्यक्ति की करतूत नहीं थी। जांच में NTA की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े subject experts, कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों और बिचौलियों के बीच कथित सांठगांठ सामने आई है। एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा से पहले ही सवालों तक पहुंच हासिल कर उन्हें चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई थी।
सवाल याद करके बाहर ले जाने का आरोप
CBI की जांच के मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने और मॉडरेशन की प्रक्रिया के दौरान तीन subject experts को सवालों तक पहुंच थी। आरोप है कि उन्होंने सवाल याद किए और बाद में उन्हें छात्रों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। कुछ मामलों में सवालों को हाथ से लिखवाया गया, ताकि सीधे डिजिटल कॉपी या फोटो के रूप में सबूत न छोड़ा जाए।
P.V. कुलकर्णी पर 135 सवाल नोट करने का आरोप
CBI के मुताबिक Chemistry subject expert P.V. कुलकर्णी को प्रश्नपत्र की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका मिली थी। जांच में आरोप है कि उन्होंने प्रश्नपत्र के सवालों और विकल्पों को याद कर छात्रों को बताए। CBI की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया था कि अप्रैल 2026 के आखिरी सप्ताह में उन्होंने अपने घर पर छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित कीं और सवाल, विकल्प तथा सही उत्तर बताए। छात्रों द्वारा हाथ से लिखे गए सवाल वास्तविक NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए।
तीन NTA subject experts पर गंभीर आरोप
चार्जशीट में NTA की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तीन subject experts के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इनमें Biology expert मनीषा गुरुनाथ मंधारे, Chemistry expert प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और Physics expert मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। तीनों पर अपनी भूमिका और प्रश्नपत्र तक पहुंच का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करने का आरोप है।
मनीषा गुरुनाथ मंधारे पर क्या आरोप है?
CBI के मुताबिक मनीषा गुरुनाथ मंधारे NTA की परीक्षा प्रक्रिया में Biology subject expert के तौर पर जुड़ी थीं। एजेंसी का आरोप है कि उन्हें Biology के प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी और उन्होंने कथित तौर पर छात्रों तक सवाल पहुंचाने में भूमिका निभाई। मई 2026 में CBI ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी पर क्या आरोप है?
P.V. कुलकर्णी Chemistry से जुड़े subject expert थे। CBI का आरोप है कि उन्होंने प्रश्नपत्र तक अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर सवाल और उनके विकल्प हासिल किए और बाद में चुनिंदा छात्रों को बताए। एजेंसी के अनुसार, उनके घर पर हुई विशेष कक्षाओं में छात्रों ने सवालों को हाथ से लिखा और ये सवाल वास्तविक NEET पेपर से मेल खाते पाए गए।
मनीषा संजय हवलदार पर क्या आरोप है?
मनीषा संजय हवलदार Physics subject expert थीं। CBI ने उन्हें भी प्रश्नपत्र लीक नेटवर्क का हिस्सा बताया है। चार्जशीट में आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान मिली पहुंच का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर Physics के सवाल बाहर पहुंचाए गए।
लीक पेपर छात्रों तक कैसे पहुंचाया गया?
जांच के मुताबिक सवालों को सीधे एक ही माध्यम से नहीं भेजा गया। CBI ने डिजिटल डिवाइस, चैट रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच की है। आरोप है कि बिचौलियों और कोचिंग नेटवर्क के जरिए सवाल अलग-अलग छात्रों तक पहुंचाए गए। कुछ मामलों में सवाल हाथ से लिखवाए गए, जिससे डिजिटल सबूत कम से कम रहें।
Telegram, WhatsApp और PDF का भी इस्तेमाल
CBI की जांच में डिजिटल माध्यमों से सवालों के प्रसार के सबूत भी सामने आए हैं। जांच एजेंसी ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और चैट रिकॉर्ड को अपने साक्ष्यों का हिस्सा बनाया है। आरोपियों के बीच बातचीत और लीक सवालों के प्रसार की कड़ियों को फोरेंसिक जांच के जरिए जोड़ा गया है।
बिचौलियों ने आगे बढ़ाया पेपर लीक नेटवर्क
चार्जशीट में मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय निवृत्ति लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार और यश यादव समेत कई आरोपियों को नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया है। CBI के मुताबिक, इन लोगों ने कथित तौर पर सवाल हासिल करने, उनका प्रसार करने और अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
13 आरोपियों में कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग भी
CBI ने केवल subject experts और बिचौलियों को ही आरोपी नहीं बनाया है। चार्जशीट में लातूर के RCC Coaching Institute से जुड़े शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर और पुणे के APMA Coaching Institute से जुड़े तेजस हर्षदकुमार शाह के नाम भी हैं। इनके अलावा डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे समेत अन्य आरोपियों को भी कथित नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है।
CBI को 360 गवाह और 422 दस्तावेज मिले
CBI ने अपनी चार्जशीट में जांच के दौरान जुटाए गए बड़े सबूतों का विवरण दिया है। एजेंसी ने 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का हवाला दिया है। इसके साथ ही डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय और सवालों के अकादमिक विश्लेषण से जुड़े साक्ष्य भी जांच का हिस्सा हैं।
पेपर लीक का मकसद पैसे और कोचिंग नेटवर्क को फायदा पहुंचाना था?
CBI के मुताबिक जांच में पेपर लीक के पीछे आर्थिक लाभ के साथ-साथ कुछ कोचिंग नेटवर्क को फायदा पहुंचाने की बात सामने आई है। आरोप है कि चुनिंदा छात्रों को पहले से सवाल उपलब्ध कराकर उनके परिणाम बेहतर करने और इससे कोचिंग संस्थानों की सफलता दर बढ़ाने की कोशिश की गई।
आरोपियों के बैंक खाते और लॉकर फ्रीज
CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े बैंक खातों और अन्य वित्तीय संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है।
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में 13 आरोपी
CBI की चार्जशीट में जिन 13 लोगों के नाम हैं, उनमें तीन NTA subject experts के अलावा बिचौलिए, कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग और अन्य आरोपी शामिल हैं। सूची में मनीषा गुरुनाथ मंधारे, P.V. कुलकर्णी, मनीषा संजय हवलदार, मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय निवृत्ति लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार, यश यादव, मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर और तेजस हर्षदकुमार शाह शामिल हैं।
NEET परीक्षा 3 मई को हुई थी, बाद में दोबारा परीक्षा हुई
NEET-UG 2026 की मूल परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। पेपर लीक की जांच के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और बाद में 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। CBI ने 12 मई को शिक्षा मंत्रालय की शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू की थी।
आरोप साबित होना अभी बाकी है
CBI की चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं। चार्जशीट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि सभी आरोपियों को दोषी साबित कर दिया गया है। अंतिम फैसला अदालत में पेश किए गए सबूतों और सुनवाई के बाद होगा। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।